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Thursday, November 26th, 2020

माँ बाप को परेशान करने पर बे-दखल हो सकते है वारिस

संजय राय,आई एन वी सी,पंचकूला,संजय राय, आई एन वी सी, पंचकूला, बुजुर्ग यदि अपनी संपत्ति अपने बच्चों के नाम करवाते हैं और उसके बाद यदि बच्चे अपने माता-पिता को परेशान करते हैं तो ऐसी परिस्थितियों में बुजुर्ग बच्चों के नाम करवाई गई संपत्ति की रजिस्ट्री व वसीयत वापस ले सकते हैं। ये जानकारी पंचकूला के अतिरिक्त उपायुक्त श्री जगदीप सिंह ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सीनियर सिटिजन क्लब, सैक्टर 25 पंचकूला में पेरेंटस एण्ड सिनियर सिटीजन एक्ट, 2007 के अंतर्गत जागरुक्ता शिविर के अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा कि अब बुजुर्गों को किसी भी प्रकार से डरने की आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसा कानून आ गया है कि यदि बच्चे अपने माता-पिता की सेवा नहीं करते तो वे बच्चों के नाम की गई संपत्ति  को कानूनी तौर पर वापिस ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे अपने पिता को खर्चा नहीं देते तो वह अपना मकान बैंक के सपुर्द कर सकता है। उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर यदि उस मकान की कीमत एक करोड है तो बैंक उस बुजुर्ग को आजीवन इस राशि की किश्त  बना कर उन्हें अदायगी करेगा। उन्होंने कहा कि यदि उस बुजुर्ग की मृत्यु हो जाती है तो बैंक बच्चों को मकान देने के लिए कहेगा। यदि बच्चे मकान को रखना चाहते हैं तो वे बैंक द्वारा उनके पिता को दी गई राशि वापिस लौटानी होगी और यदि बच्चे मकान अपने पास नहीं रखना चाहते तो बैंक उसे नीलाम कर देगा और अपनी राशि वसूल करके शेष राशि उस बुजुर्ग के बच्चों को दे दी जाएगी। उन्होंने बुजुर्गों के लिए हरियाणा सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर सी.जे.एम. एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री जयबीर सिंह ने बताया  लोगों को कानूनी सहायता के सम्बंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंनें लोगों को बताया कि लोक अदालतों में किस प्रकार  के विवादों का आपसी सहमती से समझौता करवाया जाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जन उपायोगी सेवाओं से सम्बंधित अपना मुकदमा स्थाई लोक अदालतों में ले जा कर समय और धन दोनो की बचत करें। उन्होंने बताया कि लोक अदालतों में किये गए फैसलों के विरूद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नही की जा सकती। उन्होंने कानूनी सहायता लेने की दिशा में लोगों को ज्ञानवर्धक जानकारी उपलब्ध करवाने के तौर-तरीके भी विस्तार से बताए। उन्होंने यह भी बताया कि मुफ्त कानूनी सेवा क्या है और सरकारी खर्चे से वकील मिल सकता है। इसके अतिरिक्त कोर्ट फीस लगाना, गवाहों का खर्चा, फैंसले की नकल प्राप्त करना व टाईप आदि का खर्चा भी सरकार अदा करती है। मुफ्त कानूनी सेवा सभी दीवानी, अपराधिक राजस्व तथा प्रशासनिक मुकदमों के लिए दी जाती है। उन्होंने बताया कि मुकदमा किसी भी अदालत में लम्बित हो या मुकदमा करना हो तो सिविल जज व जुडिशियल मैजिस्ट्रेट के न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय तक या किसी ट्रिब्यूनल में मुकदमे के लिए कानूनी सेवा ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि मुफ्त कानूनी सेवा के हकदार पिछडे वर्ग, अनुसूचित जाति या अनूसूचित जन जाति में से हों, महिलाएं एवं बच्च, यदि आप न्यायिक हिरासत में हैं, मानसिक रोगी, अपंग व्यक्ति या ओद्यौगिक कर्मचारी हैं, ऐसे व्यक्ति मुफ्त कानूनी सेवा लेने के हकदार हैं। उन्होंने इस अवसर सिनियर सिटीजन एक्ट, 2007 के तहत वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी अधिकारों  एवं हरियाणा विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं  के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस मौके पर वरिष्ट नागरिकों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में वकील मनवीर राठी ने भी कानूनी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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