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Tuesday, October 27th, 2020

माँ बनने का अहसास होता है खास

- डा. नुपुर गुप्ता - 


माँ बनना इस दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास होता है। इस अहसास को सेलिबे्रट करने का मौका देता है मदर्स-डे। मगर जो महिलाएं किसी परेशानी की वजह से मां नहीं बन पाती है, उनके लिए भी उम्मीदें बाकी हैं।वो भी मदर्स-डे पर मातृत्व को महसूस कर सकती है। इसमें अत्याधुनिक तकनीकों जैसे आईवीएफ काफी कारगर साबित हो रही है। आईवीएफ के जरिये कई महिलाओं को मां बनने का सुख मिला है और उन्होंने भी मनाया हैअपनी जिंदगी का पहला मदर्स-डे।

एक मां को अपने मातृत्व का आनंद लेने का। वहीं बच्चों को मौका मिलता है इस खास दिन अपनी मां को खास महसूस कराने का। मां और बच्चे दोनों के लिए ही मदर्स-डे एक बेहद खास दिन होता है। दोनों एक-दूसरे सेजुड़े ही इस तरह होते हैं कि उनकी खुशियां भी दोनों के साथ से जुड़ जाती है। मगर मातृत्व का जश्न मनाने वाला ये दिन उन मांओं के लिए बेहद तकलीफदेह साबित होता है, जो किसी कारण से मां नहीं बन पाई है। आखिर मांबनना किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत पल होता है। इस पल का वो बेसब्री से इंतजार करती है। मगर कुछ कारणों से कुछ महिलाएं सही समय पर मां नहीं बन पाती है। कई कोशिशों के बावजूद भी जब गर्भधारण मेंसफलता नहीं मिलती है, तो यह स्थिति निराशा और अवसाद का भी कारण बन जाती है। इस दौरान अक्सर महिलाओं की उम्र भी 40 तक पहुंच जाती है। माना जाता है कि इस उम्र के बाद गर्भधारण में समस्या होती है। ऐसे मेंहमेशा के लिए संतानहीनता का सामना भी करना पड़ सकता है।

निसंतानता के कारण :

जानकार बताते हैं कि शादी की बढ़ती उम्र, भाग-दौड़ व तनाव के चलते इन दिनों संतानहीनता की समस्या बढ़ती जा रही है, ऐसे में दंपत्ति नि:संतान रह जाते हैं। इस बात को वे परिवार व समाज के सामने जाहिर करने सेभी बचते हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर वर्ष जितनी शादियां होती है, उनमें से 10 से 15 प्रतिशत महिलाएं संतानहीनता से ग्रस्त होती है। ऐसे में क्या किया जाए? इस सवाल का जवाब है किसी अच्छे फर्टिलिटी केन्द्र काचुनाव कर चिकित्सकीय मार्गदर्शन में इलाज प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।

आईवीएफ किनके लिए है उपयोगी ?

१. बंद ट्यूब व ट्यूब में संक्रमण

किसी भी ट्यूबल ब्लॉक का मुख्य कारण है यूटरस में इन्फेक्शन, यह इन्फेक्शन शारीरिक संबंध या यूरीन में इन्फेक्शन के कारण हो सकता है। ऑपरेशन या ओवरी सिस्ट के कारण भी यह हो सकता है, यूटरस में टी.बी.होने से भी ट्यूबल ब्लॉक हो जाता है और फैलोपियन ट्यूब में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने से भी दिक्कतें और बढ़ सकती है।

फैलोपियन ट्यूब के बंद होने के कई कारण होते हैं- जैसे संक्रमण, टी.बी., बार-बार गर्भपात होना, गर्भधारण को रोकने के विकल्प, ऑपरेशन इत्यादि।

२. माहवारी बंद होने की स्थिति में

महिलाओं में अण्डों की मात्रा सीमित होती है जो हर महीने कम होती रहती है। 35 वर्ष की उम्र के बाद अण्डों की गुणवत्ता व संख्या में तेजी से गिरावट होती है और जब किसी महिला में अण्डे खत्म हो जाते हैं तब उनकामासिक धर्म बंद हो जाता है। ऐसी महिलाओं का गर्भाशय भी सिकुड़ जाता है। इन महिलाओं को हार्मोन की दवा देकर माहवारी शुरू की जाती है, जिससे गर्भाशय की आकृति पुन: सामान्य हो जाती है तथा आई.वी.एफ. प्रक्रिया केजरिये बाहरी (डोनर) अण्डे की सहायता से पति के शुक्राणु का इस्तमाल कर भ्रूण बना लिया जाता है। इस भ्रूण को भ्रूण प्रत्यारोपण के माध्यम से गर्भाशय के अंदर प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।

३. शुक्राणुओं की कमी

शुक्राणुओं में कमी का मतलब है पुरुषों के वीर्य में सामान्य से कम शुक्राणुओं का होना। शुक्राणुओं में कमी होने को ओलिगोस्पर्मिया भी कहा जाता है। वीर्य में शुक्राणुओं का पूरी तरह से खत्म होना एजुस्पर्मिया कहलाताहै। पुरुष के शुक्राणुओं में कमी के कारण महिला के गर्भधारण करने की संभावना बहुत कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में भी आईवीएफ तकनीक कारगर है। कुछ मामलों में देखा गया है कि आईवीएफ तकनीक भी बार-बारअसफल होती है। दरअसल कुछ महिलाओं को आईवीएफ के दौरान भी गर्भपात का सामना करना पड़ता है या सफल प्रत्यारोपण के बावजूद भी आईवीएफ फेल हो जाता है, ऐसे मामलों में निराश होने की जरूरत नहीं है, कई बारदूसरे से तीसरे प्रयास में सफलता संभव हो सकती है।

४. पीसीओडी की समस्या

कई बार गर्भधारण ना कर पाने की वजह पीसीओडी की समस्या के रूप में भी सामने आती है। चिकित्सकीय भाषा में महिलाओं की इस समस्या को पोलीसिस्टिक ओवरी डिजीज के रूप में जाना जाता है। इससेमहिलाओं की ओवरी और प्रजनन क्षमता पर असर तो पड़ता ही है साथ ही, आगे चल कर उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और हृदय से जुड़े रोगों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है। पीसीओडी होने पर महिलाओं की पूरी शारीरिकप्रक्रिया ही गड़बड़ा जाती है। महिलाओं के अंडाशय में तरल पदार्थ से भरी कई थैलियां होती है, जिन्हें फॉलिकल्स या फिर सिस्ट कहा जाता है। इन्हीं में अंडे विकसित होते हैं और द्रव्य का निर्माण होता है। एक बार जब अंडाविकसित हो जाता है, तो फॉलिकल टूट जाता है और अंडा बाहर निकल जाता है। फिर अंडा फैलोपियन ट्यूब से होता हुआ गर्भाशय तक जाता है। इसे सामान्य ओव्यूलेशन प्रक्रिया कहा जाता है। वहीं, जो महिला पीसीओडी सेग्रस्त होती है, उसमें प्रजनन प्रणाली अंडे को विकसित करने के लिए जरूरी हार्मोन का उत्पादन ही नहीं कर पाती है। ऐसे में, फॉलिकल्स विकसित होने लगते हैं और द्रव्य बनना शुरू हो जाता है, लेकिन ओव्यूलेशन प्रक्रिया शुरूनहीं होती है। परिणामस्वरूप, कई फॉलिकल्स अंडाशय में ही रहते हैं और गांठ का रूप ले लेते हैं। इस स्थिति में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन नहीं बनते और इन हार्मोन्स के बिना मासिक धर्म प्रक्रिया बाधित या फिर अनियमित हो जातीहै, जिस कारण गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है।

 
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About the Author
Dr. Nupur Gupta
Author  and Columnist
Dr. Nupur Gupta  ,Gynecologist & Director , Well Woman Clinic, Gurguram    
 Disclaimer : The views expressed by the author in this feature are entirely her own and do not necessarily reflect the views of INVC NEWS.
 

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