Tuesday, February 18th, 2020

महिलाओ के लिए बनेगा थानों में अलग डेस्क - हूड्डा सरकार

women of haryanaइंद्रा राय, आई एन वी सी, हरियाणा, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज कहा कि राज्य के सभी पुलिस थानों में महिलाओं व बच्चों की शिकायतों के निवारण हेतू अलग से विशेष डैस्क बनाये जाने के अतिरिक्त महिलाओं की मदद के लिये सभी जिलों में महिला हैल्प लाइन संख्या-1091 शुरू की गई है। मुख्यमंत्री आज यहां हरियाणा विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के दौरान विधायक श्री सम्पत सिंह, श्रीमती सुमिता सिंह, श्री भारतभूषण बत्तरा और श्री रामपाल माजरा द्वारा लाये गये ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार राज्य में महिलाआें की सुरक्षा पर पूरा ध्यान देने के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा के प्रति भी वचनबद्घ है। राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति शांतिपूर्ण एवं नियंत्रण में है तथा साम्प्रदायिक सद्भाव एवं शांति का माहौल है। राज्य पुलसि द्वारा किये गये निरंतर, सुसंगत एवं समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 2012 के दौरान राज्यभर में भारतीय दण्ड संहिता के तहत अपराध लगभग नियंत्रण में हैं और बलात्कार की घटनायें गत वर्ष की तुलना में कम हुई हैं। राज्य स्तर पर केवल महिलाओं के विरूद्घ अपराधों की निगरानी, शीघ्र जांच एवं ट्रायल हेतू राज्य पुलिस मुख्यालय पर एक अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक और एक महिला पुलिस महानिरीक्षक तैनात किये गये हैं। महिलाओं के विरूद्घ होने वालों अपराधों के पर्यवेक्षण के लिये प्रत्येक जिले में एक महिला उप-पुलिस अधीक्षक/निरीक्षक रैंक के पद की महिला अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है। महिलाओं की शिकायतों तथा उनके विरूद्घ अपराधों में त्वरित रिस्पोंस के लिये समस्त राज्य में महिला हैल्प लाइन नं0 1091 की व्यवस्था की गई है। इस महिला हैल्प लाइन पर शिकायतें सुनने के लिये विशेष तौर से प्रशिक्षित महिला पुलिस कर्मियों की ही नियुक्ति की गई है। उच्च एवं मध्यम वर्ग के वरिष्ठ अधिकारी इस हैल्प लाइन पर मिलने वाले शिकायतों पर तुरंत कार्यवाही एवं उनका निवारण करने के साथ-साथ इसकी कार्यप्रणाली पर नजर भी रखते हैं। महिलाओं के विरूद्घ होने वाले अपराधों से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटान के लिये 21 फास्ट ट्रेक अदालतें स्थापित की जा रही हैं। महिलाओं के विरूद्घ अपराधों को रोकने तथा उत्पीडि़त महिला की तुरंत मदद करने के लिये प्रत्येक जिले में कम से एक महिला पीसीआर वैन तैनात की गई है। गुड़गांव, फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में क्रमशः पांच एवं तीन महिला पीसीआर वैन तैनात की गई हैं। राज्य में ऐसी 30 पीसीआर वैन कार्यरत हैं, जो न केवल पीडि़त महिला की मदद करती हैं बल्कि आवश्यकता होने पर उन्हें तुरंत डाक्टरी सुविधा भी उपलब्ध करवाती हैं। ये वैनस सभी संवेदनशील स्थलों की निरन्तर पैट्रोलिंग करती रहती हैं। हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने राज्य की सभी उत्पीडि़त महिलाओं एवं बच्चों को कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने के लिये उन्हें कानूनी सलाहकार देने की एक योजना बनाई है, जिसके तहत न्यायिक सचिवों द्वारा महिला वकीलों की प्रतिनियुक्ति करने को कहा गया है। सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिये गये हैं कि वे यौन उत्पीड़न से संबंधित एकत्रित किये गये नमूनों की वैज्ञानिक जांच हरियाणा मैडिको लीगल मैन्यूल-2012 के अनुसार ही करें ताकि जांच से जुड़े सभी साक्ष्यों की गुणवत्ता बढ़े और आरोपियों की सजा दर में भी बढ़ोतरी हो तथा अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके। महिलाओं के विरूद्घ अपराधों की निरंतर रूप से समीक्षा करने के लिये जिला स्तर पर जिला मैजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक एवं जिला न्यायवादी को लेकर जिला स्तरीय कमेटियां गठित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय पुलिस को भेद्यता मानचित्रण तैयार करने के लिये लड़कियों के स्कूलों एवं कॉलेजों, कमज़ोर वर्गों के क्षेत्रों, मलिन बस्तियों आदि में लगातार गश्त करने और यहां स्वयं सहायता समूह गठित करने के निर्देश दिये गये हैं। यौन अपराधियों की पहचान करने और उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिये सभी निवारक उपाय करने, अकेली कामकाजी महिलाएं, बच्चे एवं नौकरानियां जो उच्च जोखिम वाले समूह हैं, बारे लोगों को संवेदशील बनाने और अपराधियों में डर बैठाने के लिये एक जागरूकता अभियान चलाने, खेल विभाग के सहयोग से सभी महिला शिक्षण संस्थानों में लड़कियों और महिलाओं को आत्मसुरक्षा के उपाय सिखाने के लिये विशेष शिविर आयोजित करने, महिला एवं बाल विकास विभाग जैसे अन्य विभागों के सहयोग से पीडि़तों को पुनर्स्थापित करने की योजनाओं पर अमल करने, पीडि़त महिला के साथ संवेदनशीलता बरतने, महिलाओं के विरूद्घ होने वाले अपराधों से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में दिन रात गश्त लगाने तथा आपराधिक प्रवृति के लोगों को पकड़ने के लिये उपयुक्त स्थलों पर नाकाबंदी करने को कहा गया है। न्याय वैधिक प्रयोगशाला के निदेशक को विशेष रूप से महिला उत्पीड़न के मामलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर करने और उनका 15 दिनों के अंदर निपटान करने को कहा गया है। डीएनए डिविजन को मजबूत बनाया गया है और इसे आधुनिक एवं तीव्र गति वाले विशलेषणात्मक उपकरणों से लैस किया गया है। कन्या विद्यालयों, महाविद्यालयों, सिनेमाघरों, टयूशन व कोचिंग सैन्टर एवं बाजारों में सादी वर्दी में पुलिस कर्मियों की तैनाती के आदेश दिये गये हैं, ताकि छेड़छाड़ को रोका जा सके और अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार किया जा सके। इसके अतिरिक्त, असामाजिक तत्वों, आपराधिक प्रवृति के लोगों तथा भगौड़ो की धरपकड़ के लिये पुलिस द्वारा राज्यस्तरीय अभियान चलाया गया है। राज्य के सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज महानिरीक्षकों, पुलिस उपायुक्तों एवं जिला पुलिस अधीक्षकों को महिलाओं के विरूद्घ अपराधों की रोकथाम के लिये विशेष कदम उठाने के निर्देश दिये गये हैं । जिला पुलिस प्रमुख को यौन उत्पीड़न की जानकारी प्राप्त होने पर बिना देरी के अपराध स्थल का दौरा करने को कहा गया है। तत्काल प्राथमिकी अंकित करने, अभियुक्त को गिरफ्तार करने, घटना स्थल से संग्रहित किये गये साक्ष्यों को तुरंत फोरैन्सिक विज्ञान प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजने, पीडि़ता एवं उसके परिवार को महिला पुलिस, जिला महिला संरक्षण अधिकारी, जिला अधिवक्ता द्वारा तुरंत परामर्श, सांत्वना एवं भरोसा दिलाये जाने, जांच अधिकारी द्वारा प्रतिदिन बिना किसी देरी के सावधानी से केस-डायरी लिखी जाने, आवश्यक होने पर पीडि़ता एवं उसके परिवार को पुलिस सहायता सुरक्षा उपलब्ध करवाने, बलात्कार एवं छेड़छाड़ के मामलों में अपराधियों की गिरफ्तारी जहां तक संभव हो केस दर्ज होने के 24 घंटों के अंदर की जाती है तथा बलात्कार के मामलों की जांच एक महीने से भी कम समय में और छेड़छाड़ के मामलों की जांच 15 दिनों में करने को कहा गया है। हिलाओं के विरूद्घ सभी अपराधों विशेषकर यौन उत्पीड़न के मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट तत्काल दर्ज की जा रही है और जहां तक संभव है मामले की जांच किसी महिला अधिकारी को ही दी जा रही है, अन्यथा मामले की जांच महिला पुलिस कर्मियों के सहयोग से की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस समय हरियाणा पुलिस में नियुक्त महिला पुलिस कर्मचारियों की संख्या लगभग 6.5 प्रतिशत है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर दस प्रतिशत किये जाने की योजना है। जिला सोनीपत में दो महिला पुलिस थानों की स्थापना की जा चुकी है और वे सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, गुड़गांव, फरीदाबाद एवं झज्जर जिलों में एक-एक महिला पुलिस थाना स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। हरियाणा पुलिस अकादमी में पुलिस के सभी पदों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संवदेनशील बनाने हेतू ‘संवेदी पुलिस सशक्त समाज’ शीर्षक के तहत एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसके अतिरिक्त, सभी रेंज मुख्यालयों एवं जिला स्तर पर लघु-पाठ््यक्रमों, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। पुलिस-पब्लिक सम्पर्क और कम्यूनिटी पुलिसिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी थानों में महिलाओं एवं बच्चों की शिकायतों के निवारण के लिये अलग से विशेष डैस्क बनाये गये हैं, जहां प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की गई है। राज्य सरकार ने विभिन्न मामलों को उजागर करने वालों, सूचना का अधिकार के तहत कार्य करने वालों, शिकायतकर्ताओं एवं गम्भीर मामलों के गवाहों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जा रही है। पुलिस अधिकारियों को महिलाओं, बच्चों एवं 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को थानों में बुलाते समय कानूनी प्रावधानों का पालन करने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं और बच्चों को किसी भी मामले में जांच पड़ताल के लिये थानों, चौकियों, सीआईए थानों में नहीं बुलाने और उनके ब्यान उनके अपने घरों में उनके परिजनों की एवं इलाके के जिम्मेदार लोगों की उपस्थिति में लेने का कहा गया है। वर्ष 2011 के दौरान बलात्कार के 733, शालीनता भंग के 474, अपहरण के 634, छेड़छाड़ के 490, दहेज हत्या के 331, दहेज उत्पीड़न के 2711 मामले हुए, जबकि वर्ष 2012 में ये मामले क्रमशः 686, 521, 733, 534, 333 एवं 3148 रहे। वर्ष 2012 में 118 सामुहिक बलात्कार सहित कुल 686 बलात्कार के मुकद्दमे दर्ज किये गये, जबकि वर्ष 2011 में 117 सामुहिक बलात्कार सहित कुल 733 बलात्कार के मुकद्दमे दर्ज किये गये, जो दर्शाते हैं कि वर्ष 2012 में इस प्रकार के मामले घटे हैं। पुलिस को संवेदनशील बनाया गया है कि वो महिलाओं को आगे आने और अपनी शिकायत दर्ज करवाने को प्रेरित करे। थानों में महिलाओं के विरूद्घ अपराधों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच किये जाने के फलस्वरूप महिलाओं में पुलिस के प्रति विश्वास की भावना को बल मिला है। सरकार राज्य की सभी लड़कियों एवं महिलाआें को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाने के लिये प्रतिबद्घ है। वह राज्य में आम जनता के बीच सुरक्षा भावना को मजबूत करने और राज्य की महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करवाना उच्च प्राथमिकता समझती है। जांच में तेजी एवं फास्ट ट्रेक ट्रायल के फलस्वरूप बलात्कार के कुछ मामलों के ट्रायल को एक महीने के भीतर ही पूरा कर लिया गया है। बसों में सफर के दौरान महिलाओं की सुरक्षा हेतु राज्य परिवहन के सभी महा प्रबंधकों एवं निजी बस संचालकों को महिलाओं के साथ बसों में या बस अड्डों पर होने वाली छेड़छाड़ से बचाने के लिये तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिये गये हैं। ऐसी शिकायत पर वाहन को निकटतम थाने में ले जाने बारे भी निर्देश दिये गये हैं। पब्लिक वाहनों में महिला हैल्पलाइन नम्बर दर्शाना, चालक-परिचालक का फोटोग्राफ, बस मालिक का टेलिफोन नम्बर, पुलिस कंट्रोल रूम का नम्बर, काले शीशों एवं पर्दों को हटाना जैसे कदम उठाये गये हैं। महिलाओं के विरूद्घ विशेष एवं जघन्य मामलों की न्यायलयों में ठीक से पैरवी हेतू प्रकृष्ट सार्वजनिक वकीलों को विशेष न्यायवादी नियुक्त किया जाता है। इसके अतिरिक्त, सरकारी वकीलों को भी निर्देश दिये गये हैं कि महिलाओं के विरूद्घ अपराध के मामलों में वे संवेदनशीलता एवं कुशाग्र बुद्घि का प्रदर्शन करें ताकि महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके और महिलाओं के विरूद्घ हुए अपराधों में संलिप्त अपराधियों को सजा दिलवाना सुनिश्चित किया जा चुके। राज्य पुलिस द्वारा संदिग्ध अपराधियों की पहचान घटना स्थल पर ही करने के लिये ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के माध्यम से राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो, मधुबन में संग्रहित डाटा से मिलान किया जा रहा है। गिरफ्तार किये गये अपराधियों के फिंगर प्रिंटस लाइव स्कैनर द्वारा रिकार्ड किये जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लिंग संवेदनशीलता का कोर्स भी डाला गया है और लिंग संवेदनशील कार्यक्रम भी आयोजित किये गये हैं।

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