Wednesday, November 13th, 2019
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महिलाओं की निकाली जा रही बच्चादानी

invc-मामला इंदिरागांधी गैस राहत अस्पताल का
-डाक्टर कर रहे लापरवाही, ऑपरेशन के बाद भी हो गया प्रसव
हेमंत पटेल ,
आई एन वी सी ,
भोपाल।
इंदिरागांधी गैस राहत अस्पताल में महिला मरीजों के जान से खेला जा रहा है। ऐसे दो प्रकरण सामने आए हैं। एक महिला ने बच्चादानी (यूटेरस) निकाले जाने का आरोप लगाया है। दूसरा मामला ऑपरेशन के बाद बच्चा होने का है।
शासकीय अस्पतालों में यह गड़बडिय़ां पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा हरकत में नहीं आता। यहां अच्छी बात यह है इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की जिला टीम ने जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर आरोपाी डॉक्टरों ने महिला मरीजों को धमकियां देना शुरू कर दी है। मरीजों के परिजनों ने इसकी भी शिकायत दर्ज कराई है।
प्रकरण-1
राजीव नगर, सेमरा की रहने वाली शारदा लोधी का, जिसका विवाह जीतू लोधी (भोपाल) के साथ करीब तीन वर्ष हुआ था। शादी के बाद शारदा के गर्भवती होने पर नियमित जांच के लिए इंदिरा गांधी अस्पताल जाती थी। इसके बाद प्रसव के लिए भर्ती हुई तो डॉ. कल्पना नायर ने उसको बताया, बिना ऑपरेशन बच्चा नहीं होगा। ऑपरेशन किया गया, लेकिन बच्चे को बचा। ऑपरेशन के दौरान महिला की बच्चादानी निकाल ली। दूसरे डॉक्टर से जांच में इस बात का खुलासा हुआ।
प्रकरण-2
नारियलखेडा निवासी शहनाज परवीन की आपबीती भी कुछ कुछ इसी तरह की है। शहनाज का परिवार नियोजन का ऑपरेशन 21 मार्च 2012 को डॉ. सुषमा निगम और डॉ. पूजा सिंह ने किया था। शहनाज को सालभर में ही एक और बच्चा हो गया। इस अनचाहे बच्चे के पालन पोषण को लेकर शहनाज परेशान है। इसकी शिकायत उसने सीएम हाउस तक की है, लेकिन राहत नहीं मिली।
-अब डॉक्टर की धमकी
शारदा लोधी को अब डॉ. कल्पना नायर धमका रही है। शारदा ने बताया, जब दूसरे डॉक्टर से पेट दर्द की शिकायत के चलते चेकअप कराया तो सामने आया कि बच्चादानी नहीं है। बिना बताए बच्चादानी निकालने की शिकायत मैंने डॉ. कल्पना नायर से की तो उसने उल्टा धमकाया और भगा दिया। डॉ. बोली, तुम चाहे जिससे शिकायत करो मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। तुम कभी यह साबित नहीं कर पाएगी कि तुम्हारा यूटेरस मैंने ही निकाला है।
सीएमएचओ करेंगे जांच
दोनों ही मामलों की जांच कलेक्टर निकुंज कुमार श्रीवास्तव ने जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज शुक्ला को सौंपी है। कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि एक माह के भीतर दोनों महिलाओं की शिकायत का समाधान कराएं। वहीं लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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