अनुराधा सिंह

मुम्बई. हिंदी फ़िल्मों के महान फ़िल्म निर्माता व निर्देशक शक्ति सामंत का वीरवर शाम मुंबई में निधन हो गया. वो 82 साल के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार थे. सामंत ने कल शाम पांच बजे सांताक्रूज़ स्थित अपने निवास पर आख़िरी सांस ली. उनका अंतिम संस्कार आज मुंबई में ही होगा.

शक्ति सामंत ने हमेशा सामाजिक नज़रिये को ध्यान में रखकर फिल्मों का निर्माण किया. शक्ति सामंत की पकड़ सामाजिक परिवेश में पैदा हुई कहानियों पर बहुत अच्छी तरह थी. यह कहना बिल्कुल ग़लत नहीं होगा कि वी. शांताराम और राज कपूर के नज़रिये को शक्ति सामंत ने अपनी फिल्मों के ज़रिये समाज के सामने रखा और हमेशा समाज में महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए महिला प्रधान किरदारों को अपनी फिल्म में हमेशा से ही मुख्य भूमिका में रखा और जब-जब शक्ति सामंत ने ऐसा किया तो सफलता ने भी उनकी सोच को आसमान तक पहुंचा दिया. मिसाल के तौर पर फिल्म कटी पतंग को बारीकी से देखें तो ऐसी पूरी फिल्म ऐसे महिला वर्ग पर केन्द्रित थी जो प्यार में अंधी होकर अपनी सभी सामाजिक जिम्मेदारियों को भूल जाती हैं और उसका खामियाजा भुगतती हैं. फिल्म अमर-प्रेम समर्पित प्यार की सबसे बढ़िया जीती-जागती तस्वीर है.  फिल्म अराधना किसी भी नारी के द्वारा समाज को दिया गया अब तक का सबसे अच्छा संदेश है. शक्ति सामंत ने जब से महिला प्रधान किरदार को छोड़कर पुरुष प्रधान किरदार को लेकर फिल्मों का निर्माण करना शुरू किया तभी से शायद सफलता भी उनसे दूर होती चली गई और उसका जीता-जागता उदाहरण है फिल्म कटी पतंग, अमर-प्रेम, अनुराग और अराधना.  उन्हें अराधना, अनुराग और अमानुष की कामयाबी के बाद फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों से नवाज़ा किया गया था.

शक्ति सामंत का जन्म 13 जनवरी 1926 को पश्चिम बंगाल के बर्धमान में हुआ था. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा ली और अभिनेता बनने की चाह में वो मुंबई चले आए, लेकिन यहां उन्हें कामयाबी नहीं मिली. फिर 1948 में उन्होंने सहायक निर्देशक के तौर काम करना शुरू किया और जल्दी ही उन्होंने पहली फ़िल्म बहू का निर्देशन किया. यह फिल्म 1954 में रिलीज़ हुई.  इसके बाद 1957 में उन्होंने शक्ति फ़िल्म्स के नाम से अपनी फिल्म कंपनी बनाई   और फ़िल्म बनी हावड़ा ब्रिज का निर्माण किया. फिल्म हावड़ा ब्रीज की सफलता ने रातों-रात शक्ति सामंत को फ़िल्मी दुनिया में कामयाब निर्माता-निर्देशकों की श्रेणी में ला खड़ा किया. इसके बाद शक्ति सामंत ने 43 फ़िल्मों का निर्माण और निर्देशन किया. कटी पतंग, अनुराग, अमानुष, आराधना, चाइना टाउन, कश्मीर की कली, और एन इवनिंग इन पेरिस जैसी बेहतरीन फिल्मों पर नज़र डालें तो फिल्मों की कहानी के साथ-साथ फिल्म का संगीत भी हमेशा के लिए अमर हो गया है.

 

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