Tuesday, March 31st, 2020

महाकाल की धरती से निकलेंगे जलवायु परिवर्तन के समाधान के रास्ते : अनिल माधव दवे

Anil Madhav Dave,MP Anil Madhav Dave, Anil Madhav Dave MP ,Anil Madhav Dave NEWSआई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली, ‘‘प्राचीन भारतीय जीवन दर्शन में प्रकृति व मनुष्य के बीच आत्मीक सम्बन्ध की परिकल्पना की गई  जिसमें पंचमहाभूतों के आपसी समन्वय से सृष्टि के विकास का सारगर्भित चिन्तन दिखाई पड़ता है  और मनुष्य से यह अपेक्षा की गई है कि पंच तत्वों के इस समन्वय में बिना बाधा पहुँचाते हुए प्रकृति के विकास में भागीदार बन,े  किन्तु आज पंच महाभूतों की सुसंगति अन्धाधुन्ध प्रकृति के शोषण की वजह से तहस-नहस होती जा रही हैं। परिणामस्वरूप आज हम जलवायु परिवर्तन जैसी गम्भीर समस्या का सामना कर रहे है।‘‘ उक्त आशय के विचार सांसद राज्यसभा श्री अनिल माधव दवे ने व्यक्त किये। श्री दवे भोपाल में जलवायु परिवर्तन पर होने जा रहे राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं।

श्री दवे ने बताया कि आगामी 21-22 नवम्बर को भोपाल में जलवायु परिवर्तन व ग्लोबल वार्मिग: समाधान की ओर विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है।  उन्होंने कहा कि उज्जैन में आगामी अप्रेल 2016 में होने जा रहे सिंहस्थ (कुम्भ) से पूर्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रंृखला में जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन प्रस्तावित है। यह सम्मेलन भोपाल विधानसभा परिसर में आयोजित किया जाएगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में इस सम्मेलन में आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी का मुख्य उद्बोधन होगा। दो दिवसीय आयोजन में पहली बार देश में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर आध्यात्मिक चिन्तक, तकनीकि विशेषज्ञ, ख्याति प्राप्त शिक्षाविद्, राष्ट्रीय अर्न्तराष्ट्रीय विकास व नीतियों से जुडे़ विशेषज्ञ, परम्परागत ज्ञान रखने वाले और कार्य कर रहे संगठनों व संस्थाओं के प्रतिनिधि एक मंच पर जलवायु परिवर्तन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने-अपने विचार व अनुभव रखेंगे। श्री दवे ने बताया कि भोपाल सम्मेलन के पश्चात महाकाल की धरती उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ के दौरान एक अर्न्तराष्ट्रीय सम्मेलन का भी आयोजन किया जायेगा और वैचारिक मंथन के बाद जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पक्षों पर भारतीय चिन्तन परम्परा के संदेश को विश्व समुदाय तक पहुॅंचाया जायेगा। सम्मेलन के अन्त में सामूहिक भागीदारी से ‘‘सिंहस्थ घोषणा पत्र“ तैयार होगा जिसकी सिफारिशे केन्द्र सरकार को भेजी जायेगी।  एप्को के कार्यकारी निदेशक श्री अजातशत्रु श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन पर हो रही वैश्विक वार्ताएं व सम्मेलन आर्थिक व वैज्ञानिक पक्ष पर केन्द्रित रहती है। किन्तु जिस प्रकार आज जलवायु परिवर्तन का संकट लोगों के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। उसे देखते हुए वैकल्पिक समाधान की ओर बढ़ना होगा। इस समस्या के समाधान के सूत्र, वैदिक, उपनिशदीय व शास्त्रीय चिन्तन में दिखाई पड़ते हैं।
श्री अनिल माधव दवे जी की अध्यक्षता में आयोजित भोपाल सम्मेलन में देश के विभिन्न भागों से 21 व 22 नवम्बर को करीब 600 लोगों की भागीदारी होगी।

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