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Monday, September 28th, 2020

महंगाई के मसले पर केन्द्र ने खड़े किए हाथ

सपना कुमारी नई दिल्ली. खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी का दौर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है और इस मामले में अब केन्द्र सरकार ने भी अपने हाथ खड़े कर दिये हैं। केन्द्र में सत्ताारूढ़ कांग्रेस ने साफ शब्दों में कह दिया है कि खेती की बढ़ती लागत के इस दौर में खाद्य पदार्थों की कीमतों को न्यूनतम स्तर पर कायम रख पाना सरकार के बूते की बात नहीं है और देश का संघीय ढ़ांचा केन्द्र को प्रदेश के बाजारों में सीधा हस्तक्षेप करने की इजाजत भी नहीं देता है। ऐसे में संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक केन्द्र केवल सलाहकार की भूमिका ही निभा सकता है और यह प्रदेश सरकारों की जिम्मेवारी है कि वे जमाखोरों व कालाबाजारियों के प्रति सख्त रवैया अपनाएं ताकि खाद्य पदार्थों की आसमान छू रही कीमतों में कुछ हद तक कमी लायी जा सके। कांग्रेस की मानें तो केन्द्र ने अपने संवैधानिक दायित्व का पालन करते हुए प्रदेश सरकारों को महंगाई की समस्या पर काबू पाने के लिये लगातार बहुमूल्य सुझाव दिया है और जिन राज्यों ने केन्द्र की सलाहों पर तत्परता से अमल किया है वहां महंगाई की समस्या से निपटने में काफी सहूलियत हो रही है।  कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने बताया कि महंगाई का मसला बेहद संवेदनशील है जिस पर पूरी गंभीरता से ध्यान दिये जाने की जरूरत है। शकील के मुताबिक पिछले कुछ समय में खाद, बीज, जुताई, सिंचाई और मजदूरी की लागत में काफी वृध्दि हुई है जिसके कारण किसानों के लिये खेती काफी खर्चीली हो गयी है। ऐसी सूरत में सरकार कभी भी किसानों पर इस बात के लिये दबाव नहीं बना सकती कि वे खर्चीली खेती के उत्पादों को कम कीमत पर ही बेच दें। शकील का साफ कहना है कि लोगों को खाद्य पदार्थों की पहले से अधिक कीमत अदा करने के लिये तैयार हो जाना चाहिये क्योंकि उत्पादन लागत में हो रही वृध्दि को देखते हुए कृषि उत्पादों की कीमतों में तेजी आना लाजमी ही है। साथ ही शकील ने यह बात भी स्वीकार की कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में वर्तमान समय में जो भारी वृध्दि देखी जा रही है उसकी वजह केवल उत्पादन लागत में हुई वृध्दि ही नहीं है बल्कि इसमें जमाखोरों व कालाबाजारियों की भी काफी बड़ी भूमिका है। शकील ने साफ शब्दों में कहा कि जमाखोरों व कालाबाजारियों पर अंकुश लगाने का काम राज्य सरकारों का ही है और इसमें केन्द्र सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।  शकील की मानें तो केन्द्र द्वारा विभिन्न मौकों पर प्रदेश सरकारों को काफी समय से लगातार हिदायत दी जाती रही है कि वे खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिये कालाबाजारियों व जमाखोरों के खिलाफ सख्ती से पेश आये। कई प्रदेशों ने केन्द्र की हिदायतों को काफी गंभीरता से लिया है और इसी का नतीजा है कि पंजाब में दस हजार टन चीनी की बड़ी जमाखोरी का भंडाफोड़ संभव हो सका है। शकील ने स्वीकार किया कि कई प्रदेश सरकारों ने जमाखोरों के खिलाफ काफी सख्त रवैया अपनाया हुआ है जिसका नतीजा यह हुआ है उन राज्यों में महंगाई की वृध्दि दर में काफी कमी देखी जा रही है लेकिन अधिकांश प्रदेशों की सरकारों ने बाजार को उसके अपने हाल पर छोड़ दिया है और जमाखोरी को रोकने के प्रति वे जरा भी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। शकील के मुताबिक प्रदेश सरकारों द्वारा अपने दायित्वों का ठीक ढ़ंग से निर्वहन नहीं किये जाने के कारण ही खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृध्दि का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। शकील ने साफ शब्दों में कहा कि महंगाई की समस्या से निपटने के लिये प्रदेश सरकारों को ही आगे आना होगा क्योंकि देश के संघीय ढ़ांचे के स्वरूप व भारतीय संविधान द्वारा दी गयी व्यवस्था के मुताबिक जमाखोरी व कालाबाजारी पर काबू पाने में केन्द्र की भूमिका केवल सलाहकार की ही हो सकती है और वह इसमें प्रदेश सरकारों को बिना मांगे कोई ठोस सहयोग नहीं कर सकता है।  उक्त बयानबाजी करके कांग्रेस द्वारा महंगाई के मसले के सांप को प्रदेश सरकारों के गले डालने की जो कोशिश की जा रही है उसे देखते हुए स्पष्ट है कि इस कठिन चुनौती के सामने केन्द्र ने हथियार डालकर अपने हाथ खड़े कर दिये हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद महंगाई में हो रही लगातार वृध्दि ने केन्द्र के हौसले इस कदर पस्त कर दिये हैं कि हालिया संसदीय सत्र में देश में खाद्यान्न का रिकार्ड भंडार मौजूद होने का दावा करनेवाले कृषि मंत्री शरद पवार को भी अब यह कहने के लिये मजबूर होना पड़ा है कि धान की बुवाई उम्मीद के मुताबिक नहीं होने के कारण चावल कीमतों में भी तेजी का सिलसिला देखने को मिल सकता है। बहरहाल औपचारिक तौर पर तो महंगाई को रोकने की कोशिशों का सिलसिला बंद करने का केन्द्र का कोई इरादा नहीं है लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने खेती की लागत में हो रही वृध्दि का हवाला देते हुए खाद्यान्न की बढ़ी हुई कीमत अदा करने के लिये आम लोगों को तैयार रहने को कहा है उसके बाद अब इस समस्या का निवारण काफी हद तक भगवान भरोसे ही मुमकिन है।

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