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Friday, November 27th, 2020

मध्यप्रदेश : सौदेबाजी और गद्दारी बना मुख्य मुद्दा

भोपाल । प्रदेश में सत्ता का भविष्य तय करने वाले 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव का प्रचार अंतिम दौर में पहुंच गया है। इसके साथ भाजपा और कांग्रेस के संगठन ने बूथ प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित कर लिया है। कांग्रेस ने विधायकों को प्रभार की सीट के 50-50 मतदान केंद्र का जिम्मा देने की रणनीति बनाई है। प्रचार थमने के बाद वे यहां स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से मतदाता संपर्क अभियान चलवाएंगे। इंटरनेट मीडिया की टीम से समन्वय बनाने की जिम्मेदारी भी प्रभारी के साथ-साथ विधायक की रहेगी। कांग्रेस ने मंडलम और सेक्टर के माध्यम से मतदान केंद्र स्तर पर प्रबंधन की तैयारियां की हैं। संगठन की यह इकाई मतदान के दिन तक मोर्चा साधे रहेगी।
अभी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन का दौर हो चुका है। मतदाताओं से संपर्क का सिलसिला लगातार चल रहा है। मतदाता सूची के हर पन्नो के लिए एक-एक कार्यकर्ता तैनात है। इसे संबंधित मतदाताओं तक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ की बात पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस बार इंटरनेट मीडिया का भी पार्टी काफी उपयोग कर रही है। उम्मीदवार के अलावा पार्टी का आइटी प्रकोष्ठ अपने स्तर पर भी काम कर रहा है। इसमें उपचुनाव होने की मुख्य वजह, कांग्रेस के पूर्व विधायक की गद्दारी, भाजपा सरकार के घोटाले, कर्जमाफी पर रोक, सामूहिक विवाह की राशि कम करने की घोषणा और बिजली बिल अधिक आने की बात को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
सौदेबाजी और गद्दारी ही मुख्य मुद्दा
ग्वालियर-चंबल में उपचुनाव के मीडिया प्रभारी केके मिश्रा का कहना है कि बूथ प्रबंधन के लिए पार्टी ने रणनीति तैयार की है। विधायक, विधानसभा क्षेत्र प्रभारी के साथ वरिष्ठ नेता स्वयं मतदान केंद्रों का जिम्मा संभालेंगे। इस पूरे काम की निगरानी पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के स्तर से हो रही है।

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