Sunday, April 5th, 2020

भारत सरकार बंद करना चाहती है घाटे में चल रहा 'सांभर साल्ट 

जयपुर. राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) घाटे में चल रही सांभर साल्ट लिमिटेड (Sambhar Salts Limited) को पूरी तरह अपने अधीन लेने पर विचार कर रही है और इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है. सांभर साल्ट राज्य व केंद्र सरकार का संयुक्त उद्यम है. उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, ‘सांभर साल्ट लिमिटेड को पूर्ण रूप से राज्य सरकार के अधीन लेने के लिए मुख्य सचिव स्तर की समिति गठित की गई है. समिति की रिपोर्ट के आधार पर सांभर साल्ट को राज्य सरकार के अधीन लेने या नहीं लेने का निर्णय किया जाएगा.’

मीणा ने प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों के जवाब में बताया कि सांभर साल्ट लिमिटेड भारत सरकार का उपक्रम है. इसमें 60 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत सरकार की और 40 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकार की है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अगस्त 2019 में कहा था कि सांभर साल्ट लिमिटेड लगातार घाटे में चल रही है और भारत सरकार इसे बंद करने की तैयारी में है. अतः भारत सरकार सांभर साल्ट लिमिटेड को राज्य सरकार को देने के लिए तैयार है.

5 क्षेत्रों में औद्योगिक अकादमिक कार्यक्रम की होगी शुरूआत


उधर, शासन सचिव, विभाग की मुग्धा सिन्हा ने सोमवार को कहा कि विभाग द्वारा 5 क्षेत्रों में औद्योगिक अकादमिक कार्यक्रम प्रारम्भ किया जायेगा. जिसमें एग्रीटेक, मेडिटेक, टेक्सटाइलटेक, स्टोन एवं फेब्रिकेशन सम्मिलित होंगे. उन्होंने कहा कि औद्योगिक अकादमिक कार्य हेतु रीको एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संयुक्त रूप से राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देंगे. सिन्हा सोमवार को यहां स्टेच्यू सर्किल स्थित बीआईएसआर में नवीन कार्यक्रम एवं योजना के कोर ग्रुप की बैठक को संबोधित कर रही थी. बैठक में राज्य में उद्योगों एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों के मध्य परस्पर सहयोग से प्रारम्भ किए जाने वाले नीतिगत मुद्दों एवं कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा की गई.
उन्होंने कहा कि राज्य में एग्रीटेक को बढ़ावा देने के लिए कृषि विकास केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. मुग्धा सिन्हा ने विप्रो के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मार्च, 2020 तक औद्योगिक अकादमिक तैयार करे . उन्होंने कहा कि औद्योगिक अकादमिक कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालयों में हुए शोध को आगे लाने के लिए औद्योगिक विशेषज्ञ 6 माह तक विश्वविद्यालयों में जाकर शोध को व्यापक रूप देने में मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रारम्भ में पाँच क्षेत्रों को तय किया गया है. उन्हीं तकनीक को आगे बढ़ाया जाएगा जो समाज के लिए हितकर है.PLC.

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