Friday, November 22nd, 2019
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भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में

आई एन वी सी न्यूज़
लखनऊ,
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी न कहा कि शिवावतार महायोगी गुरु गारखनाथ एक महान सिद्ध यागी एवं विद्वान मनीषी थे। योग साधना और तपस्या में तत्पर हाकर उन्हांन जनमानस मं याग ज्ञान के प्रति प्रगाढ़ अभिरुचि उत्पन्न की थी। आमजन के आध्यात्मिक उन्नयन के उद्देश्य से गुरु गारखनाथ जी न संस्कृत और लोकभाषा में यागपरक साहित्य का सृजन किया था।

मुख्यमंत्री जी आज यहां उत्तर प्रदश हिन्दी संस्थान में युग प्रवर्तक महायोगी गारखनाथ पर केन्द्रित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगाष्ठी के उद्घाटन सत्र को सम्बाधित कर रह थ। उन्हांने कहा कि स्वस्थ जीवन जीन के लिए महायागी गोरखनाथ जी ने याग का आवश्यक बताया था। याग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धराहर है। तन-मन का स्वस्थ रखने एवं सुखानुभूति के साथ
जीवन-यापन का ‘याग’ अमाघ मंत्र है। स्वस्थ जीवन के लिए शुद्धि अत्यन्त आवश्यक है। यह शुद्धि आन्तरिक एवं वाह्य दानों हानी चाहिए। शिवावतार महायोगी गुरु गारखनाथ एक महान सिद्ध पुरुष होन के साथ-साथ समाज सुधारक भी थ। उन्होंन सदैव सामाजिक कुरीतियां और धार्मिक आडम्बरां का विराध किया था।

मुख्यमंत्री जी न इस अवसर पर सुश्री शची मिश्र की ‘भाजपुरी के संस्कार गीत’, डॉ0 कृष्णचन्द्र लाल की ‘दवेन्द्र कुमार बंगाली’, डॉ0 आम प्रकाश पाण्डय की ‘वैदिक वांग्मय का परिशीलन’, डॉ0 कन्हैया सिंह की ‘रामचरित उपाध्याय ग्रंथावली’ तथा डॉ0 रामकृष्ण की ‘अथातो भक्ति जिज्ञासा’ पुस्तकां का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री जी न कहा कि भारतवर्ष की ऐसी काई भाषा नहीं, जिसमें गोरखनाथ जी से सम्बन्धित कथाएं न पायी जाती हां। महायोगी गारखनाथ भाजपुरी एवं हिन्दी (खड़ी बोली) के आदि कवि हैं। हिन्दी भाषा और उसकी उत्पत्ति में गुरु गारखनाथ की रचनाआं का स्थान सर्वप्रमुख है। उनके द्वारा रचित गारक्षकल्प, गारक्षसंहिता, गारक्षशतक, गारक्षगीता, योगमार्तण्ड आदि कृतियां हमारे साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महायागी गोरखनाथ भारतीय धर्मसाधना एवं साहित्य के अप्रतिम व्यक्तित्व हैं। उनके द्वारा प्रवर्तित एवं संघटित ‘नाथ-सम्प्रदाय’ का हिन्दूकुश एवं हिमालय की गाद में समुद्र पर्यन्त बसे भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादश के साथ-साथ चीन, मंगालिया, तिब्बत, जापान एवं पूर्वी द्वीप समूह में व्यापक प्रभाव रहा है। अपने युग मं एक व्यापक सामाजिक-आध्यात्मिक एवं धार्मिक क्रान्ति को जन्म दन वाले महायोगी गारखनाथ न लोक-कल्याण का शाश्वत मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदश हिन्दी संस्थान द्वारा महायागी गुरु गारखनाथ जैसी दिव्य विभूति पर राष्ट्रीय संगाष्ठी का आयाजन किया जाना अत्यन्त सराहनीय है।

मुख्यमंत्री जी न कहा कि गुरु गारखनाथ जी के अभ्युदय की समकालीन परिस्थितियों तथा सामाजिक, धार्मिक व आध्यात्मिक परिवर्तन में गोरखनाथ की अद्वितीय भूमिका का समग्र शाधपरक विवेचन भी युगधर्म है। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में गुरु गारखनाथ जी पर एक शाधपीठ की स्थापना की गयी है। उन्होंन कहा कि गुरु गारखनाथ जी पर एक इनसाइक्लोपीडिया तैयार किया जाना आवश्यक है, जिससे वर्तमान और भावी पीढ़ी उनके विषय में जान सके।

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ0 रमश पाखरियाल ‘निशंक’ ने अपन सम्बाधन में कहा कि महायागी गोरखनाथ जी जैसे महान व्यक्तित्व पर संगाष्ठी का आयाजन किया जाना अत्यन्त प्रशंसनीय है। गुरु गारखनाथ जी को शिव का रूप माना जाता है। प्रत्यक व्यक्ति सुख-दुःख में शिव का याद करता है। उनके द्वारा दी गयी शिक्षाएं न सिर्फ भारत में बल्कि कई दशां में भी प्रचलित हैं, जा भारतीय ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा को भी सिद्ध करती है।

केन्द्रीय मंत्री न कहा कि याग के माध्यम से ही तन व मन का स्वस्थ रखा जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मादी जी के प्रयासों से योग को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। नय भारत के निर्माण व ‘एक भारत, श्रष्ठ भारत’ की संकल्पना का साकार करन में याग का विशष महत्व है। उन्होंन कहा कि भारत विश्वगुरु बनन की दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है।

कार्यक्रम का सम्बाधित करत हुए उ0प्र0 हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ0 सदानन्द प्रसाद गुप्त ने कहा कि नाथ साहित्य काफी समृद्ध साहित्य है। गुरु गारखनाथ जी के भजन न सूक्ति का रूप ले लिया है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ0 कन्हैया सिंह न कहा कि इतिहास के शून्य समय में गुरु गोरखनाथ न एक अलख जलायी। उन्होंन सामाजिक समरसता का समाज का जो संदेश दिया वह आज भी अत्यन्त प्रासंगिक है।

प्रमुख सचिव भाषा श्री जितन्द्र कुमार न कार्यक्रम में आये सभी लोगां के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर सूचना विभाग एवं उ0प्र0 हिन्दी संस्थान के निदशक श्री शिशिर तथा बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थ।



 

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