Thursday, July 2nd, 2020

भारत में 13 ग्रुप कोरोना वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं

नई दिल्ली। आज स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया गया कि कोरोना से लड़ाई में लगा पूरा तंत्र, हम भारत को बचाने में सक्षम हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए पूरा तंत्र लगा हुआ है और ये भारत को कोरोना से बचाने के लिए सक्षम है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि अधिकतर वैक्सीन और दवाइयां हमारे देश में बनती हैं और दूसरे देशों में जाती हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कोरोना से बचने के लिए हमें 5 काम करने जरूरी है। ये पांच काम है 1. सफाई, 2. सरफेस की सफाई, 3. सोशल डिस्टेंसिंग, 4. ट्रैकिंग, 5. टेस्टिंग। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वैक्सीन को बनाने के लिए 10–15 साल लगते हैं और 2–3 मिलियन का खर्च आता है लेकिन इसे हमें एक साल में करना होगा। इसके लिए 300 बिलियन तक खर्च होंगे। भारत में करीब 30 ग्रुप इस पर काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया कि वैक्सीन बनाना बहुत ही रिस्की काम है। 4 तरह के वैक्सीन हो सकते हैं- पहला, एमआरएनए वैक्सीन इसमें इसी वायरस का प्रोटीन लेकर उसे देखते हैं कि इससे इम्यून सिस्टम पर क्या फर्क पड़ता है। दूसरा, स्टैंडर्ड वैक्सीन वायरस का वीक वर्जन लेते हैं जो फैलते हैं पर कोई नुकसान नहीं होता. जैसे रोटा वायरस वैक्सीन। तीसरा, किसी और के वायरस के बैक बोन में इस वायरस के कॉम्पोनेंट्स इसमें डालने होते हैं। चौथा, इसी तरह के वायरस के प्रोटीन को लैब में ले जाकर बनाते हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वैक्सीन आने के बाद किसी स्विच के जरिए ये एक बार में सबके पास नहीं पहुंचाया जा सकता है। दवाएं केमिकली तौर पर काम करती हैं और ऐसी दवा बनाना जो सिर्फ वायरस को नष्ट करे और शरीर को नुकसान न पहुंचाए तो ये बहुत मुश्किल काम है। साथ ही कहा कि नई दवाई बनाना बहुत बड़ी चुनौती है वैक्सीन की तरह ही इसमें भी काफी समय लगता है। ऐसे कई प्रयास फेल हो चुके हैं।
प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया कि दुनिया में जो बच्चों को स्टैंडर्ड तीन वैक्सीन लगती है, उनमें से दो भारत में बनती है। वैक्सीन और दवाई के साथ हम और तेजी से कोरोना से लड़ सकते हैं, लेकिन तब तक इसी का पालन कोरोना से लड़ने के जो नियम बनाए हैं उन्हीं का पालन करना होगा।
डॉ. के विजय राघवन ने बताया कि भारत में 13 ग्रुप वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन बनाने की कोशिश तीन तरह से हो रही हैं। एक तो हम खुद कोशिश कर रहे हैं। दूसरा बाहर की कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और तीसरा हम लीड कर रहे हैं और बाहर के लोग हमारे साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दवा बनाने में सबसे बड़ी चुनौती है कि यह शरीर को नुकसान न पहुंचाए। दूसरी चुनौती है कि समय पर दवा दी जाए। डॉ. राघवन ने कहा कि अभी आरटी-पीसीआर टेस्ट होता है। यह जेनेटिक मटीरियल टेस्ट है। दूसरी तरह भी टेस्ट हो सकता है जो अभी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि दवा बनाने के लिए स्टूडेंट्स का हैकाथॉन किया जा रहा है। इसमें जल्दी दवा बनाने की होड़ होगी। इसके बाद आईसीएमआर ICMR इसकी जांच करेगी। PLC.

 

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