आई.एन.वी.सी,,
लखनऊ,,
पीस पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रभारी युवा प्रकोष्ठ  संदीप पाण्डेय सहित सैकड़ों नौजवानों ने आज यहां समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। उन्होने सत्ता परिवर्तन में प्रदेश अध्यक्ष  अखिलेश यादव को सहयेाग देने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि समाज के कमजोर, पीड़ित और पिछड़ों का भला केवल समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष  मुलायम सिंह यादव द्वारा ही सम्भव है। समाजवादी पार्टी में ही नौजवानों का भविष्य है जबकि बसपा सरकार ने तो नौजवानों को हर तरह से अपमानित किया है। अखिलेश यादव ने पार्टी में शामिल होने वाले तमाम नौजवान साथियों का स्वागत किया। उन्होने उम्मीद जताई कि नए साथियों से पार्टी को मजबूती मिलेगी। प्रदेश प्रवक्ता  राजेन्द्र चैधरी,  पवन पाण्डेय, मंहिला सभा की अध्यक्ष  लीलावती कुशवाहा ने भी नौजवानो को सम्बोधित किया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुलायम सिंह यादव ने कहा कि नौजवान ही परिवर्तन के वाहक होते हैं। समाजवादी पार्टी नौजवानों की पार्टी है। इससे जवानों का लगातार जुड़ते जाना शुभ लक्षण है। उनकी ऊर्जा से सन् 2012 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी तभी सन् 2014 में केन्द्र में सरकार बनने का सपना साकार हो सकेगा। उन्होने कहा कि दिल्ली कलेक्टर है राज्य लेखपाल इसीलिए असली लड़ाई तो केन्द्र की है यूपी जीतने के बाद दिल्ली की बड़ी लड़ाई के लिए तैयारी करनी है।  यादव ने कहा कि इच्छाशक्ति संकल्प और साहस ही आगे बढ़ने के सूत्र है। लोकतंत्र में अन्याय के विरूद्व सतत संघर्ष चलना चाहिए। उन्होने कहा समाजवादी पार्टी का नौजवान हर संघर्ष में अनुशासित ढंग से आगे रहा है। उसके आंदोलन में कहीं अराजकता नहीं हुई। यही नौजवान व्यवस्था परिवर्तन करेगें। राज्य की भ्रष्ट सरकार को  हटाना बहुत जरूरी है। उन्होने कहा कि भारत में ही आर्थिक विषमता सबसे ज्यादा है। दुनिया में इतना अंतर कहीं नहीं है। समाजवादी पार्टी की राय में अमीरी गरीबी के बीच 1ः 10 का अंतर होना चाहिए। देश की खुशहाली किसान की खुशहाली पर निर्भर होती है। इस देश में अभी भी 65 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है लेकिन उसकी ही सबसे ज्यादा उपेक्षा है। किसान को फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाता है। कर्ज और मंहगाई की वजह से अब तक लाखों किसान आत्महत्या कर चुके है। मुलायम सिंह यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता के लिए, उसकी समस्याओं को लेकर संघर्ष  करती आई है। इसके लिए समाजवादी पार्टी नेतृत्व को कई बार अपमान और उत्पीड़न का भी शिकार होना पड़ा है। जब बाबरी मस्जिद के विध्वंस से राष्ट्र की एकता पर चोट की गई तो समाजवादी पार्टी मुस्लिमों के दर्द में शरीक हुई। एकबार तो समाजवादी पार्टी की सरकार ही दांव पर लग गई थी।

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