Tuesday, August 11th, 2020

भारत में रोजाना संक्रमण के 2.87 लाख नये मामले सामने आ सकते हैं


वाशिंगटन । अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन  नहीं मिल पाती है तो भारत में हालात बेहद ख़राब हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर अगले साल तक वैक्सीन नहीं मिलती है तो 2021 की सर्दियों के अंत तक भारत में रोजाना संक्रमण के 2.87 लाख नये मामले सामने आ सकते हैं। यह दावा किया है अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने। वैज्ञानिकों ने एक कोविड-19 के लिए एक मॉडल तैयार किया है जिसके मुताबिक भारत अमेरिका को भी पीछे छोड़ सकता है। एमआईटी के वैज्ञानिकों की टीम ने 84 देशों में भरोसेमंद जांच आंकड़ों के आधार पर गतिशील महामारी मॉडल विकसित किया है। इन 84 देशों में दुनिया की 4.75 अरब लोग रहते हैं। इस शोधपत्र में एमआईटी के प्रोफेसर हाजिर रहमानदाद और जॉन स्टरमैन, पीएचडी छात्र से यांग लिम ने संक्रमण से प्रभावित शीर्ष 10 देशों के दैनिक संक्रमण दर के आधार पर अनुमान लगाया है कि भारत में वर्ष 2021 की सर्दियों के अंत तक रोजाना 2.87 लाख नये मामले आ सकते हैं। इसके बाद अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, इंडोनेशिया, ब्रिटेन, नाइजरिया, तुर्की, फ्रांस और जर्मनी का स्थान होगा।
शोधकर्ताओं ने कहा कि 2021 का पूर्वानुमान टीका नहीं विकसित होने की स्थिति को लेकर आधारित है। एमआईटी ने भारत में टेस्ट रेट कम होने के लिए भी चिंता जाहिर की है। भारत में फ़िलहाल 10 लाख लोगों में से 7,782 का ही टेस्ट किया जा रहा है जबकि अमेरिका में ये दर 1,19,257 और ब्राजील में भी 21000 से ज्यादा है। इस मॉडल में 84 देशों के आंकड़ों के आधार पर कई अहम खुलासे भी हुए हैं। मसलन महामारी की वास्तविक स्थिति को कमतर कर बताया जा रहा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक 18 जून से अबतक मामलों और मृत्युदर आधिकारिक आंकड़ों के मुकाबले क्रमश: 11.8 और 1.48 गुना अधिक है। बता दें कि कोरोना संक्रमितों की संख्या के हिसाब से भारत अमेरिका, ब्राजील के बाद कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित भारत है। लेकिन अगर प्रति 10 लाख आबादी पर संक्रमित मामलों और मृत्युदर की बात करें तो अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति बहुत बेहतर है।शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि पूर्वानुमान केवल संभावित खतरे को बताता है न कि भविष्य में मामलों की भविष्यवाणी करता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि कड़ाई से जांच और संक्रमितों से संपर्क को कम करने से भविष्य में मामले बढ़ने का खतरा कम हो सकता है जबकि लापरवाह रवैये और खतरे को सामान्य मानने से महामारी विकराल रूप ले लेगी। PLC.

 
 

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