ब्यूरो

नई दिल्ली.  भारत और अमरीका द्विपक्षीय वैमानिकी सुरक्षा समझौते पर कार्य कर रहे हैं जिससे किसी भी देश में विकसित वैमानिक उत्पादों पुर्जों की परस्पर स्वीकृति हो सकेगी। अब भारत में भी वैमानिक उत्पाद तैयार और निर्मित किए जा रहे हैं इसलिए ऐसे उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
 
 द्विपक्षीय वैमानिकी सुरक्षा समझौते की प्रकिया में कई चरण शामिल हैं, जैसे- प्रमाणन प्रक्रियाओं और डिज़ाइन एवं उत्पादन गतिविधियों के अवलोकन में आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के जरिए भारतीय डीजीसीए प्रमाणन विशेषज्ञों की दक्षता का उन्नयन, एफएए मानदण्डों को पूरा करने के लिए निरंतर आधार पर प्रमाणन एवं उत्पादन कार्य के लिए भारतीय प्राधिकरणों एवं उद्योगों की क्षमताओं का आकलन और उत्पाद का नमूना लेने के लिए और इस संतुष्टि के लिए कि भारतीय मानक प्रमाणन प्रकिया उच्च स्तर के वैमानिक उत्पादों के लिए स्वीकार्य हैं, डीजीसीए अधिकारियों के साथ एफएए का छाया प्रमाणन अभ्यास आदि.

 द्विपक्षीय वैमानिकी सुरक्षा समझौते की प्रकिया सीमित संभावना के साथ वर्ष 2010 के आखिर तक पूरी होने की उम्मीद है।

1 COMMENT

  1. मुझे लगता है कि अमेरिका के एक लंबे समय तक मातृत्व में अन्य देशों की तरह छोड़ देना चाहिए, महिलाओं को पहले वर्ष के बच्चे की देखभाल के लिए घर पर रहने का मौका है और फिर काम अगर वे वेतन में इस तरह के एक बड़े त्याग के बिना इच्छा पर लौटने की इजाजत दी. वैसे भी, परिवार के चिकित्सा के अंतर्गत अपने काम को खोने के डर के बिना, हम 12 हफ्तों दूर ले सकते हैं अवैतनिक छोड़ दें. मैं चाहता हूँ कि यह एक हालांकि आवश्यकता से अधिक लोगों के लिए और अधिक एक विकल्प था.

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