ब्यूरो

नई दिल्ली. 13 सितम्बर, 2009 को दिल्ली स्थित पश्चिमी वायुसेना कमान से पार्वती दर्रे के पास फंसे पड़े सैन्य पर्वतारोहण अभियान दल के 19 सदस्यों के बचाव के लिए अनुरोध किया गया । ये पर्वतारोही हिमाचल प्रदेश की ऊंची पहाड़ियों में खतरनाक ग्लेशियर वाले स्थान में 14,600 फीट की ऊंचाई पर पिछले पांच दिन से रुके फंसे थे ।

 इस दल को तत्काल बचाने की गुहार हो रही थी क्योंकि दल के पास राशन खत्म हो चला था और वे आगे बढने या पीछे लौटने में असमर्थ हो चुके थे । विंग कमांडर निखिल नायडू के नेतृत्व में आधुनिक हल्के हेलीकॉप्टर (ध्रुव) पर सहचालक विंग कमांडर यू के एस भदौरिया के साथ बचाव मिशन पर भेजा गया ।

 सेना के तीन चीता हेलीकाप्टरों को भी बचाव मिशन का कार्य सौंपा गया । अत्यधिक ऊंचाई और बहुत कम तापमान और सीमित बिजली के बावजूद मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित बनाये रखने का पूरा दायित्व इन जांबाजों पर था । मिशन के सामने कठिनाइयां बहुत थीं लेकिन भारतीय वायु सेना के अनुभवी विमान चालकों ने बचाव कार्य की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली । ध्रुव हेलीकाप्टर ए एल एच ने तीन दौर में 12 कार्मिकों को बचा लिया और अन्य 17 कार्मिकों को सेना के विमान चीता हेलीकाप्टरों ने बचा लिया ।

 इतनी अधिक ऊंचाई पर ए एल एच ध्रुव द्वारा ऐसा पहला रेकार्डेड  बचाव कार्य है। हेलीकॉप्टर के चालक दल की कुशल कार्य योजना और संचालन के परिणामस्वरूप यह चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा हो सका ।

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