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Tuesday, September 29th, 2020

भाजपा ही नहीं समूचा संघ परिवार हारा

शहज़ाद अख्तर नई दिल्ली.    15 वीं लोकसभा चुनाव के आए परिणामों में देश की जनता ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों के पक्ष में मतदान करके भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी दलों को जो झटका दिया है वह भारतीय जनता पार्टी की ही नहीं बल्कि समूचे संघ परिवार की हार है क्योंकि समूचा संघ परिवार भारतीय जनता पार्टी की जीत के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाए था.   लोकसभा चुनाव परिणामों के माध्यम से देश की जनता ने साफ़ तौर पर यह संदेश दिया है कि वह देश के विकास और युवा नेतृत्व को तरजीह देती है न कि सांप्रदायिक और संवेदनशील मुद्दों को उठाकर राष्ट्रहित की आड़ में राजनीति करने वाली पार्टियों को. इस आम चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में संघ परिवार के दबाव में आकर राम मंदिर, धारा 370 के मुद्दों को रखा. इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के पोस्टर बॉय वरुण गांधी ने सार्वजनिक रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ़ जिस तरह की असंवैधानिक भाषा का प्रयोग किया उसका सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं. इस लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति बनाने तक संघ परिवार के नेताओं का पूरा दखल रहा. चुनाव के दौरान ही संघ परिवार की एक शाखा विश्व हिन्दू परिषद् ने भी अपने समर्थन का ऐलान किया था. संघ परिवार की जी-तोड़ कोशिशों के बावजूद पिछले चुनाव की तुलना में न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की सीटें घटीं हैं बल्कि उसका मत प्रतिशत भी घटा है. वर्ष 1999 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 182 सीटें मिली थीं और उसका मत प्रतिशत 23.75 था. वहीं 2004 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 138 सीटें और 22.16 प्रतिशत मत मिले थे. इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को 116 सीटें मिली हैं और 19.06 प्रतिशत मत मिले हैं यानि पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 21 सीटें और 3.1 प्रतिशत मत कम मिले हैं. लोकसभा चुनाव परिणामों को देखते हुए भाजपा नेता यह तो कह रहे हैं कि इस हार के कारण का विश्लेषण किया जाएगा मगर उन्हें उसके साथ ही संघ परिवार के राजनैतिक दखल की भी लक्ष्मण रेखा खींचनी होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो भाजपा की हार का सिलसिला शायद आगे भी जारी रहेगा.

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