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Friday, January 21st, 2022

भगत सिंह की जयंती को जाटों ने संकल्प दिवस के रूप में मनाया

आई. एन. वी. सी.,, दिल्ली ,, शहीदे आजम सरदार भगत सिंह की 103वीं जयंती को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने संकल्प दिवस के रूप में मनाया। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के तत्वावधान में वसुंधरा स्थित वसुंधरा प्लाजा में एक श्रद्घांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर विगत 13 सितंबर को हरियाणा के हिसार में प्रदर्शन के दौरान सीने पर गोली खाकर शहीद हुए सुनील श्योराण को भी श्रद्घा सुमन अर्पित किए गए। श्रद्धांजलि सभा में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब तथा हरियाणा से भी संघर्ष समिति के पदाधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री यशपाल मलिक ने कहा कि शहीदे आजम भगत सिंह ने जिस भारत की परिकल्पना पेश की थी, उसमें बहुत से रंग भरने शेष हैं। उन्होंने कहा कि रोटी, कपडï़ा, मकान और शिक्षा को लेकर इस जाट सपूत ने जो सपने देखे थे, वे अभी भी अधूरे हैं। शहीद जाट सुनील श्योराण को श्रद्घा के फूल अर्पित करते हुए श्री मलिक ने बताया कि कौम और राष्ट्र के लिए जैसा बलिदान सरदार भगत सिंह ने दिया, वैसा ही बलिदान जाट कौम के लिए शहीद सुनील श्योराण ने भी दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि देश को आजाद करवाने में भी सबसे ज्यादा कुर्बानियां जाटों ने ही दी हैं। जाट आरक्षण की लड़ाई में हिन्दू, मुस्लिम और सिख जाट एक मंच पर हैं। यही जाटों की एकता है। उन्होंने बताया कि सरदार भगत सिंह द्वारा जलाई गई हक और इंसाफ की मशाल हम बुझने नहीं देंगे। आरक्षण के लिए अंतिम समय तक लड़ते रहेंगे। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री यशपाल मलिक ने कहा, 'हम पिछले तीन साल से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, पर केंद्र की तरफ से कोरे आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिलता। सरकार की मंशा आरक्षण को लटकाए रखने की है। केंद्र की नीयत को भांपकर हमने आंदोलन का रास्ता अपनाया।Ó उन्होंने बताया कि हमने कॉमनवेल्थ गेम्स के बहुत से टिकट खरीद रखें हैं। हम हर स्टेडियम में जाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के चारों तरफ 80 फीसद जाट रहते हैं और हमें आरक्षण दिए बगैर सरकार कॉमनवेल्थ गेम्स नहीं करवा सकती। संघर्ष समिति के कार्यकर्ता गुरिल्ला तकनीक के तहत कॉमनवेल्थ गेम्स को रोकेंगे। खाप पंचायतों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि जितने भी कत्ल होते हैं उन्हें सीधा-सीधा खाप पंचायतों से जोड़ दिया जाता है। कत्ल चाहे दिल्ली में हो या मद्रास में सीधा कह दिया जाता है कि खाप पंचायतों के हुक्म से ही ये कत्ल हुए हैं जबकि ऐसा कुछ है नहीं। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धर्मपाल धारीवाल ने दोनों शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शहीद तब मरता है जब उसकी विचारधारा मरती है। इसलिए हमें शहीद भगत सिंह की विचारधारा को मरने नहीं देना है। उन्होंने कहा कि शहीद सुनील श्योराण जाट कौम का सच्चा शहीद है जिसकी कुर्बानी को जाट कौम कभी भुला नहीं सकती। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव सतपाल चौधरी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भगत सिंह ने गैर-बराबरी, शोषण और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी और आज भगत सिंह के जन्मदिन के अवसर पर हम सभी को यह प्रण करना चाहिए कि हमें भगत सिंह के बताए रास्ते पर ही चलना है। आरक्षण के लिए जैसे शहीद सुनील श्योराण ने बलिदान दिया है वैसे ही हर जाट बलिदान देने को तैयार रहे। इनके अलावा मधु चौधरी, चौधरी उम्मेद सिंह(पूर्व सीओ), चौधरी रामकरण हुड्डा (अभाजाआसंस राष्ट्रीय महासचिव), उमराव सिंह (पूर्व एसीपी, दिल्ली), मनोज धामा, चौधरी ज्ञानेंद्र सिंह(अभाजाआसंस राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), चौधरी मांगेराम तेवतिया, देवेंद्र मलिक, मनोज दहण, राहुल चौधरी, सूरजपाल अध्यक्ष जाट सभा वसुंधरा, लेखराज आदि ने भी दोनों शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रमोद श्योराण ने किया।

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Lamar Wolden, says on March 17, 2011, 8:30 AM

I’d be inclined to allow with you here. Which is not something I typically do! I love reading a post that will make people think. Also, thanks for allowing me to speak my mind!