Saturday, July 11th, 2020

बड़े दुश्मन को हराना रणनीति है, इसलिए गठबंधन जरूरी है

नई दिल्ली । दिल्ली में भाजपा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस के आप के साथ गठबंधन के लेकर कांग्रेस की दिल्ली प्रमुख शीला दीक्षित के मना करने के बाद भी संभावनाओं खत्म नहीं हुई हैं। दिल्ली में कांग्रेस अभी इस दुविधा से गुजर रही है कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करे या नहीं। लेकिन मुश्किल सिर्फ गठबंधन के लिए सहमति बनाने में ही नहीं है, इससे भी ज्यादा मुश्किल होगा सीटों का बंटवारा। दोनों ही पार्टियों का वोट बैंक एक तरह का है- अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और स्लम एवं रीसेटलमेंट कॉलोनियों में रहने वाले लोग। ऐसे में संभावित गठबंधन में सीटों का बंटवारा बहुत पेंचीदा रहने वाला है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 3:3:1 के फॉर्म्युले पर काम चल रहा है। इसके तहत दोनों ही पार्टियां 3-3 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती हैं और एक सीट पर किसी न्यूट्रल शख्स को उतारा जाएगा। हालांकि, उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि किस पार्टी के खाते में कौन-कौन सी 3 सीटें आएंगी, इसे तय करने में बहुत मुश्किल होने वाली है। एक सूत्र ने बताया कि राजनीतिक गठबंधन के लिए बातचीत में अधीर ने होना और बहुत ज्यादा उत्सुक ने दिखना बहुत जरूरी है, लेकिन आप ने जिस तरह कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन के लिए छटपटाहट दिखाई है, उससे लगता है कि वह इस कला में अनाड़ी है। अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह कई बार यह बयान दिया कि उन्होंने कांग्रेस को गठबंधन के लिए मनाने के लिए कई बार कोशिशें कीं, इससे बातचीत में कांग्रेस का पलड़ा भारी रह सकता है। एमसीडी चुनाव में हम दोनों पार्टियों को 50 प्रतिशत वोट मिले और भाजपा को 35 प्रतिशत। अगर दोनों मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो जीत निश्चित दिख रही है। कांग्रेस के हित में है कि त्रिकोणीय मुकाबला न हो। बड़े दुश्मन को हराना रणनीति है, इसलिए गठबंधन जरूरी है कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको का शुक्रवार को दिया गया बयान काफी अहम है कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए दोनों पार्टियों को साथ आना चाहिए। चाको ने कहा, एमसीडी चुनाव में हम दोनों पार्टियों को 50 फीसदी वोट मिले और भाजपा को 35 प्रतिशत। अगर दोनों मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो जीत निश्चित दिख रही है। कांग्रेस के हित में है कि त्रिकोणीय मुकाबला न हो। बड़े दुश्मन को हराना रणनीति है, इसलिए गठबंधन जरूरी है। गठबंधन के बाद सीट शेयरिंग पर चाको का कहना है कि इसमें कोई मुश्किल नहीं है। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि यह आसान नहीं होने वाला है। सूत्रों ने बताया कि दोनों ही पार्टियों की निगाह ईस्ट, नॉर्थ ईस्ट और साउथ दिल्ली सीट पर है, जहां उनके वोट बैंक माने-जाने वालों की अच्छी-खासी संख्या है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, अगर हमें 3 सीटें मिलती हैं तो हम निश्चित तौर पर यमुना पर की 2 सीटों- ईस्ट या नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में से किसी एक सीट को चाहेंगे। इसके अलावा नई दिल्ली के साथ-साथ चांदनी चौक या नॉर्थवेस्ट दिल्ली में से एक सीट हम चाहेंगे। उन्होंने बताया, हम उन सीटों पर लड़ना चाहते हैं जहां अल्पसंख्यक, पिछड़े और एससी वोटों की अच्छी-खासी तादाद हो। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में करीब 20 प्रतिशत मुस्लिम, 17 प्रतिशत दलित और 14 प्रतिशत पिछड़ी जातियों के वोट हैं। इसी तरह, ईस्ट दिल्ली में 15 प्रतिशत मुस्लिम, 17 प्रतिशत एससी और 22 प्रतिशत पिछड़ी जातियों के वोट हैं। दिल्ली कांग्रेस चीफ शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित जहां ईस्ट दिल्ली से 2 बार- 2004 और 2009 में सांसद रह चुके हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश अग्रवाल चांदनी चौक से 3 बार जीत चुके हैं और 2009 में वह नॉर्थ ईस्ट दिल्ली चले गए, जहां आसान जीत हासिल की। 2014 में कांग्रेस को दिल्ली की किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। PLC.




 

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