Tuesday, January 21st, 2020

बुढ़ापे में देखभाल और पुर्नवास कार्यक्रमों को अपनाए : अमेरिकी विशेषज्ञ

Eminent cardiac surgeon and Executive Director, Alchemist Hospitals, Dr Inderjit Singh Virdi , Indian origin U.S. expert on Aged Care and Rehabilitation Dr Kanwardeep Singh ,Alchemist Hospital,कुलबीर कलसी, आई एन वी सी,
पंचकूला,
भारत जैसे विकासशील देशों में आने वाले दशकों में तेजी से बढ़ रही बुजुर्गों की एक बड़ी आबादी एक बड़ा भार  बनने जा रही है और ऐसे में इन देशों को तेजी से बुढ़ापा देखभाल और पुर्नवास कार्यक्रमों को अपनाने की जरूरत है ताकि वे इस आबादी वर्ग द्वारा स्वास्थ्य देखभाल संसाधनों पर संभावित तौर डाले जाने वाले दबाव को कम किया जा सके। अलकेमिस्ट हॉस्पिटल में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए भारतीय मूल के अमेरिकी विशेषज्ञ डॉ.कंवरदीप सिंह ने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और पुर्नवास के बारे में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बातचीत करते हुए कहा कि भारत में औसत मानकों पर बुढ़ापे की तरफ बढ़ती आबादी (60 वर्ष से अधिक की उम्र की) इस समय कई सारे आधुनिक देशों जैसे अमेरिका, जापान, स्वीडन आदि विकसित देशों के मुकाबले काफी कम है। भारतीय आबादी का एक छोटा हिस्सा भी संख्या में काफी बड़ा हो जाता है और ऐसे में ये विकसित देशों के मुकाबले कहीं मुश्किल काम बन जाता है। डॉ.कंवरदीप सिंह, जो कि अमेरिका में मिलवॉकी राज्य की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन के स्कूल ऑफ मेडिसन एंड पब्लिक हेल्थ के डिपार्टमेंट ऑफ गेरियॉट्रिक्स में क्लीनिकल एसोसिएट प्रोफेसर हैं, ने बताया कि वर्तमान में देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी ही बुजुर्गों की श्रेणी में आती है और अगले 50 वर्ष में ये 15 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। तब की परिस्थितियों से निपटने के लिए हमें अभी से तैयारी करनी होगी और एक ऐसा मॉडल अपनाना होगा जो कि बुढ़ापे में अच्छी देखभाल और पुर्नवास करने में सक्षम हो और विकसित देशों में कई सारे लागू मॉडल्स के मुकाबले एक ऐसा मॉडल हो जो कि हमारी जरूरतों के अनुसार सक्षम हो। उन्होंने बताया कि अमेरिका में देखभाल के लिए पारपंरिक तौर पर ‘‘फी फॉर सर्विस’’ आउटपेशंट मॉडल में बुजुर्गों की देखभाल के तय मानकों के अनुसार सेवाएं प्रदान नहीं की जा सकी हैं, जो कि रोगों से रोकथाम सेवाएं, गंभीर रोगों का प्रबंधन और गेरियाट्रिक सिंड्रोम्स आदि के लिए तय किए गए थे। ऐसे में बुजुर्गों की देखभाल के लिए संपूर्ण गुणवत्ता में सुधार के लिए अधिक सुरक्षात्मक, मरीज-केन्द्रित और आबादी आधारित सोच और कार्यप्रणाली को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि बीते दो दशकों में कई सारी इनोवेटिव आउटपेशंट मरीज देखभाल प्रणालियों को विकसित किया गया है, जिन पर प्रभावी अमल संभव है।

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