Thursday, February 27th, 2020

बिहार राज्य द्वारा भेजे गए सभी प्रस्ताव को केंद्र सरकार शीघ्र स्वीकृति दे - डा.प्रेम कुमार

आई.एन.वी.सी,, दिल्ली,, डा. प्रेम कुमार, मंत्री, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार ने केंद्रीय शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्री से मांग की है कि बिहार सरकार द्वारा भेजे गए स्लम सर्वे, स्लम मैपिंग तथा शहरी गरीबों को संपति के अधिकार देने संबंधी प्रस्ताव की मंजूरी शीघ्र प्रदान की जाए। डा. कुमार ने बताया कि पूर्व में राज्य सरकार द्वारा कुल 12 शहरों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसके विरूद्ध अद्यतन सात शहरों का प्रस्ताव भारत सरकार के स्तर पर लिंबत है। डा. कुमार ने बिहार के परिपे्रक्ष्य में केंद्रीय शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्री का ध्यान विशेश रूप से आकृष्ट करते हुए बताया कि बिहार अन्य विकसित राज्यों की श्रेणी में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए प्रतिबद्ध है, परंतु इस पहल में केंद्र सरकार का विशेष अनुग्रह वांछित है। डा. कुमार ने मांग की कि आवास एवं मूलभूत बुनियादी नागरिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना मद में केंद्रीय सहायता का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत तक किया जाय, भू-अर्जन हेतु राज्य को अलग से कम से कम भूमि अर्जन लागत की 75 प्रतिशत राशि उपलब्ध करायी जाय, लाभािन्वतों के अंशदान की निर्धारित 12 प्रतिशत राशि को 2 प्रतिशत तक रखा जाय, 25 वर्गमीटर की सीमा को लक्ष्मण रेखा नहीं बनाकर समावेशी रखा जाय। डा. प्रेम कुमार आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में राज्यों के आवास, शहरी विकास, नगर पालिका मामलों एवं स्वायत शासन के मंत्रियों की राजीव गांधी आवास योजना पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। डा. प्रेम कुमार ने कहा कि राश्ट्रीय स्लम नीति 2001 के अनुरूप बिहार राज्य द्वारा भी मलिन बस्ति नीति का प्रारूप तैयार किया गया है, जो इस प्रकार है यथा थ- शहरों को झुग्गी एवं मलीन बस्ती विहीन बनाने के दृष्टिकोण से राज्य एक सुव्यवस्थित तरीके से इनकी समस्याओं का समाधान करना, गरीब एवं कमजोर वर्गो के भविष्य की आवासीय जरूरतों का आकलन तथा आवासीय जरूरतों एवं जमीन तथा संसाधन की उपलब्धता के प्रति सचेष्ट रहना, मलीन बस्तियों में भू-स्वामित्व की समस्याओं की पहचान एवं उनके समाधान के नवाचारी तरीकों का प्रयोग करके निवासियों की भू-स्वामित्व सुरक्षा (स्ंदक ज्मदनतम ैमबनतपजल) का उपाय करना, नगरीय क्षेत्र के पुर्नवासन के लिए जहां सरकारी भूमि उपलब्ध है वहां निथशुल्क भूस्वामित्व देते हुए पुर्नवासन का प्रयास करना, जहां सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां पर भू-अर्जन करके उक्त प्रयोजन की निथशुल्क व्यवस्था करना जिसके व्यय का वहन नगर विकास विभाग करेगा। यद्यपि ऐसा करना सभी परिस्थतियों में व्यवहारिक विकल्प नहीं है फलस्वरूप भूमि स्वामित्व के लिए प्रावधान रखा गया है, लेकिन निथशुल्क भूमि प्रदान करने की व्यवस्था को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। डा. कुमार ने बाताया कि भारत सरकार के दिशा निर्देश के अनुरूप राज्य नोडल एजेंसी स्तर पर एक तकनीकी सेल का गठन किया जा चुका है। केंद्र सरकार की सहायता एवं राज्य अपने संसाधन के अनुसार बिहार भी स्लम फ्री इंडिया की संकल्पना पर मज़बूती से कदम बढ़ाना चाहता है। उक्त सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय शहरी विकास एवं उपशमन मंत्री, कुमारी शैलजा ने की तथा सभी राज्यों के शहरी विकास एवं आवास मंत्रियों ने भाग लिया।

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