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Friday, January 28th, 2022

बाढ़ नियंत्रण हेतु कारगर नीति तैयार

आई एन वी सी न्यूज़
लखनऊ,
उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री डॉ0 महेन्द्र सिंह ने बाढ़ के प्रति संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील 42 जनपदों के क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा तैयार की गयी परियोजनाओं का प्रस्तुतिकरण का अवलोकन करने के पश्चात कहा कि इन नवीन बाढ़ परियोजनाओ पर समिति द्वारा आम सहमति और मा0 मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन के पश्चात युद्धस्तर पर कार्यवाही शुरू करा दी जायेगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बचाव के लिए तैयार की गई इन नवीन परियोजनाओं को स्थानीय सांसदों एवं विधायकों के सुझाव तथा संबंधित जिलाधिकारी एवं विभाग की सहमति के बाद तैयार किया गया है। इन योजनाओं के पूरा हो जाने पर उत्तर प्रदेश पूरी तरह से बाढ़ से सुरक्षित हो जायेगा और किसी प्रकार की जन-धन हानि की सम्भावना नही होगी।

जलशक्ति मंत्री आज सिंचाई भवन के सभागार में उ0प्र0 राज्य बाढ़ नियंत्रण परिषद की स्थायी संचालन समिति की 54वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को कारगर बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों ने काफी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण के लिए तैयार की गयी कारगर नीति के कारण ही बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने इतिहास बनाया है। उन्होंने कहा कि इन नई बाढ़ परियोजनाओं पर दिसम्बर से कार्यवाही शुरू करके अगले वर्ष मानसून आने के पूर्व युद्धस्तर एवं समयबद्धता से पूरा कराया जायेगा।

डॉ0 महेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्व की सरकारों के कार्यकाल में बाढ़ नियंत्रण से संबंधित परियोजनाओं के लिए विलम्ब से धनराशि प्राप्त होती थी, जिसके कारण योजनाएं अधूरी रहने के कारण बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि होती थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ जी ने बाढ़ की समस्या पर मंथन करते हुए जनवरी महीने में ही धनराशि स्वीकृति की थी, जिससे बाढ़ परियोजनाओं पर समय से कार्य शुरू करके फरवरी/मार्च में कार्य शुरू करा दिया गया था। इनको पूरा करते समय समबद्धता एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया है।

जलशक्ति मंत्री ने कहा कि इन नवीन परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए सभी तैयारियां दिसम्बर में पूरी करके इसके लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करा दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 270 बाढ़ परियोजनाएं संचालित हैं, जिनमें से 150 बाढ़ परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष प्रगति के अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा कि वर्षा के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए पहली बार ड्रेनों/नालों के सफाई के साथ-साथ उस पर निर्मित पुल-पुलियोें का जीर्णोद्धार भी कराया जा रहा है। इस वर्ष 22427 किलोमीटर लम्बाई के 4641 नालों की सफाई करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि नेपाल राज्य से आने वाली नदियों में अत्यधिक पानी आ जाने से प्रदेश में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। राज्य सरकार राहत एवं बचाव के लिए इस वर्ष पूरी तरह से मुस्तैद रही, जिससे नुकसान नहीं हुआ और बाढ़ प्रभावितों को 24 घण्टे के अन्दर मुआवजा दिलाया गया।

जलशक्ति मंत्री ने सिंचाई विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि मा0 मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में वर्षों से लम्बित कई बड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया गया है। उन्होंने कहा कि पांच साल के अंत तक 25 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित करने की क्षमता सृजित की गई है। 46 वर्षों से लम्बित बाण सागर परियोजना को पूरा कराया गया है। इसके अलावा बुन्देलखण्ड की 10 बड़ी परियोजनाओं को पूरी कराकर 1 लाख 46 हजार हेक्टेयर जमीन को पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार सरयू नहर परियोजना पर 9802 करोड़ रुपये खर्च करके 14.50 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित करने की क्षमता सृजित की गई है। इसका शीघ्र ही मा0 प्रधानमंत्री जी द्वारा लोकार्पण किया जायेगा। इसके अलावा मध्य गंगा नहर परियोजना को पूरा कराया गया है।

डा0 महेन्द्र सिंह ने कहा कि वर्ष 1950 से लेकर अब तक के इतिहास में मा0 योगी जी के नेतृत्व में सिंचाई विभाग ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है, जिसकी सराहना सभी जनप्रतिनिधियों ने की है। उन्होंने कहा कि 112 नहरों में पहली बार पानी पहुँचा है और नदियों की ड्रेजिंग कार्य कराया गया है। इसके अलावा टेल तक पानी पहुँचाने के लिए पूरे प्रदेश में नहरों की सफाई का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। पहली बार 72 हजार किलोमीटर नहरों पर बोर्ड लगाया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दुगुना करने के लिए किसानों को भरपूर पानी पहुँचाने के लिए पूरानी परियोजनाओं को पूरा कराने के साथ ही नई परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है। सिंचाई विभाग की कार्यशैली एवं कार्यसंस्कृति में उल्लेखनीय सुधार आया है, जिसकी सराहना हर तरफ की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक द्वारा संचालित परियोजना से प्रदेश के 16 जनपदों में जल प्रबंधन एवं सिंचन क्षमता में वृद्धि हुई है।

बैठक में राज्यमंत्री जलशक्ति/बाढ़ नियंत्रण श्री दिनेश खटिक, अपर मुख्य सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन श्री टी0वेंकटेश, प्रमुख सचिव सिंचाई श्री अनिल गर्ग, विशेष सचिव सिंचाई सुश्री अनीता वर्मा सिंह, प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष श्री वी0के0 निरंजन, प्रमुख अभियन्ता परिकल्प एवं नियोजन श्री वी0के0 सिंह, मुख्य अभियन्ता शारदा श्री ए0के0 सिंह, अधिशासी अभियन्ता श्री सत्यप्रिय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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