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Thursday, November 26th, 2020

बादल मिले यूनेस्को टीम से

parkash singh badalआई एन वी सी, चंडीगढ़, पंजाब की अमीर सांस्कृतिक विरासत को विश्व भर विशेषकर पंजाबियों में प्रचार के प्रयास के तौर पर पंजाब सरकार ने अपनी ‘सांस्कृतिक विरासत नीति’ बनाने का कार्य यूनेस्को को सौंपा गया है जिस को 31 मई, 2014 तक अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। दिल्ली आधारित यूनेस्को का एक शिष्टमंडल आज पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल को उनके निवास स्थान पर मिला और इस प्रोजेक्ट के संबंध में जानकारी दी। इस शिष्टमंडल ने डाक्टर रिचर्ड एंगलहर्डट और श्रीमती सुधा पिल्ले शामिल थे। एंगलहर्डट ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस सांस्कृ तिक नीति का उद्धेश्य पंजाबी विरासत की सुरक्षा और इसको बढ़ावा देना है। इसके साथ ही इसका उद्धेश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजाबी विरासत संबंधी समझ को बढ़ाना है। उन्होंने आगे कहा कि यूनेस्को सांस्कृतिक विरासत नीति और रणनीतिक रूपरेखा को विकसित करने के लिए तकनीकी सहायता मुहैया करवायेगी और सांस्कृतिक संसाधनों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए रणनीति को लागू करने में सहायता देगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और यूनेस्को की यह पहली पहलकदमी एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कार्य करेगी और इसके अधीन विभिन्न क्षेत्रों को लाया जाएगा। श्री एंगलहर्डट ने मुख्यमंत्री के उस फैसले की प्रशंसा की जिसमें उन्होंने सांस्कृतिक विरासती समारकों और संंग्रहालयों के लिए फंड एकत्र करने के लिए बुनियादी ढांचा विकास प्रोजेक्टों पर एक प्रतिशत सैस लगाया है। जिससे पंजाब ऐसा विलक्षण कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। स. बादल ने यूनेस्को के शिष्टमंडल को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार यह नीति तैयार करने के लिए उसकी पूरी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि खालसा विरासती कंपलैक्स श्री आनंदपुर साहिब बाबा बंदा सिंह बहादर जंगी यादगार चप्पड़चिड़ी , बड़ा घल्लूघारा, कुपरहीड़ा और छोटा घल्लूघारा छंब, काहनुवान जैसे कुछ विरासती प्रोजेक्टों की सफलता के बाद राज्य सरकार ने अब करतारपुर के समीप जंग-ए-आज़ादी यादगार बनाने की योजना बनाई है ताकि राष्ट्रीय आज़ादी संघर्ष में पंजाब के योगदान को दर्शाया जा सके। इसके अतिरिक्त राज्य की अमीर सांस्कृतिक विरासत को व्यक्त करते हुए राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है। स. बादल ने कहा कि कला और सांस्कृति को बढ़ावा देने वाली ऐसी पहलकादमीयां पंजाब की शानदार ऐतिहासिक विरासत और भविष्य पीढ़ीयों में संपर्क सूत्र बनेगी । इसी दौरान प्रधान सचिव सांस्कृतिक मामले और म्यूजियम श्री एस एस चन्नी ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य सरकार और यूनेस्कों के बीच नई दिल्ली में फरवरी, 2010 को एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक मामले विभाग ने सांस्कृतिक विशेषज्ञों और प्रमुख कला शख्शीयतों की एक कमेटी का पहले ही गठन कर दिया है जो समय समय विभिन्न पक्षों से राज्य के शानदार सांस्कृतिक विरासत और दस्तावेजों को सत्यापित करेगी। विचारविमर्श के दौरान निदेशक सांस्कृति स्त्रोत संभाल इनीशिएटिव (सी आर सी आई) लि. कुमारी गुरमीत राय ने कहा कि वह सभी पक्षों के मद्देनज़र लंबी अवधि की रणनीति तैयार करेंगे और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए कार्य योजना को अंतिम रूप देंगे। यूनेस्को के सह-चेयरपर्सन श्रीमती सुधा पिल्ले ने मुख्यमंत्री को बताया कि पंजाब सरकार राज्य की विरासत के संरक्षण और इसको बढ़ावा देने के लिए 14वें वित्त आयोग के पास व्यापक योजना प्रस्तुत करनी चाएिह और इस सांस्कृतिक विरासती नीति को लागू करने के लिए फंडज़ प्राप्त करने चाहिए। इस अवसर पर उपस्थित अन्यों में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री एस के संधू, निदेशक सांस्कृतिक मामले श्री नवजोत पाल सिंह रंधावा, यूनेस्को की टीम के सदस्य अरूणा बागची, सुधा गोपालाकृष्णन, सांस्कृतिक विशेषज्ञ यूनेस्को कुमारी मोचिबा भी शामिल थे।

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