Wednesday, February 19th, 2020

‘बांटो और राज करो’ की राह पर 2019 के लोकसभा चुनाव

- निर्मल रानी -

2014 के लोकसभा चुनाव अभियान में भारतीय जनता पार्टी ने अपना जो सबसे प्रमुख नारा देश के मतदाताओं के मध्य उछाला था वह था ‘सबका साथ-सबका विकास’। देश की जनता ने इस नारे पर विश्वास करते हुए तथा 2014 के चुनाव अभियान में दिखाए जाने वाले अनेक सुनहरे सपनों पर यकीन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सत्ता सौंपी थी। परंतु सत्ता में आते ही सबका साथ-सबका विकास का नारा न जाने कहां चला गया। आज तक देश ‘विकास’ को ढूंढता फिर रहा है। परंतु जिन बातों का जि़क्र 2014 के चुनाव से पूर्व सुना भी नहीं जाता था वह सबकुछ देखा व सुना जा रहा है अर्थात् घर वापसी,लव जेहाद,गाय और गंगा,कुंभ स्नान,कांवडिय़ों को अतिरिक्त सरकारी सुविधाएं व उनपर विमान से पुष्प वर्षा,बड़े पैमाने पर प्रतिवर्ष गीता महोत्सव का आयोजन,भाजपाई मीसा बंदियों को पेंशन, साधुओं को विशेष पेंशन,बूचडख़नों पर पाबंदी,ईद और दीवाली में बिजली वितरण जैसे अनावश्यक व समाज को बांटने वाले अनेक मुद्दे,आरक्षण पर होती सियासत,तीन तलाक पर अनावश्यक बहस तथा अंततोगत्वा अपने आलोचकों तथा विपक्षी पार्टियों यहां तक कि कांग्रेस जैसे देश के सबसे जि़म्मेदार व प्रतिष्ठित राजनैतिक संगठन को समाप्त करने जैसी बातें ज़रूर सुनाई दीं।

ऐसा नहीं है कि देश को इन सब गैर ज़रूरी मुद्दों का सामना अनायास ही करना पड़ रहा है। बल्कि यह सब एक बड़ी व सोची-समझी साजि़श के तहत किया जा रहा है और निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी के चाणक्यों को यह सीख अंग्रेज़ों से ही प्राप्त हुई है। अंग्रेज़ों ने भारत पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर ‘बांटो और राज करो’ के फार्मूले को अपना कर ही अपने साम्राज्य का विस्तार किया था। भारतीय जनता पार्टी भी देश में अपने राजनैतिक लाभ के अनुसार जात,धर्म,क्षेत्र,भाषा,क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार राजनैतिक नफे-नुकसान के मद्देनज़र राजनीति कर रही है। और हद तो यह कि अपने वोट बैंक की खातिर भाजपा सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्देशों व आदेशों को मानने से भी इंकार करती रही है। सबरीमाला मंदिर व जलीकुट्टु जैसे कई मामलों पर भाजपा का नज़रिया यही दर्शाता है। देश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जुलाई 2018 में आज़मगढ़ की एक जनसभा में दिया गया वह वक्तव्य याद होगा जब तीन तलाक विषय पर अपनी पीठ थपथपाने का अभियान चलाते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए यह सवाल पूछा था कि-‘क्या कांग्रेस पार्टी केवल मुस्लिम पुरुषों की पार्टी है या मुस्लिम महिलाओं या बहनों की भी है? यह कहकर मोदी ने भारतीय मुसलमानों को पुरुष व महिलाओं के मध्य विभाजित करने की चाल चली थी बल्कि हिंदू मतदाताओं को भी यह संदेश देने का प्रयास किया था कि कांग्रेस मुसलमानों का पक्षधर संगठन है।

बड़े आश्चर्य की बात है कि भाजपा को तीन तलाक के गलत तरीके का सामना करने वाली मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का कथित हनन होता तो दिखाई दिया परंतु उन्हें विभिन्न मंदिरों में प्रवेश न कर पाने वाली महिलाओं के अधिकारों की कोई िफक्र नहीं हुई। उन्हें हरिद्वार,वृंदाावन,बनारस तथा अयोध्या में भटकने वाली लाखों बेसहारा,वृद्ध,मजबूर व अपने पतियों द्वारा त्यागी गई हिंदू महिलाओं की कोई चिंता नहीं। समाज को विभाजित कर वोट ठगने की योजना का मीडिया के समक्ष खुलासा करते हुए भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी देश के हिंदुओं से यह अपील कर चुके हैं कि वे मुस्लिम समुदाय में फूट डालकर मुसलमानों को विभाजित करें। इसी सिलसिले की पहली कड़ी में तीन तलाक का मुद्दा उठाया गया और अब अपने ही कुछ विश्वासपपात्र ‘मीर जाफरों’ का इस्तेमाल कर भाजपा शिया-सुन्नी समाज के मध्य फूट डालने की एक बड़ी योजना तैयार कर रही है। इस काम के लिए भाजपा को वसीम रिज़वी नामक एक ऐसा मोहरा मिल गया है जो समाजवादी पार्टी के शासनकाल में तत्कालीन वक्फ मंत्री आज़म खान द्वारा शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। इस व्यक्ति ने चेयरमैन बनने के बाद समाजवादी पार्टी के शासनकाल में अपने पद का भरपूर दुरुपयोग करते हुए लखनऊ,इलाहाबाद व रामपुर सहित कई शहरों में शिया सेंट्रल वकफ बोर्ड के अंतर्गत् आने वाली संपत्तियों को खुर्द-बुर्द कर बड़ा भ्रष्टाचार किया था। इसके विरुद्ध कई मुकद्दमे भी लंबित हैं तथा जांच भी चल रही है। समाजवादी पार्टी के समय का नियुक्त यह व्यक्ति अभी तक उत्तर प्रदेश की वर्तमान योगी सरकार की आंखों का भी तारा बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि भाजपा इस शिया समुदाय से संबंध रखने वाले अपने ‘मोहरे’ से कभी यह वक्तव्य दिलवाती है कि शिया वक्फ बोर्ड रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण हेतु ज़मीन देने को तैयार है तो कभी वसीम रिज़वी को भारतीय मदरसों में आईएसआईएस के आतंकवादी शिक्षा लेते दिखाई दे जाते हैं और वह देश के सभी मदरसों को बंद करने संबंधित पत्र प्रधानमंत्री को लिखता है तथा गोदी मीडिया इस पत्र का भरपूर प्रचार भी करता है।

बड़े आश्चर्य की बात है कि भारतवर्ष में मदरसों का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना होने के बावजूद यहां स्थानीय मुस्लिम नागरिकों का कभी भी कोई ऐसा संगठित राष्ट्रव्यापी आतंक नज़र नहीं आया जिसकी तुलना हम भारत में सक्रिय उन आतंकवादी संगठनों से कर सकें जिन्होंने हमारे देश,समाज यहां तक कि आम लोगों के जनजीवन को समय-समय पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावित किया है। यदि हम कश्मीर,उसकी भौगोलिक संरचना,उसके राजनैतिक दांव-पेंच तथा भारत-पाक कश्मीर तथा संयुक्त राष्ट्र के मध्य चल रहे अलग-अलग नज़रियों की बात छोड़ दें तो मुसलमानों से संबंधित कोई भी आतंकी संगठन देश के अन्य किसी राज्य में कभी सक्रिय नहीं रहा। हां सीमापार से भेजे जाने वाले आतंकियों ने देश में कश्मीर से लेकर मुंबई तक कई बड़े आतंकी हमले ज़रूर किए हैं। परंतु जहां तक मदरसों से आतंकवादी निकलने का प्रश्र है तो वसीम रिज़वी को यह भी बताना चाहिए कि देश में दशकों से सक्रिय माओवादी संगठन आिखर किन मदरसों से तालीम हासिल करते रहे हैं? देश में सक्रिय रहे खालिस्तान लिबरेशन फं्रंट,सिख यूथ फेडरेशन,युनाईटेड लिबरेशन फु्रट ऑफ आसाम (उल्फा)नेशनल डेमोक्रटिक फ्रंट बोडोलैंड, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी,ऑल त्रिपुरा टाइगर्स फोर्स,पीपुल्स वॉर ग्रुप तथा इससे संबंधित अनेक माओवादी संगठन, माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर व इससे संबंधित अनेक संगठन,लिबरेशन टाईगर्स आफ तमिल ईलम(लिट्टे),मणिपुर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट,बब्बर खालसा इंटरनेशल,खालिस्तान कमांडों फोर्स,तमिल नेशलन रिट्रविल ट्रुप्स तथा अखिल भारतीय नेपाली एकता समाज जैसे  32 संगठन जिन्हें केंद्र सरकार विधि विरुद्ध क्रिया कलाप (निवारण)अधिनियम 2004 के तहत भारत सरकार प्रतिबंधित कर चुकी है इनसे जुड़े आतंकी आिखर किन मदरसों से शिक्षा लेते रहे हैं?

वसीम रिज़वी को यह भी बताना चाहिए कि सुनील जोशी,संदीप डांगे,लोकेश शर्मा,स्वामी असीमानंद,राजेंद्र समुंद्र,मुकेश वासवानी,देवेंद्र गुप्ता,चंद्रशेखर लेवे,कमल चौहान,रामजी काल संगरा, कर्नल श्रीकांत पुरोहित व साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जैसे समझौता एक्सप्रेस कांड, अजमेर शरीफ दरगाह,मालेगांव तथा मक्का मस्जिद ब्लास्ट में शामिल आतंकवादी आिखर किन मदरसों की देन हैं? मदरसों को लेकर भय फैलाने की सियासत करने वालों को यह भी बताना चाहिए कि महात्मा गांधी,इंदिरा गांधी,राजीव गांधी,ललित नारायण,हरचरण सिंह लौंगोंवाल,सरदार बेअंत सिंह,हरेन पांडया,गौरी लंकेश,कलबुर्गीं,पंसारे  और अब ताज़ा प्राप्त हो रहे समाचारों के अनुसार गोपी नाथ मुंडे जैसे अनेक लोगों के हत्यारे आिखर किन मदरसों से शिक्षा लेकर आए थे?स्पष्ट है कि भाजपा जिन मोहरों व चालों का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए कर रही है उससे साफ ज़ाहिर होता है कि 2019 का लोकसभा चुनाव बांटों और राज करो की राह पर आगे बढ़ रहा है।

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परिचय –:
निर्मल रानी
लेखिका व्  सामाजिक चिन्तिका
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर निर्मल रानी गत 15 वर्षों से देश के विभिन्न समाचारपत्रों, पत्रिकाओं व न्यूज़ वेबसाइट्स में सक्रिय रूप से स्तंभकार के रूप में लेखन कर रही हैं !
संपर्क -: Nirmal Rani  :Jaf Cottage – 1885/2, Ranjit Nagar, Ambala City(Haryana)  Pin. 4003 E-mail : nirmalrani@gmail.com –  phone : 09729229728
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