Sunday, April 5th, 2020

फिलहाल पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देंगे जस्टिस एके गांगुली।

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दिल्ली,

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके गांगुली जिन पर  एक कानून की इंटर्न के खिलाफ यौन उत्पीडन के आरोप लगे हैं, उनके इस्तीफे पर भाजपा में मतभेद उभर आए हैं। इस मसले पर नेता विपक्ष सुषमा स्वराज और जनता पार्टी का विलय कर भाजपा में शामिल हुए सुब्रमण्यम स्वामी आमने-सामने आ गए हैं। जस्टिस गांगुली वर्तमान में पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं। यौन उत्पीडन का आरोप लगने के बाद राज्य में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी गांगुली के इस्तीफे की मांग की है। गांगुली को हटाने की मुहिम का समर्थन करते हुए बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने उनके इस्तीफे की बात कही थी।

सुषमा ने सोमवार को  टि्वटर पर पोस्ट किया था कि ''मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि जस्टिस एके गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए''। लोकसभा में विपक्ष की नेता ने अंग्रेज़ी के मुहावरे के ज़रिए कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के व्यक्ति को किसी तरह के संदेहों से घिरा हुआ नहीं होना चाहिए। संप्रग सरकार में शामिल राकांपा ने भी सुषमा के सुर में सुर मिलाया है। राकांपा नेता तारिक अनवर ने बंगाल मानवाधिकार आयोग से जस्टिस गांगुली के इस्तीफे की मांग की है।

इसके विपरीत पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा है कि सिर्फ आरोप के आधार पर किसी का इस्तीफा मांगना ठीक नहीं है। सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया है कि अगर जस्टिस गांगुली सिर्फ आरोप लगने पर ही इस्तीफा दे देते हैं, तो सरकार के खिलाफ फैसला देने वाला हर जज खतरे के दायरे में है। गांगुली का समर्थन करने वालों में पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी भी हैं।

उन्होंने कहा कि गांगुली के इस्तीफे से गलत उदाहरण पेश होगा। गौरतलब है कि कानून की एक इंटर्न ने रिटायर्ड जज एके गांगुली पर यौन उत्पीडन का आरोप लगाया था। मामला सामने आने के बाद चीफ जस्टिस ने तीन जजों की कमेटी को जांच का ज़िम्मा सौंप दिया था। इस कमेटी ने जस्टिस गांगुली का भी बयान लिया। चीफ जस्टिस को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद जस्टिस गांगुली ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

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