Thursday, June 4th, 2020

प्राण जाए पर वचन न जाए के एकमात्र उदाहरण हैं महाराणा प्रताप - दीपेंद्रसिंह हुड्डा

जयश्री राठौड़,,
आई.एन.वी.सी,,
चंडीगढ़,,
विपरीत हालात में सयंम रखकर खोई हुई ताकत को फिर से हासिल करने का जज्बा इस पूरे राष्ट्र को महाराणा प्रताप की ही देन है। सफलता हासिल करने के लिए किया गया संघर्ष आखिरकार अच्छे परिणामों के साथ सामने आता है। रोहतक से सांसद दीपेंद्रसिंह हुड्डा  ने अनाज मंडी में आत्म स मान मंच द्वारा महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित आत्म स मान दिवस पर यह बात कही। उन्होंने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान खेत मजदूर कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशेर सिंह सुरजेवाला ने की व सांसद नवीन जिन्दल बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
        हुaा ने कहा कि जीवन में संघर्ष की परिभाषा अगर किसी ने मानव समाज को आगे बढ़ने के लिए दी है तो वह महाराणा प्रताप ही है जिनके आदर्शों को आज के परिपेक्ष में भी महत्वपूर्ण स्थान मिलता है। उन्होंने कहा कि 16वीं शताब्दी में लगभग भ्00 वर्ष पुराने इतिहास को अगर आज हम याद कर रहे है तो वास्व में उस वक्त विकट परिस्थितियों में जो जज्बा महाराणा प्रताप ने दिखलाया था, उनकी स्मृतियों को आज के दिन याद करना है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने आत्म स मान के लिए मुगलों के समक्ष घुटने न टेककर उनके खिलाफ संघर्ष करते हुए जगलों में रहकर भीलों के साथ मिलकर अपने ताकत को फिर से सहेगा और सेना को गठित करके मुगलों का मुकाबला किया। अंतिम सांस तक लड़ने की क्षमता रखने वाले महाराणा प्रताप अकेले ही ऐसे राजा थे, जिनका इतिहास मानव समाज को आज भी प्ररेणा प्रदान कर रहा है।
        उन्होंने महाराणा प्रताप की स्मृतियों को जिन्दा रखने के लिए कलायत व राजौंद में हरियाणा के मु यमंत्री द्वारा बनाए जाने वाले विभिन्न चौराहों की तर्ज पर चीका में भी एक चौंक महाराणा प्रताप को समर्पित करने की सिफारिश करने का आEासन दिया। उन्होंने कहा कि महापुरूषों के आदर्शों को आत्मसात करके ही राष्ट्र कदम दर कदम तरPी का मार्ग प्रशस्त करते हुए निरन्तर आगे बढ़ा है। आज का भारत जो पूरे विE की अर्थ व्यवस्था में अग्रणी देशों में शुमार है तो यह हमारे देश की महान विभूतियों द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलने का ही नतीजा है। पिछले 60 सालों से अधिक समय में भारत वर्ष की तरPी ने पूरे ब्राह्मांड को अचंभित किया है तो उसके पीछे महाराणा प्रताप जैसी विभूतियों के संघर्ष करने के जज्बे और विकट हालातों में हार न मानने की ताकत का ही नतीजा है। उन्होंने उपस्थितगण का आuान किया कि वे आत्म स मान दिवस पर अपने जीवन को राष्ट्र के लिए समर्पित करने का जज्बा और संकल्प लेकर जाए। उन्होंने इस दिवस के आयोजन की सफलता पर आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि मई-जून की तपती गर्मी में अपने घरों से निकलकर महाराणा प्रताप जैसी विभूति को याद करने के लिए इक्टठा होना वास्तव में जनमानस के लिए प्ररेणा का वायस भी है।
        समारोह के अध्यक्ष किसान खेत मजदूर कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशेर सिंह सुरजेवाला ने अपने स बोधन में जहां भारत के गौरव महाराणा प्रताप की जयन्ती अवसर पर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए वहीं यह भी कहा कि आज का आयोजन भारतीय इतिहास के गौरवशाली क्षणों को याद करने का दिवस भी है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने विष्म हालातों में स्वाधीनता की अलख जगाए रखी और संघर्ष किया जो हिन्दुस्तान की तारीख में अनुपम व अदभूत हैै।
        सांसद नवीन जिन्दल ने महाराणा प्रताप के संघर्षमय जीवन पर प्रकाश डालते हुए अतीत की कुछ स्मृतियों को उपस्थिगण के साथ ताजा किया। उन्होंने हलदी घाटी के इतिहास के प्रसिद्ध युद्ध के संस्मरणों को भी सांझा करते हुए महाराणा प्रताप द्वारा दिखाए गए मेहनत के जज्बे को सलाम किया और उनके बहुचर्चित घोडे़ चेतक का भी विशेष रूप से जिक्र किया। प्राण जाए पर वचन न जाए शब्द महाराणा प्रताप के महान कर्माें से निकलकर ही समाज में आया है। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं में राजपूत समाज के प्रदेशाध्यक्ष वी.के. सिंह राणा, राष्ट्रीय महामंत्री विजेन्द्र सिंह, कार्यक्रम के संयोजक कुलबंत बाजीगर व ओमप्रकाश गोयल, महिला क्षेत्रीय महासभा की प्रदेशाध्यक्ष प्रवेश राणा, दिलबाग मोर, रामेEर दास, ओमता राम, रामपाल राणा, मोहन सिंह राणा,गुरदेव सिंह एडवोकेट, बलदेव पुनिया इत्यादि शामिल थे।
        इस अवसर पर जिला कांगे्रस अध्यक्ष तिजेन्द्र पाल मान, पूर्व विधायक दिल्लू राम बाजीगर, पंजाब के भदौड़ हलका के कांगे्रस विधायक एवं प्रसिद्ध लोक गायक मोह मद सिद्दीक, कविराज शर्मा, जिले सिंह राणा, नगर पालिका चेयरमैन संतोष देवी, कांगे्रस के प्रदेश संगठन सचिव मिलखी राम अग्रवाल, डा. श्याम साहनी, रामचन्द्र शर्मा इत्यादि मौजूद रहे। इस मौके पर सांसद दीपेन्द्र हुaा, नवीन जिन्दल व शमशेर सिंह सुरजेवाला को क्षत्रीय समाज द्वारा शमशीर व पगड़ी भेंट कर स मानित किया गया।

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