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Saturday, December 5th, 2020

प्राकृतिक सौन्दर्य के दर्शन होते है मड़ावरा क्षेत्र में -धसान नदी में नैनीताल की झील का मंजर

1आई एन वी सी ,
ललित पुर ,
बुन्देलखण्ड नागरिक मोर्चा द्वारा जनपद के पर्यटन, पुरातत्व महात्व एवं लोक संस्कृति के साथ-साथ धार्मिक स्थलों के समुचित विकास को लेकर निकाली जा रही पर्यटन विकास यात्रा कल मड़ावरा के ग्राम लखंजर, कुर्रट, धौरी सागर, बडवार, गिरार,सौरईं, सीरोन पहुंची। यात्रा के दौरान अध्यन दल ने ग्रामीणों के जीवन स्तर के रहन-सहन पहुंच मार्ग के अलावा औषधियों के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारियां लीं। लखंजर के जंगल में अनेक प्रकार की दुर्लभ जड़ी बूटियां मौजूद हैं। विकास या0त्रा सांय को मड़ावरा पहुंची, जहां विकास खण्ड सभागार में लोक क ला का सांस्कृति कार्यक्रम हुआ। जिसमें जिलाधिकारी ओ.पी वर्मा, पुलिस अधीक्षक विजय यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि विशेष रूप से मौजूद रहे। अधिकारियों ने लोक कला को और अधिक विकसित किये जाने पर जोर दिया। लखंजर के पास धसान नदी स्थित है, जो म.प्र. एवं उ.प्र. की सीमा रेखा है। नदी के दूसरे ओ म.प्र. का 2वराठा क्षेत्र लग जाता है। धसान नदी का मंजर महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यह नैनीताल की सुप्रसिद्ध झील का एहसास कराती है। यदि वोटिंग के साथ-साथ ईको पर्यटन के क्षेत्र में विकास किया जाये तो बाहर से पयर्टक यहां आकर जंगल में वन्य जीवों को देखने एवं प्राकृतिक छटा का लुप्त उठाने के लिये  आ सकते हैं। धसान नदी के किनारे घने वृक्षों से सजी सुन्दर घाटी भी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन सकती है। पहाड़ी के ऊपर देखने पर गांव में बने घर और हरे-भरे खेतों का नजारा प्रकृति प्रेमियों का स्थल बन सकता है। धोरी सागर के निकट टपका-टपकी जल प्रपात देखने लायक है। वहीं सीरोन ग्राम में स्थित संग्रालय में अनेक पुरातन मूर्तियां हैं, जिनको आसपास के क्षेत्रों से संग्रहीत कर वहां रखा गया है। यह क्षेत्र अपने प्रागऐतिहासिक काल का उदाहरण प्रस्तुत करता है। संग्रालय में सर्प युगल की तांत्रिक मूर्ति भी स्थापित है। क्षेत्र के आदिवासियों का मानना है कि मूर्ति पर दूध चढ़ाने से अनेक प्रकार की बीमारियां ठीक हो जाती हैं, ऐसी लोक मान्यता बनी हुई है। बताते चलें कि इसी क्षेत्र में रत्नगर्भा अपने आंचल में अनेक प्रकार के खनिज समेटे हुये है। सोने की खोज इसी क्षेत्र में हो रही है। डायसफोर, यूरेनियम का प्रमख घटक भी इसी क्षेत्र में खोजा गया है। विदेशी कंपनी सोने की खोज में विगत कई वर्षों से जुटी हुई है। मड़ावरा के निकट रनगांव में राई नृत्य का प्रमुख केन्द्र है। यहां की कलाकार अपनी कला से राष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ चुकीं हैं। वहीं बुन्देलखण्ड क्षेत्र में धार्मिक एवं 3वैवाहिक उत्सवों के दौरान इस कला का नजारा देखने को मिल जाता है। बेडनी प्रजाति के लोग इस कला को जीवान्त बनाये हुये हैं और यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बड़ती जा रही है। इस कला का आधुनिक परिवेश में और निखारने तथा अन्र्तराष्ट्रीय पहचान दिलाने की जरूरत है। पर्यटन विकास यात्रा रात्रि में विश्राम करने के बाद दूसरे दिन पारौल होते हुये पण्डवन पहुंची। बताया जाता है कि पाण्डवों ने अज्ञात वास के दौरान इस जंगली क्षेत्र में कुछ समय बिताया, आज भी पत्थरों पर पैरों के निशान एवं शिव जी की प्राचीन पिण्डियां तथा प्राकृतिक झरना अपने आप में अनूठा है। वर्ष में एक बार पण्डवन में मेला आयोजित किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से लोग शामिल होते हैं। पर्यटन विकास यात्रा मदनपुर पहुंची, जहां पुरातत्व एवं धार्मिक महत्व के स्थानों का भ्रमण करने के पश्चात धामौनी पहुंची। ज्ञातव्य है कि धामौनी उ.प्र.-म.प्र. की सीमा पर स्थित है और अपने ऐतिहासिक किले के लिये प्रसिद्ध है।
किला के अवशेष आज भी अपने गौरव के प्रतीक हैं। यहां पर एक मजार भी है, जहां वर्ष में एक बार उर्स 4मेला आयोजित किया जाता है। बताया गया है कि एक सूफी संत की इस मजार पर अनेक प्रकार की आचर्यजनक घटनाओं की चर्चाऐं मौजूद हैं। पर्यटन विकास यात्रा अब अगले पडाव पर सुप्रसिद्ध अमझरा पहुंची, जहां कहा जाता है कि पहाड़ी से अमृत का झरन होता है। इस क्षेत्र में कवा के वृक्षों एवं अन्य औषधियों की भरमार है। इस क्षेत्र में अति प्राचीन हनुमान जी की विशालकाय मूर्ति है, जो बुन्देलखण्ड में आस्था का बड़ा केन्द्र है। प्रतिवर्ष यहां मेला लगता है और उ.प्र. व म.प्र. के लोग इस क्षेत्र में दर्शन के लिये आते हैं। पर्यटन विकास यात्रा का आखिरी पडाव ग्राम डोंगराकला में हुआ। पहाड़ी पर विंध्यवासिनी एवं डुंगरासन देवी का प्राचीन मंदिर है, जो इस क्षेत्र में आस्था का प्रतीक है। पूर्व सांसद सुजान सिंह बुन्देला ने मंदिर के विकास के लिये काफी कार्य किया है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित मंदिर से प्राकृतिक छटा का दर्शन अनूठा है। यदि इस पहाड़ी पर रोप-वे का निर्माण किया जाता है तो यह पर्यटकों के आर्कषण का केन्द्र बन सकता है। पर्यटन विकास यात्रा में संयोजक भूपेन्द्र जैन, संतोष शर्मा, यात्रा प्रभारी रविन्द्र दिवाकर, बासुदेव, इं.राजाराम गोस्वामी,स्वतंत्र मोदी, सुदामा प्रसाद दुबे, रमाकांत तिवारी, संजीव सीए, हरीश क पूर टीटू, अभय श्री माली, अक्षय दिवाकर, प्रकाश चन्द्र, शिव कुमार त्रिपाठी, अजीज कुरैशी, अनिल कंचन, मनोज पुरोहित, पी.एन. दुबे, गजेन्द्र सिंह, मानसिंह, नितिन जैन, अनिल बड़ौनिया, विनोद त्रिपाठी, फिरोज इकबाल, रवीन्द्र श्रीवास्तव आदि अनेक सामिल हुये।

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