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Thursday, December 9th, 2021

प्राकृतिक सौन्दर्य की मिसाल चित्र प्रदर्शनी ‘नुकूश-ए-फितरत’

Nuqoosh-e-Fitratआई एन वी सी, दिल्ली,

इण्डिया हैबीटेट सेन्टर के अन्तर्गत विज्वल आर्ट गैलरी में दिल्ली के कलाकार गजाली मोइनूद्दीन के चित्रों की प्रदर्शनी ‘नुकूश-ए-फितरत’ का आयोजन किया गया है। 16 मई तक चलने वाली इस प्रदर्शनी की उद्घाटन रविवार शाम केन्द्रीय मंत्री श्री सलमान खुर्शीद ने किया। श्री खुर्शीद के अतिरिक्त आर्ट क्रिटिक केशव मलिक, फिल्मकार दीपक तंवर सहित कई गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे। ‘नुकूश-ए-फितरत’ गज़ाली मोइनुद्दीन की दूसरी चित्र प्रदर्शनी है, जो कि प्रकृति के प्रति उनके असीम प्रेम को दर्शाती है। जामिया मिलिया इस्लामिया में फाइन आर्ट्स के प्रो. गज़ली बताते हैं कि कला के प्रति मेरा प्यार अपने परिवार को समर्पित है विशेष रूप से मेरे छोटे भाई को जिन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया है। गजली बताते हैं कि मेरी कला में बोल्ड कलर्स एवम् उसे अभिव्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता रहती है और मेरा प्रयास रहता है कि मैं कैनवास पर प्रकृति के सौन्दर्य को सशक्त रूप में उतार सकूं। मोइनुद्दीन के काम उनकी विशेषता है कि वह इसके लिए ब्रश का इस्तेमाल न करते हुए एक्रिलिक ट्यूब और अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करते हैं। गजली ने बताया कि कैनवास पर जब एक आकृति बन जाती है तो उसके दोबारा से उसी तरह से नहीं बनाया जा सकता, चाहे यह कोशिश स्वयं पहली बार उस कला को बनाने वाला कलाकार ही क्यों न हो। इससे पूर्व उनकी पहली प्रदर्शनी वर्ष 2008 में प्रदर्शित की गयी थी। इस अवसर पर श्री सलमान खुर्शीद गजाली के काम से काफी प्रभावित नज़र आये, उन्होंने काफी समय तक उनकी पेन्टिंग्स को लेकर बातचीत की। श्री खुर्शीद ने बताया कि वह स्वयं कला-प्रेमी हैं और जब बात प्रकृति की हो तो इसका कोई सानी नहीं है। गजली ने प्रकृति के सौन्दर्य को कैनवास पर उतारने हेतु अच्छा प्रयास किया है और मुझे उम्मीद है कि कला-प्रेमियों को उनका काम पसन्द आयेगा। वरिष्ठ आर्ट क्रिटिक केशव मलिक ने भी कलाकार के कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा ‘नुकूश-ए-फितरत’ में शामिल काम को अगर ध्यान से देखें को इसमें पेंटर के नजरिये से प्रकृति की प्रशंसा का आभास होता है। गजाली अपने प्रयोगों में, रेखा और रंग का सार्थक प्रयोग कर रहे हैं। अपने प्रदर्शनी में गजाली ने बिना औचित्य या साहित्यिक सामग्री के नई संभावनाओं को लिया है। इन चित्रों में उन्होंने वास्तविक, वर्णनात्मक और वातावरण को साथ लिया है।

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