Tuesday, August 4th, 2020

प्रधानमंत्री ने किया अध्यापक और अध्यापक-प्रशिक्षकों के लिए योग शिक्षा प्रारूप का लोकार्पण

smriti irani,prime minister ,narender modi,ncrtनई दिल्ली, न्यायाधीश वर्मा आयोग के निर्देशानुसार एनसीटीई ने अध्यापक-शिक्षा में मौलिक परिवर्तन लाने के लिए नई नियमावली, 2014 बनाई थी। इस नियमावली के अध्यापक-शिक्षा के 15 कार्यक्रमों के लिए नए प्रावधानों और मानकों को वर्ष 2015 से ही लागू किया जा चुका है। इसमें योग-शिक्षा को प्राथमिकपूर्व से लेकर मध्य, उच्च और विश्वविद्यालयीन अध्यापक-शिक्षा के सभी 15 कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों के एक अनिवार्य विषय के रूप में स्वीकार किया गया था। इसका अर्थ है कि 18000 से अधिक संस्थानों और लगभग 1000 एमएड कॉलेजों में अध्ययनरत लगभग 14 लाख संभावित शिक्षकों को अनिवार्य रूप से योग-शिक्षा दी जाएगी। एनसीटीई ने एक व्यवस्थित तरीके से देश के 18000 संस्थानों में अध्ययनरत या फिर पढ़ा रहे शिक्षको के लिए योग-शिक्षा के स्वयंशिक्षण और मुक्त शिक्षणस्रोत तैयार किया है। यह सब एनसीटीई की वेबसाइट पर निःशुल्क उपलब्ध रहेगा। पिछले दिनों माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बी.एड., एमएड. और डी.एल.एड. के लिए तैयार किए गए एनसीटीई के योग-शिक्षा के हिंदी पाठ्यक्रमों का लोकार्पण बेंगलूरू के एस-व्यास विश्वविद्यालय में आयोजित इंटरनेशनल कान्फ्रेंस ऑन फ्रंटियर ऑफ योग रिसर्च एंड इट्स एप्लीकेशन में किया था। इस कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल और मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी और केंद्रीय आयुष मंत्री भी उपस्थित थे। इन तीनों पाठ्यक्रमों को एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के मार्गनिर्देशन में तैयार किया गया है जिसके अध्यक्ष एस-व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रधानमंत्री के योग गुरू प्रोफेसर डा. नागेंद्र थे। समिति में रामकृष्ण विश्वविद्यालय, बेलूड़ के कुलपति प्रोफेसर स्वामी आत्मप्रियानंद, बिहार स्कूल ऑफ योग के स्वामी मंगलतीर्थम्, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के निदेशक डॉ. बसवरेड्डी, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रति कुलपति डा. चिन्मय पंड्या, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार के प्रोफेसर जीडी शर्मा, कैवल्यधाम, लोनावला के ओपी शर्मा और आयंगर योगाश्रय, मुंबई के डॉ रज्वी मेहता शामिल थे। अंग्रेजी और हिंदी के अलावा इन पाठ्यक्रमों को उर्दु सहित अन्य नौ क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा ताकि इनका जमीनी स्तर पर प्रभावी उपयोग हो सके। एनसीटीई प्राथमिक से लेकर मध्य, उच्च और विश्वविद्यालयीन शिक्षकों के शिक्षण के लिए विशेष योग पाठ्यक्रमों को तैयार करने में गंभीरतापूर्वक जुटी हुई है। इसमें बीएड (योग) और एमएड(योग) के पाठ्यक्रम शामिल हैं। योग का शिक्षण पाने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को पाठ्यक्रम के सैद्धांतिक, प्रायोगिक और इंटर्नशिप के चरणों से गुजरना होगा। एमएड स्तर पर योग-शिक्षा में तनाव-प्रबंधन, संपूर्ण व सामंजस्यपूर्ण व्यक्तित्व विकास और स्व तथा आध्यात्मिकता का विकास आदि शामिल हैं जिससे अकादमिक नेतृत्व विकसित होगा। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर इस पाठ्यक्रम में सत्क्रिया, बंध, मुद्रा, आसन, प्राणायाम आदि यौगिक क्रियाएं, योग और संज्ञानात्मक विकास, क्रोध-प्रबंधन और शारीरिक विकास शामिल है। चूंकि देश में लाखों योग-शिक्षकों की आवश्यकता है, इसलिए योग-शिक्षकों को तैयार करने के लिए एक व्यापक प्रयास की आवश्यकता है जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कार्य कर सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्तित्व के समग्र विकास पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य के विकास और तनाव, मधुमेह कैंसर आदि असंक्रामक रोगों को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को गर्व है कि यहां भारतीय और पश्चिमी पद्धतियां मिल-जुल कर कार्य कर रही हैं। इस योग सम्मेलन में 50 से अधिक देशों से 10000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

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