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Friday, January 28th, 2022

प्रतिस्पर्धा और संघर्ष के बाद ही जीत का आनंद

आई एन वी सी न्यूज़
भोपाल,
दीक्षांत समारोह जीवन के उद्देश्यों के संकल्प का अवसर है। हर विद्यार्थी जीवन के उद्देश्य निर्धारित कर नियमों का पालन करते हुए सही आचरण करे। समाज में न्यायवान, ज्ञानवान और आदर्श नागरिक के रूप में अपनी पहचान बनाएँ। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल सोमवार को रीवा के अवदेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य और राष्ट्र हित जब एक समान होंगे, तभी जीवन सार्थक बनेगा।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्राचीन ग्रंथों में बताया गया है कि व्यक्ति जन्म से नहीं, अपने कर्मों और ज्ञान से श्रेष्ठ बनता है। विद्यार्थियों को एक अच्छा नागरिक बनाने में गुरूओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है। नई नीति से विद्यार्थियों को अपने रूचि अनुसार विभिन्न विषयों को चुनने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जनजातियों को जागरूक कर उन्हें सिकल सेल जैसे रोग के निदान के लिये प्रेरित करें।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अवदेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कई विद्यार्थियों ने शिक्षा तथा अन्य कई क्षेत्रों में अपना विशेष स्थान बनाया है। विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति को तत्परता से लागू किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के कठिन काल में भी विश्वविद्यालय में पठन-पाठन और परीक्षाएँ संचालित हुई हैं। डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को अपनी बौद्धिक क्षमता से स्वयं तथा देश का नाम रौशन करने की शुभकामनाएँ दीं।

भारतीय शिक्षक मंडल के श्री मुकुन्द कानिटकर ने कहा कि प्रतिस्पर्धा और संघर्ष के बाद ही जीत के आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होगा, तभी हमारा जीवन सार्थक बनेगा।

कुलाधिपति श्री मंगूभाई पटेल और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वविद्यालय के 80 सफल विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की। विश्वविद्यालय के 64 विद्यार्थियों को उत्कृष्ट सफलता के लिये पदक प्रदान किए गए। समारोह में विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका 'दीक्षा' तथा शोध पत्रिता 'विंध्य भारती' का विमोचन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति श्री राजकुमार आचार्य, महाराज छत्रसाल विश्वविद्यालय छतरपुर के कुलपति डॉ. टी.आर. थापक भी उपस्थित थे।

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