कमलेश कुमार

पूर्वोत्तर राज्यों का विकास यूपीए सरकार की प्राथमिकता रही है। संसद में दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी यही बात अभिलक्षित होती है। किसी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे का होना एक बुनियादी जरूरत है। सड़कें न केवल देश के विभिन्न भागों को जोड़ती हैं बल्कि समाज के सभी वर्गों के लोगों के जीवन को प्रभावित करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों — कृषि, व्यापार अथवा उद्योग पर भी असर डालती हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में विकास प्रयासों में गति लाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने क्षेत्र के सभी राज्यों में नई सड़कों के निर्माण तथा कुछ वर्तमान सड़कों के सुधार के लिए अनेक विशेष कार्यों को हाथ में लिया है। ये कार्यक्रम इस क्षेत्र में चलाए गए कार्यक्रमों में सबसे बड़े हैं । इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों एवं अन्य सड़कों के रख-रखाव तथा ग्रामीण सुधार के लिए भी हर वर्ष धनराशि खर्च की गयी है । यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा पीएमजीएसवाई के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के माध्यम से राज्यों की अनेक सड़कों के उन्नयन पर केन्द्र सरकार द्वारा किए जा रहे पर्याप्त निवेश के अतिरिक्त है ।
 
 क्षेत्र में सड़क विकास के बकाया कार्यों को पूरा करने के उद्देश्य से कुछ विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए हैं । पश्चिम बंगाल असम सीमा से सिल्चर तक 678 कि.मी. पूर्वोत्तर क्षेत्र में पड़ता है। इस उच्च गुणवत्ता वाले 678 कि.मी. भाग के राजमार्ग की लागत लगभग 6000 करोड़ रुपये है।
 
 एक अन्य कार्यक्रम – विशेष त्वरित सड़क विकास कार्यक्रम भी (एसएआरडीपी-एनई) शुरू किया गया है जिसके अंतर्गत विभिन्न वर्गों की 9940 कि.मी. सड़कों के माध्यम से सभी राज्यों के राजधानी-नगरों को समुन्नत राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ा जाएगा और क्षेत्र के सभी जिला मुख्यालयों को कम से कम दो लेन वाली सड़कों से जोड़ा जाएगा ताकि पड़ोसी देशों के साथ सम्पर्कों में सुधार हो सके; क्षेत्र के पिछड़े और दूर-दराज इलाकों के साथ सड़क सम्पर्क उपलब्ध कराया जा सके और सामरिक महत्त्व की कुछ प्रमुख सड़कों का सुधार हो सके।
 
 निर्माण, संचालन एवं हस्तांतरण के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, फेज-3 (एनएचडीपी-3) के अंतर्गत अगरतला, ऐजोल, इम्फाल और कोहिमा के साथ सम्पर्क और अधिक सुधारने के उद्देश्य से 706 कि.मी. लम्बे राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्से को चौड़ा करने तथा उसका सुधार करने का कार्य हाथ में लिया जा रहा है।

उन्नयन के बाद
विशेष त्वरित सड़क विकास कार्यक्रम – पूर्वोत्तर को तीन चरणों में विभक्त किया गया है । प्रथम चरण (अ) के कुल 2796 कि.मी. के 1580 कि.मी. और सड़कों तथा राजमार्गों के अरूणाचल प्रदेश पैकेज के 2319 कि.मी. के 1543 कि.मी. के कार्यान्वयन को स्वीकृति दे दी गयी है । प्रथम चरण (अ) के अंतर्गत उप-परियोजनाओं के तहत 3488 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत वाली 1072 कि.मी. की परियोजना को मंत्रालय ने स्वीकृति दे दी है और इस पर कार्यान्वयन भी प्रारम्भ हो चुका है । इसमें से 450 कि.मी. का हिस्सा मार्च, 2009 तक पूरा भी हो चुका है । फेज-  न्न ए न्न  के तहत सिध्दान्त रूप में स्वीकृत 1216 कि.मी. भाग में एन.एच.ए.आई.बी.आर.ओराज्य पी.डब्ल्यू.डी. असम द्वारा विस्तृत परियोजना प्रगति पर है । समूचा फेज I के मार्च, 2014 तक पूरा हो जाने का लक्ष्य रखा गया है।

 सड़कों तथा राजमार्गों के अरूणाचल प्रदेश पैकेज के तहत सरकार द्वारा स्वीकृत 2319 कि.मी. में से 776 कि.मी. पर बीओटी (वार्षिक अनुबंध) के आधार पर अमल किया जाना है । 776 किलोमीटर की 4 परियोजनाओं के लिए योग्यता विषयक अनुरोध के बारे में मूल्यांकन कर लिया गया है । पूर्वोत्तर क्षेत्र के विशेष त्वरित सड़क विकास कार्यक्रम के फेज बी को 4825 कि.मी. लम्बी सड़कों के सुधारनिर्माण तथा पोर्टें तैयार करनी हैं और
 
 अरूणाचल प्रदेश के सभी 16 जिला मुख्यालय दो लेन वाली सड़कों से जुड़ जाएंगे । ट्रांस-अरूणाचल हाइवे नाम से घोषित पूर्व-पश्चिम राजमार्ग 1600 कि.मी. से अधिक लम्बा होगा और राज्य के अंदर कुशल आंतरिक सड़क संचार की सुविधा से सम्पन्न होगा । लुमला रोड के जरिए भूटान के साथ इसके सम्पर्क बेहतर होंगे । एक नदी के थाले से दूसरे थाले के बीच सड़क सम्पर्क होने से घाटी के अन्दर सम्पर्क और बढेग़ा । सड़कों की बेहतर सुविधा के परिणामस्वरूप अरूणाचल प्रदेश की पन बिजली परियोजनाओं के लिए भी सुविधाएं बढेंग़ी ।

 असम में सभी राष्ट्रीय राजमार्ग कम से कम दो लेन वाले होंगे और उनमें से 1400 कि.मी. तक 4 लेन वाले भी होंगे । राज्य के सभी 26 मुख्यालयों को दो लेन वाली सड़कों से जोड़ दिया जाएगा । पूर्व-पश्चिम गलियारे पर पाठशाला से भूटान के लिए अपेक्षाकृत छोटा गलियारा बनाया जा रहा है । इसके तैयार हो जाने पर धेमाजी, उत्तर लखीमपुर, बराक घाटी, एन सी हिल्स, कार्बी एन्गलांग जैसे पिछड़े इलाकों में उत्कृष्ट सड़क व्यवस्था हो जाएगी और ब्रह्मपुत्र पर चार अतिरिक्त सड़क पुल बना दिए जाएंगे ।

 जिया भरली नदी के आर-पार भी एक पुल बनाया जाएगा । मणिपुर की राजधानी का चार लेन वाले राजमार्गों से सम्पर्क स्थापित कर दिया जाएगा और राज्यों के सभी नौ जिला मुख्यालयों के साथ दो लेन वाले मार्गों से जोड़ दिया जाएगा ।

 मेघालय राज्य की राजधानी – शिलांग शहर को भी 4 लेन वाले राजमार्गों से जोड़ दिया जाएगा । मेघालय के सभी सात जिला मुख्यालय नगरों और गारो हिल्स के खादान क्षेत्र को भी दो लेन वाली सड़कों से जोड़ दिया जाएगा । शिलांग के पूर्वी और पश्चिमी बाइपासों और जोवाई को भी भीड़-भाड़ से मुक्त करने का प्रस्ताव है ।  वर्तमान एन एच 44 शिलांग से त्रिपुरा (सब्रूम) के दक्षिण छोर तक, को चार लेन का बनाया जाएगा और बराक घाटी, मिजोरम और त्रिपुरा तक अच्छी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

 मिजोरम के सभी राजमार्गों का सुधार करके उन्हें दो लेनों से जोड़ा जाएगा । ऐजोल तक चार लेन की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी । सभी जिला मुख्यालय नगरों को दो लेन से जोड़ा जाएगा । म्यांमा के सित्तावे से सम्पर्क स्थापित किया जाएगा ताकि बंगाल की खाड़ी के जरिए जलमार्ग से माल लाने -ले-जाने की सुविधा हो जाए ।

 नगालैंड की राजधानी कोहिमा को चार लेन वाले राजमार्गों से जोड़ा जाएगा और राज्य के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों का मानक दो लेन का रखा जाएगा । सभी 11 जिला मुख्यालयों को दो लेन वाली सड़कों के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ दिया जाएगा और राज्य के पिछड़े इलाकों में बेहतर सम्पर्क सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी । सिक्किम की राजधानी गंगतोक को दो लेन वाले राजमार्गों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, यहां दो लेन की सुविधा पहले ही उपलब्ध थी । राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में दो लेन वाली सुविधाएं और राजमार्ग सम्पर्क के साथ-साथ नाथूला के साथ दो लेन वाली सड़क निर्माण करके बेहतर सम्पर्क कायम किया जाएगा ।

 त्रिपुरा के पिछड़े और दूरदराज के इलाकों को दो लेन की सड़कों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और सभी चार जिला मुख्यालयों को दो लेन वाली सड़कों से जोड़ दिया जाएगा। अगरतला के साथ चार लेन के राजमार्ग और सभी चार जिला मुख्यालयों को दो लेन वाली सडकों से जोड़ा जाएगा । ऐजोल और अगरतला के बीच दो लेन वाली सड़क व्यवस्था में सुधार करके उसे दो लेन की सड़कों और राजमार्गों से जोड़कर बेहतर सुविधासम्पन्न बनाया जाएगा ।

 कुल मिलाकर, सभी राज्यों की राजधानियों (गंगतोक को छोड़कर) के नगरों के साथ 4 लेन वाली सम्पर्क व्यवस्था स्थापित करने की योजना है । पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी 85 जिला मुख्यालयों के साथ दो लेन वाली सम्पर्क व्यवस्था कायम करने का भी संकल्प व्यक्त किया गया है । इससे भूटान, म्यांमा, बंगलादेश जैसे देशों के साथ सीमा क्षेत्रों में सम्पर्क व्यवस्था सुचारू और बेहतर होगी और ‘सात बहनों’ के नाम से विख्यात पूर्वोत्तर क्षेत्र के 
   
(लेखक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत हैं)

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