Friday, July 3rd, 2020

पाश्चात्य शिक्षा पद्धति से समाज की देश संस्कृति नष्ट हुई

आई एन वी सी न्यूज़    
लखनऊ,

यूनाइट फाउण्डेशन द्वारा युवाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्रीराम प्रपत्ती के पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. प्रपन्नाचार्य ने कहा कि हर व्यक्ति को अपना कार्य इस लिहाज से करना चाहिए  वह समाज के लिए कार्य कर रहा है। समाज से ही देश का निर्माण होता है। मनुष्य को हमेशा अपने स्वार्थ और परिवार से आगे बढ़कर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि  मनुष्य स्वतंत्र नहीं है। वह परिवर तथा समाज के लिए उत्तरदायी है। उस पर समाज का ऋण है। उसे समाज के लिए कार्य करके ही उतार सकते हैं। उसी से आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी।

उन्होंने कहा कि एक भी जीव कर्म के बिना नहीं रह सकता, इसी कर्म में वह बंध जाता है। उससे वह निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करके निकल सकता है। उन्होंने कहा कि हम जो कार्य कर रहे हैं, उसे पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करें। उसी के बाद हमारे नागरिक दायित्व आ जाते हैं, जिससे हमारा नगर और राष्ट्र बनता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने राष्ट्र की सम्पत्ति की रक्षा करनी चाहिए।

पाश्चात्य शिक्षा पद्धति संस्कृति नष्ट हुई: डॉ. दयानन्द लाल

स्वामी विवेकानन्द केन्द्र के प्रान्त संचालक डॉ. दयानन्द लाल ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने कहा था कि ईश्वर है जिसे हमने देखा है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द तीन बार स्वामी जी के पास मांगने के लिए गए लेकिन उन्होंने अपने परिवार की स्थिति खराब होने के बावजूद ज्ञान, भक्ति और वैराग्य मांगा। कभी उनका परिवार काफी सम्पन्न था, लेकिन उनके समय में परिवार की स्थिति काफी दयनीय हो गयी थी। उन्होंने हमेशा मनुष्य के चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व निर्माण और निष्ठा की बात कही।

उन्होंने कहा कि हमारे देश की शिक्षा पद्धति लार्ड मैकाले की बनाई नीति पर चल रही है, जिसने हमारे समाज की संस्कृति, देशभक्ति और उसके मूल्यों को नष्ट करने का काम किया। उन्होंने कहा कि हमें पाश्चात्य सभ्यता से कुछ नहीं मिल सकता है। हमारे समाज को व्हाट्सएप, फेसबुक, और ट्विटर ने बदल कर रख दिया है, जिससे हमारे संस्कार नष्ट होते जा रहे हैं। इसी से गलत धारणाओं का विकास होने लगता है। हमारे माता—पिता को इस पर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि हमारे बच्चों पर इसका गलत असर पड़ रहा है।

युवाओं को नौकरी के बजाय रोजगार मांगना चाहिए: श्याम नन्दन सिंह

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गोसेवा आयोग के अध्यक्ष  श्याम नंदन सिंह ने कहा कि युवाओं को नौकरी के बजाय रोजगार मांगना चाहिए। उन्होने कहा कि युवाओं के लिए स्कूलों में इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए। जिससे युवाओं में रोजगार के प्रति जागरूकता आए। उन्होंने कहा युवा वर्ग देश का भविष्य होने के साथ-साथ हमारे देश के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में युवाओं की संख्या अन्य देशों से अधिक है। भारत की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है। सरकार का पूरा ध्यान युवाओं के माध्यम से विकास लाने पर केन्द्रित है। उनके अनुसार युवा देश के विकास के लिए अपना सक्रिय योगदान प्रदान करें न कि केवल उसका एक हिस्सा बनकर रह जाएं।

लघु उद्योगों के लिए सिडबी सबसे बड़ा माध्यम

सिडबी के उप महा प्रबन्धक हीरालाल श्रीवास्तव ने कहा कि उनका बैंक समाज के छोटे व्यापारियों, लघु उद्यमियों को रोजगार के लिए सहायता करता है। उनको ऋण भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वह स्वावलम्बन मिशन चला रहे हैं, जिससे युवा जुड़कर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। इस अवसर पर यूनाइट फाउण्डेशन के अध्यक्ष डॉ. पी.के. त्रिपाठी, डॉ. उमाशंकर श्रीवास्तव, दिनेश कुमार मिश्र, अधिवक्ता योगेश मिश्र, शिवाराम मिश्र, यतीन्द्र गुप्ता, देवेन्द्र मोदी, अमलेश कुमार, राधेश्याम पाण्डेय, प्रदीप दीक्षित, सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया।

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