राजेन्द्र चौधरीआई एन वी सी ,
लखनऊ ,
समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन से दो महत्वपूर्ण दिशा संकेत प्राप्त हुए। एक पार्टी अपनी लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की नीति पर चलते हुए विकास को राजनीति का मुख्य एजेण्डा बनाने को संकल्पित है। दूसरा अब समाजवादी पार्टी के केन्द्र में नेतृत्व की दूसरी तीसरी पांत यानी युवा वर्ग की अहमियत रहेगी। पार्टी कृषि अर्थव्यवस्था में सुधार पर विशेष बल देगी और सांप्रदायिक तथा विघटनकारी ताकतों को हर हाल में सिर नहीं उठाने देगी।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन की एक विशेषता यह भी रही कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  आज के विकास एजेण्डा के प्रवर्तक हैं। मुख्यमंत्री ने गत विधान सभा चुनावों में प्रदेश के मतदाताओं के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई थी और फलस्वरूप पहली बार समाजवादी पार्टी की बहुमत की सरकार बनी। समाजवादी सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र के वायदों को निभाने में जो दक्षता तथा तत्परता दिखाई उसके अन्य प्रांतो के लोग भी कायल हो गए हैं।  अखिलेश यादव प्रदेश के बाहर जिन प्रांतों में गए वहां उनको देखने सुनने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आज देश के सर्वाधिक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में उनकी प्रतिष्ठा है। लेकिन इस सबसे हटकर उनका समाजवादी समाज में योगदान यह है कि उन्होने गांव, गरीब और किसान-खेत के मसलों को वरीयता दी।

सम्मेलन के प्रारम्भ और समापन में  मुलायम सिंह यादव ने देश की राजनैतिक आर्थिक स्थितियों के उल्लेख के साथ यह स्पष्ट कर दिया था कि देश भाजपा की छलछद्म की राजनीति को स्वीकार करनेवाला नहीं है। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की उसकी साजिशों का कड़ा मुकाबला किया जाएगा। स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी ही प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतों की साजिशों को विफल करने में सक्षम रही है और आगे भी वहीं इससे निबटेगी।
समाजवादी पार्टी के राजनैतिक, आर्थिक प्रस्ताव में देश की विषम स्थितियों वर्णन कर बताया गया कि देश की सीमाएं कितनी असुरक्षित हैं और मंहगाई, भ्रष्टाचार, बेकारी से देशवासी खासकर युवा कितना त्रस्त है। केन्द्र सरकार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के साथ भी सौतेला व्यवहार कर रही है। देश की नीतियों के निर्धारण में पूंजीघरानों के बढ़ते हस्तक्षेप गम्भीर चिन्ता का विषय है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन का सबसे मुखर और प्रखर निष्कर्ष यह है कि देश के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती धर्मनिरपेक्षता को मजबूत बनाए रखने की है। केन्द्र सरकार का इरादा इतिहास को बदलने का लगता है। आतंकवाद के खिलाफ भाजपा सरकार की नीति लचर है। विदेश नीति विफल है और अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत मित्रविहीन बनता जा रहा हैं।

समाजवादी पार्टी ने दो टूक षब्दों में धर्म के नाम पर लोगों को बांटने, दंगाफसाद कराने और सोशल मीडिया के माध्यम से नफरत फैलानेवालों को सचेत किया है कि वे अपनी हरकतों से बाज आएं। बदायूॅ कांण्ड और मेरठ काण्ड से जाहिर है कि लवजिहाद के नाम पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की पुरजोर कोशिशे रही हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी का मानना है कि जिस इमारत की नींव झूठ, फरेब और छलकपट पर टिकी हों, वह बालू की दीवार की तरह गिर जाती है और यही हाल भाजपा की केन्द्र सरकार का भविष्य है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन से एक नई राजनैतिक भूमिका की शुरूआत हुई है। समाजवादी पार्टी एक नए राजनैतिक विकल्प के रूप में देश के दृश्य पटल पर उभरकर आई है। गांव-गरीब के साथी और सांप्रदायिकता के धुर विरोधी के रूप में इसकी नई पटकथा लिख दी गई है। आज देश में परिवर्तनकामी राजनैतिक शक्तियों को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के संदेश और  मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व से नई दिशा का संकेत है।

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