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Thursday, January 21st, 2021

पश्चिमी सिंहभूम खनिज सम्पदा से परिपूर्ण है : रघुवर दास

raghuvar daasआई एन वी सी न्यूज़ राँची, मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि झारखण्ड प्रकृति प्रदत्त समृद्ध राज्य है, यहां समृद्धि के लिए अपार क्षमता है एवं समृद्ध मानव संसाधन है। पाँच सालों के भीतर इन संसाधनों का उपयोग करते हुए हमें झारखण्ड को एक विकसित राज्य बनाना है। मुख्यमंत्री आज स्थानीय बी0एन0आर0 चाणक्या होटल में आयोजित राज्य के विकास पर संगोष्ठि को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास हेतु वर्ष 2011 में ही देवराय कमिटि द्वारा अनेक सुझाव दिए गए थे परन्तु उसे अपनाया नहीं जा सका। शायद इसके लिए राजनीतिक अस्थिरता प्रमुख कारण रहा हो। राज्य की सफलता के लिए मजबूत नीव की आवश्यकता है और यह नीव है नजरिया। अब यह नजरिया बदल रहा है। व्यक्ति की सोच सकारात्मक होनी चाहिए। सकारात्मक सोच के साथ विकास एवं गुडगर्वनेंस को स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को तीव्र गति से विकसित करना है। सरकार की योजनाओं को गरीब जनता तक पहुंचाना हमारा उद्देश्य है। प्रत्येक योजनाओं को स्पष्ट दिशा एवं स्पष्ट निर्णय देने हैं। झारखण्ड के प्रत्येक अधिकारी एक विशेषता लिए हुए है। आवश्यकता है इन्हें समर्थन एवं सहयोग देने की। सरकार इन कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को पूरा-पूरा सहयोग एवं समर्थन देगी। सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को एक कर्मयोगी की भूमिका निभाते हुए राज्य के विकास में अपना सहयोग देना है। उन्होंने कहा कि कार्य की गति को तेज करने के उद्देश्य से सरकार ने विभागों को कम करने का प्रयास किया है। प्रक्रिया को सहज बनाया जा रहा है ताकि कम से कम मामले कैबिनेट के निर्णय हेतु प्रस्तावित किए जाएं। सरकार स्टेट डेवलपमेंट कॉन्सिल बनाने जा रही है जो प्रत्येक तीन माह में बैठक करेगी और अपने सुझाव देगी। शीघ्र ही अनुसूचित जनजाति विकास परिषद भी बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस विचार को समर्थन करते हैं कि जिला सुदृढ़ होगा तो राज्य सुदृढ़ होगा और देश मजबूत बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत दिनों नीति आयोग के बैठक के दौरान ही यह सुझाव दिया गया था कि प्रत्येक राज्य की आवश्यकताएं एवं प्राथमिकताएं अलग-अलग होती है। ऐसी परिस्थिति में राज्य की प्राथमिकताओं के अनुसार नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम खनिज सम्पदा से परिपूर्ण है। यहां की सम्पदा का लाभ अवश्य उठाया गया परन्तु यह दुखद है कि यहां के लोग आज भी लाल पानी पी रहे हैं। भारत सरकार के विभिन्न उपक्रमों के कारण यहां की नदियां प्रदूषित हो गई है। दामोदर एक्शन प्लान के तहत कार्य करते हुए नदी को प्रदूषणमुक्त करना आवश्यक है। सरकार, कॉरपोरेट जगत एवं पी0एस0यू0 सभी मिल कर राज्य का समृद्ध बनाएं। संसदीय कार्य मंत्री श्री सरयू राय ने कहा कि देवराय कमिटि द्वारा दिए गए रिपोर्ट को फिर से अध्ययन करने की आवश्यकता है ताकि आज के लिए जो प्रासंगिक सुझाव हैं उन्हें अपनाया जा सके। उसे लागू करने की सोच और प्रयास होने चाहिए। आज आवश्यकता आंतरिक आत्म आलोचना की भी है। परिसम्पत्तियों का सृजन आवश्यक है परन्तु उनकी गुणवत्ता का मूल्यांकन भी आवश्यक है। योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए साथ ही राज्य स्तर पर बनाई जा रही योजनाओं को सार्थक बनाने के उद्देश्य से विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। बैठक को सम्बोधित करते हुए विख्यात अर्थशास्त्री एवं नीति आयोग के सदस्य प्रो0 विवेक देवराय ने कहा कि झारखण्ड मात्र जमशेदपुर अथवा धनबाद नहीं है। राज्य के प्रत्येक भाग को समृद्ध होना आवश्यक है। खनिज सम्पदा के दृष्टिकोण से झारखण्ड बहुत समृद्ध है। यह निश्चित है कि यहां का विकास दर दस प्रतिशत अथवा इससे अधिक हो सकता है। आवश्यकता है एक सशक्त पहल की। विकास के लिए योजनाएं माईक्रो एवं मैक्रो स्तर पर अलग-अलग बनाने की आवश्यकता है। मैक्रो स्तर पर विकास आवश्यक है परन्तु माईक्रो लेबल पर विकास के प्रति प्रतिबद्धता होनी चाहिए। विकास के क्रम में शहरीकरण स्वाभाविक है। यह शहरीकरण योजनाबद्ध तरीके से किए जाने चाहिए। इस हेतु भू-अर्जन की प्रक्रिया भी निश्चित है। आज आमजनों के स्किल अपग्रेडेशन की नितांत आवश्यकता है। नागरिकों को बेहतर सेवा प्रदान करने  हेतु सरकार को सिटिजन फ्रेंडली होना होगा। उन्होंने कहा कि  राज्य के विकास हेतु चार साल पूर्व अनेक सुझाव दिए गए थे जिन में से कुछ आज की परिस्थिति के अनुकूल नहीं है परन्तु अधिकांशत आज भी लागू किए जा सकते हैं। सुझावों में संस्थागत रिफॉर्म केन्द्र एवं राज्य सम्बंध, सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु अनेक सुझाव दिए गए थे। आज राज्य में अधिकांश लोगों को आधार उपलब्ध किया जा चुका है, प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खाते खुल चुके हैं, डी0बी0टी0 आरम्भ है इस परिस्थिति में बहुत कुछ सकारात्मक बदलाव हो चुका है। आधारभूत संरचनाओं के रूप में सड़क, बिजली, पानी तथा सामाजिक विकास के तहत विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाएं इत्यादि का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्य संस्कृति में बदलाव भी आवश्यक है। अधिकतर पाया जाता है कि अधिकतम काम वित्तीय वर्ष की समाप्ति के करीब अर्थात मार्च के महीने में की जाती है, यह पूरे वर्ष भी किए जाएं यह सम्भव है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक जिले की आवश्यकता को चिन्हित करते हुए योजनाएं बनानी चाहिए। इसके अतिरिक्त ई0-गर्वनेंस को अधिक से अधिक लागू करने की आवश्यकता है। ई0-गर्वनेंस के माध्यम से संचिकाओं के ट्रेकिंग में सुविधा होगी साथ ही संचिकाओं को कम स्तरों से गुजरना होगा। सरकार को जनता तक पहुंचनी होगी, इसके लिए सिटिजंस चार्टर, पब्लिक इर्न्फोमिंग सिस्टम स्थापित करने की आवश्यकता है। सूचनाएं हर आम व्यक्ति के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। मुख्य सचिव श्री राजीव गौबा ने कहा कि झारखण्ड खनिज सम्पदा से परिपूर्ण राज्य है तथा इस राज्य की महत्ता ब्रिटिश समय से भी रहा है लेकिन गुडगर्वनेंस के कमी के कारण राज्य का विकास आसानुरूप नहीं हो पाया। श्री देवराय के द्वारा सुझाए गए अधिकतर सुझावों पर सरकार ने सकारात्मक पहल किया है जिसका प्रतिफल अब आने वाले दिनों में होने लगेगा। मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री के निदेश के आलोक में वित्तीय शक्तियों का विकेंन्द्रीकरण किया गया है साथ ही सचिवों/पदाधिकारियों को योजनाओं को ससमय लागू करने के लिए उत्तरदायी बनाया गया है।  उन्होंने कहा कि संस्थाएं एवं योजनाएं दोनों ही महत्वपूर्ण है। राज्य के विकास के दृष्टिीकोण से प्रशासनिक सुधार की कार्रवाई की जा रही है। यह राज्य में निवेशकों द्वारा निवेश के लिए उचित माहौल बनाएगा जो झारखण्ड के आर्थिक विकास में सहयोगी होगा। बैठक में मंत्रीगण श्री रामचन्द्र चन्द्रवंशी, श्रीमती नीरा यादव, श्रीमती लुईस मरांडी, श्री रणधीर सिंह, श्री अमर कुमार बाउरी, विकास आयुक्त श्री आर0एस0 पोद्दार सहित सभी विभागों के प्रधान सचिव/सचिव उपस्थित थे।

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