इंडियन एयरफोर्स फ्रांस से खरीदे जाने वाले राफेल लड़ाकू विमान को अंबाला वायुसेना स्टेशन पर तैनात करेगा। इसके लिए तमाम तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। राफेल को कारगिल युद्ध में उम्दा प्रदर्शन करने वाले 17 नंबर स्क्वाड्रन में रखा जाएगा।
इस प्रक्रिया की शुरुआत वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने मंगलवार को कर दी। वह इसी उद्देश्य से अंबाला पहुंचे थे। बीएस धनोआ के अंबाला दौरे को राफेल विमान के देश में आने पर रिसीव करने की तैयारी माना जा रहा है। उम्मीद है कि अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में अंबाला में राफेल आ जाएगा।
अब अंबाला में राफेल की स्क्वाड्रन को गोल्डन ऐरो के नाम से जाना जाएगा। गौरतलब है कि 17 नंबर स्क्वाड्रन में पहले मिग 21 (टाइप-96) फाइटर जेट था जो कि बठिंडा में तैनात था। अब इस स्क्वाड्रन के सभी मिग 21 रिटायर हो चुके हैं इसलिए इस स्क्वाड्रन में अब राफेल को शामिल किया जा रहा है।

हालांकि, फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों की पहले खेप अक्टूबर के पहले हफ्ते में आएगी। जानकारी के मुताबिक स्क्वाड्रन की स्थापना 1951 में की गई थी और शुरुआत में इसने हैविलैंड वैंपायर एफ एमके 52 लड़ाकू विमानों की उड़ानों को संचालित किया था।

इसी महीने होना है वायुसेना चीफ को रिटायर्ड
बता दें कि वायुसेना चीफ बीएस धनोआ इसी महीने के आखिर में रिटायर होने वाले हैं। अपनी रिटायरमेंट से पहले वह रूटिन चेकिंग पर अंबाला एयरफोर्स स्टेशन भी पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने राफेल के बारे में तमाम जानकारी भी ली और जरूरी निर्देश दिए। हालांकि उनकी रिटायरमेंट के बाद ही अब राफेल वायुसेना में शामिल हो पाएगा।

भारत को फ्रांस से जो राफेल लड़ाकू विमान मिलने वाला है वो 4.5 जेनरेशन मीडियम मल्टीरोल एयरक्राफ्ट है। मल्टीरोल होने के कारण दो इंजन वाला (टूइन) राफेल फाइटर जेट हवा में अपनी बादशाहत कायम करने के साथ-साथ दुश्मन देशों की सीमा में घुसकर हमला करने में भी सक्षम है। PLC.