Monday, August 3rd, 2020

पर भी नहीं सुधरी जम्मू-कश्मीर की स्थिति

मुंबई
शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि नोटबंदी करने, अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने से जम्मू कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। भाजपा की पूर्व सहयोगी ने इस बात पर आश्चर्य जाहिर किया कि जब केंद्र में 'मजबूत' सरकार है तो नवगठित केंद्रशासित प्रदेश में शांति क्यों नहीं है? शिवसेना ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस है।
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में कहा, 'सड़कों पर हर रोज खून बह रहा है और निर्दोष लोगों की जान जा रही है। नोटबंदी के बावजूद आतंकी गतिविधियों और फर्जी नोटों के चलन से कोई राहत नहीं है।' जम्मू कश्मीर के सोपोर में हाल में हुई मुठभेड़ का संदर्भ देते हुए इसने कहा कि तीन वर्षीय एक बच्चे के अपने दादा के शव पर बैठे होने की तस्वीरें हृदय-विदारक हैं। यह मुठभेड़ तब हुई थी जब आतंकवादियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक टीम पर हमला कर दिया जिसमें एक जवान शहीद हो गया और एक बुजुर्ग आम नागरिक की मौत हो गई। इस बुजुर्ग के साथ उनका तीन वर्षीय पोता भी था जिसे बाद में सुरक्षाबलों ने गोलीबारी के बीच सुरक्षित निकाल लिया।
केंद्र की विफलता बताती है तस्वीर
संपादकीय में कहा गया, 'छोटा बच्चा भागा नहीं, बल्कि अपने दादा को जगाने की कोशिश कर रहा था। कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने अपने ट्विटर हैंडल पर तस्वीर ट्वीट की। इन मंत्रियों को समझना चाहिए कि यह तस्वीर केंद्र सरकार की विफलता साबित कर सकती है। आखिर घाटी में स्थिति की जिम्मेदारी सरकार की है।'संपादकीय में कहा गया है कि एक बच्चा यह नहीं जानता कि उसके दादा की मौत हो गई है और वह उसे जगाने की कोशिश करता है। इस तरह की तस्वीरें केवल सीरिया, मिस्र, सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे देशों में सामने आई हैं।
केंद्र सरकार की छवि को हुआ है नुकसान
शिवसेना ने कहा कि इस तस्वीर से देश और केंद्र सरकार की छवि को भी नुकसान हुआ है। संपादकीय में पूछा गया कि जवानों ने बच्चे को बचा लिया, लेकिन उसका भविष्य क्या है? क्या सरकार के पास कोई उत्तर है? शिवसेना ने कहा, 'पिछले छह महीनों में कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं। भले ही हमारे जवानों ने अनेक आतंकवादियों का सफाया किया है, लेकिन शहीद सैनिकों की संख्या भी कम नहीं है। PLC.

 
 

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