Friday, July 10th, 2020

पर्वतीय क्षेत्र आज बड़े पैमाने पर जैविक बीजों की खेती कर रहा है जिसका लाभ देश को ही नहीं विदेशों तक को मिल रहा है : रावत

हरीश रावत आई एन वी सी न्यूज़आई एन वी सी न्यूज़ देहरादून, नई दिल्ली में कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कृषि व पशु अनुसन्धान परिषद् (आईसीएआर) की 87वीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जैविक खेती में जैविक दवाइयों का प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि जैविक खेती को और बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ो के लिए अभी भी जैविक दवाइयों की नितांत कमी है इस ओर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् को ध्यान देते हुए इस क्षेत्र में और अनुसन्धान की जरुरत है। नई दिल्ली के ए0पी0शिंदे सभागार, कृषिविज्ञान परिसर, पूसा में कृषि व पशु अनुसन्धान परिषद् (आईसीएआर) की बैठक को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत ने कृषि और पशु महाविद्यालय की जमीन के मानकों में शिथिलता बरतने का अनुरोध करते हुए कहा कि मैदानी क्षेत्रों में 60 एकड़ के मानक सही हो सकते हैं, किंतु जिस प्रदेश में 13 में से नौ जनपद पूर्ण पर्वतीय क्षेत्र व दो जनपद अर्ध पर्वतीय क्षेत्र में आते हों और जहाँ कृषि क्षेत्र सीढ़ीनुमा आकर का हो वहां 60 एकड़ जमीन एकत्र करना बहुत मुश्किल काम है, अतः पर्वतीय राज्यों में इस तरह के मानकों में शिथलता बरती जानी चाहिए। उन्होने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र आज बड़े पैमाने पर जैविक बीजों की खेती कर रहा है जिसका लाभ देश को ही नहीं विदेशों तक को मिल रहा है। भारत सरकार को भी जैविक और परंपरागत बीजो में अनुसन्धान कर उसकी आधुनिक प्रजातियाँ विकसित करनी होंगी और इसको प्रोत्साहन भी देना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री और कृषि व पशु अनुसन्धान परिषद् (आईसीएआर) के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश के पर्वतीय राज्यों खासकर उत्तराखंड व सिक्किम का जैविक खेती में बहुत बड़ा योगदान है और केंद्र सरकार इस तरह की खेती को बढ़ावा देने वाले राज्यों का हर संभव सहयोग करेगी। कार्यक्रम में कृषि राज्यमंत्री मोहन भाई कुण्डलिया, कृषि व पशु अनुसन्धान परिषद् (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एस अय्यपन सहित देश विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक एवं कृषि अधिकारी उपस्थित थे।

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