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Wednesday, December 2nd, 2020

परमात्मा की जानकारी से इन्सान के कर्मों में स्वयंमेव बदलाव : राजवन्त कौर

Rajwant kaurइंद्रा राय, आई एन वी सी, चण्डीगढ, आज यहां सैक्टर 3०-एे में स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में महिलाओं के एक विशाल निरंकारी सन्त समागम का आयोजन किया गया जिसमें चण्डीगढ़  से सैं≠ड़ो महिलाआें ने भाग लिया । इस समागम की अध्यक्षता शिमला से आए श्रीमति राजवन्त कौर जी जोनल इन्र्चाज ने की । इस अवसर पर श्रीमति कौर ने कहा कि सुख शांति पदार्थों में नहीं प्रभु परमात्मा के साथ जुडऩे मे है जिस प्रकार रोशनी होने से अन्धेरा स्वयंमेव दूर हो जाता है उसी प्रकार परमात्मा की जानकारी के बाद जब इन्सान के मन में उजाला होता है तो उसके विचार उसके कर्म स्वयंमेव ही बदल जाते हैं । इन्सान के अन्दर हर एक के प्रति प्यार की भावना  उत्पन्न होती है । उसे यह ज्ञान हो जाता है कि कोई भी पराया नहीं सभी अपने हैं और सभी को अपना समझ कर उनसे अच्छा व्यवहार करता है ।  समाज में नारी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए श्रीमति कौर ने कहा कि नारी से परिवार बनता है और परिवार से समाज बनता है । समाज की पहली इकाई व्यक्ति है और दूसरी इकाई परिवार है । नारी ही समाज सुधार में मील  पत्थर होती है । यदि नारी को निरंकारी बाबा जी द्वारा दिए जा रहे ब्रहमज्ञान की जानकारी होगी तो वह स्वयं के साथ साथ समाज का सुधार भी कर सकती है ।  उन्होंने आगे फरमाया कि निरंकारी मिशन अध्यात्मिक विचार धारा का नाम है। प्रभु परमात्मा का बोध ही मानव जीवन का लक्ष्य है। परमात्मा को पाने के लिए सत्गुरु की जरूरत हमेशा से रही है। जैसा कि धर्मग्रंथों में भी वर्णित है कि इस निरंकार की जानकारी कर्मकांडों के द्वारा नहीं बल्कि सत्गुरु की शरण में जाने से ही प्राप्त होती है। इसलिए हमे जागृत होकर वक्त के पैंगंबर से इस ‘ब्रह्म’ का ज्ञान अवश्य ही समय रहते प्राप्त करना चाहिए। निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की शिक्षाओं का वर्णन करते हुए कहा कि इस प्रभु परमात्मा के अतिरिक्त जगत मे व्याप्त हर पदार्थ मिथ्या है। परमात्मा ही सारी सृष्टि का आधार व कर्ता है। भक्ति का सही आनंद ब्रह्मज्ञान क ी प्राप्ती के  बाद ही संभव है। बिना भक्ति के जीव सुखी नहीं हो सकता। भौतिकवाद ने हमारे जीवन को सुखमयी बनाने की बजाये तनावयुक्त बना दिया है। आज सब सुख शांति को पदार्थों  में ढूंढ रहे हैं, जबकि सुख प्रभु परमात्मा के साथ जुडऩे में है। इस से पूर्व परमपूज्य बहन बलदेव कौर  जी ने चंडीगढ़ की साधसंगत की ओर से उनके गले में दुपट्टा डाल कर उनका स्वागत किया।

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