नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने डिप्टी कमिश्नर फाजिल्का, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड तथा पंजाब सरकार के स्थानीय निकाय विभाग को निर्देश दिए हैं कि जिले के प्रदूषित पेयजल के बारे में 25 अगस्त तक तथ्यात्मक और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यह निर्देश फाजिल्का के प्रगतिशील किसान विक्रम आहूजा की ओर से दायर याचिका पर दिया है।
एनजीटी में दायर याचिका पर न्यायाधिकरण के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल, न्यायमूर्ति एसपी वांगड़ी और न्यायमूर्ति के रामकृष्णन ने सुनवाई की। याचिका में आहूजा ने कहा कि पंजाब के कई हिस्सों से निकलते 21 सेम नालों का प्रदूषित पानी फाजिल्का जिले से होकर बहता है। 


इससे जिले के 132 गांव प्रभावित हो रहे हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले के कई गांवों से पानी के नमूने लिए। उनकी रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पानी  सिंचाई के योग्य भी नहीं है। पंजाब कृषि विभाग ने भी रिपोर्टों में कहा था कि पानी में भारी धातुओं और प्रदूषकों का घोल बहुत अधिक है। 
पाक ने अपने क्षेत्र में दूषित पानी का प्रवाह रोका
आहूजा ने यह भी स्पष्ट किया कि दूषित होने के कारण पाकिस्तान ने इस पानी के प्रवाह को अपने क्षेत्र में रोक दिया है। इससे यह पानी यहीं पर भूमिगत होकर मानव जीवन के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। अत्यधिक दूषित पानी के कारण महिलाओं में गर्भपात और बच्चों में दिव्यांगता एक आम समस्या बन गई है। PLC.