Friday, July 3rd, 2020

पंकज त्रिवेदी की कविता - हाँ, मैं परेशान हो जाता हूँ

हाँ, मैं परेशान हो जाता हूँ आजकल बहुत परेशान भी हूँ कभी आपको मेरी परेशानी पे गुस्सा आता कभी उनको गुस्सा आता है मगर मैं हूँ ऐसा क्या करूँ, गुनाहगार हूँ तो हूँ आपकी नज़रों में कोई मेरी निराशा को देखें, कोई देखें दुःख को मगर सारे दर्दों का कारण हैं मेरी संवेदना और अन्य के प्रति मेरा असीम स्नेह मैं हर बार नया गुनाह करता हूँ क्यूंकि बहुत चाहने लगता हूँ अपने आसपास के लोगों को अपना मान लेता हूँ यही कुसूर है मेरा उनके दुःख से मैं दू:खी होऊं या निराश संवेदनशील हूँ, भावुक हूँ ... इतने सारे अवगुणों के बाद मुझे कभी अपने आप पर न गुस्सा आया, न निराशा क्यूंकि यह सबकुछ होते हुए भी मैं दशा से दुर्दशा देखता हुआ नई दिशा में चलने लगता हूँ... उन्हीं लोगों के दुःख-दर्द की गठरी लिए... चलते हुए कभी गाड़ देता हूँ तो कभी बहते जल में पवित्र होने के लिए बहा दूं ऐसे ही मैं चलता रहता हूँ ...

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Yeah , I get upset Nowadays I am very worried Sometimes you get angry at my problem Never get angry , but I like them What to do, then I am guilty in your eyes Have a look at my dismay , see no sorrow But the cause of all the pains and my condolences My boundless affection towards other Because every time I do a new crime I really loved the people around them I admit this is my fault? I let her sorrow, sad or frustrated assure I'm sensitive , I'm passionate ... Ever since I have so many imperfections Do not upset yourself , do not despair Notwithstanding all this because I Sees the plight of the state in a new direction I am sad to think the same people running ... - pain Bury the 'll never walk the bundle ... Never shedding shall be holy to flow I 'm just keeps going ... --------------------------------

परिचय व् संपर्क 

 PANKAJ TRIVEDI

पंकज त्रिवेदी

पत्रकारिता-  बी.ऐ. (हिन्दी साहित्य), बी.एड. और एडवांस प्रोग्राम इन जर्नलिज्म एंड मॉस कम्यूनिकेशन (हिन्दी) –भोपाल से

साहित्य क्षेत्र-

संपादक : विश्वगाथा (त्रैमासिक मुद्रित पत्रिका) लेखन- कविता, कहानी, लघुकथा, निबंध, रेखाचित्र, उपन्यास । पत्रकारिता- राजस्थान पत्रिका । अभिरुचि- पठन, फोटोग्राफी, प्रवास, साहित्यिक-शिखा और सामाजिक कार्य । प्रकाशित पुस्तकों की सूचि - 1982- संप्राप्तकथा (लघुकथा-संपादन)-गुजराती 1996- भीष्म साहनी श्रेष्ठ वार्ताओं का- हिंदी से गुजराती अनुवाद 1998- अगनपथ (लघुउपन्यास)-हिंदी 1998- आगिया (रेखाचित्र संग्रह)-गुजराती 2002- दस्तख़त (सूक्तियाँ)-गुजराती 2004- माछलीघरमां मानवी (कहानी संग्रह)-गुजराती 2005- झाकळना बूँद (ओस के बूँद) (लघुकथा संपादन)-गुजराती 2007- अगनपथ (हिंदी लघुउपन्यास) हिंदी से गुजराती अनुवाद 2007- सामीप्य (स्वातंत्र्य सेना के लिए आज़ादी की लड़ाई में सूचना देनेवाली उषा मेहता, अमेरिकन साहित्यकार नोर्मन मेईलर और हिन्दी साहित्यकार भीष्म साहनी  की मुलाक़ातों पर आधारित संग्रह) तथा मर्मवेध (निबंध संग्रह) - आदि रचनाएँ गुजराती में। 2008- मर्मवेध  (निबंध संग्रह)-गुजराती 2010-  झरोखा   (निबंध संग्रह)-हिन्दी 2014-  हाँ ! तुम जरूर आओगी (कविता संग्रह) प्रसारण- आकाशावाणी में 1982 से निरंतर कहानियों का प्रसारण । दस्तावेजी फिल्म : 1994 गुजराती के जानेमाने कविश्री मीनपियासी के जीवन-कवन पर फ़िल्माई गई दस्तावेज़ी फ़िल्म का लेखन। निर्माण- दूरदर्शन केंद्र- राजकोट प्रसारण- राजकोट, अहमदाबाद और दिल्ली दूरदर्शन से कई बार प्रसारण। स्तम्भ - लेखन- टाइम्स ऑफ इंडिया (गुजराती), जयहिंद, जनसत्ता, गुजरात टुडे, गुजरातमित्र, फूलछाब (दैनिक)- राजकोटः मर्मवेध (चिंतनात्मक निबंध), गुजरातमित्र (दैनिक)-सूरतः गुजरातमित्र (माछलीघर -कहानियाँ) सम्मान – (१) हिन्दी निबंध संग्रह – झरोखा को हिन्दी साहित्य अकादमी के द्वारा 2010 का पुरस्कार (२) सहस्राब्दी विश्व हिंदी सम्मेलन में तत्कालीन विज्ञान-टेक्नोलॉजी मंत्री श्री बच्ची सिंह राऊत के द्वारा सम्मान। सलाहकार- बाल श्रम उन्मूलन समिति, जिला-सुरेन्द्रनगर,गुजरात संपर्क- पंकज त्रिवेदी "ॐ",  गोकुलपार्क सोसायटी, 80 फ़ीट रोड, सुरेन्द्र नगर, गुजरात - 363002 मोबाईल :  096625-14007 vishwagatha@gmail.com

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