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Thursday, November 26th, 2020

न्यायाधीशों के पदों की संख्या भी बढ़ाई जावें : राजेन्द्र राठौड़

rajendra-rathore-INVC-NEWSआई एन वी सी न्यूज़ दिल्ली , नई दिल्ली के विज्ञान भवन में रविवार को आयोजित राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में विधि एवं चिकित्सा मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने आग्रह करते हुए कहा कि राजस्थान में लंबित मुकदमों की संख्या को देखते हुए न केवल      20 न्यायाधीशों के रिक्त पदों की पूर्ति शीघ्र आवश्यक है वरन् 50 स्वीकृत न्यायाधीशों के पदों को बढ़ाये जाने की भी अति आवश्यकता है।      श्री राठौड़ ने राजस्थान के लिए चौदहवें वित्त आयोग द्वारा आवंटित फास्टट्रेक न्यायालयाें की स्थापना के लिए 214.11 करोड़ रुपये की राशि को जल्द जारी करने का आग्रह भी किया ताकि राज्य में मुकदमों की निरन्तर बढ़ती हुई संख्या के अनुसार न्यायालयों की आधारभूत संरचना का विकास किया जा सकें।      सम्मेलन में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री अजय रस्तोगी ने भी शिरकत की। राज्य में न्यायालयों के रिकार्ड का डिजिटाइजेशन एवं आधारभूत संरचना का विकास      श्री राठौड़ ने राज्य में न्यायापालिका के सुदृढ़ीकरण के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के मध्यनजर राज्य सरकार द्वारा न्यायालयों में भी रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन हेतु 182.87 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में ई-कोर्ट मिशन मोड फेज-प्प् के अन्तर्गत 9.97 करोड़ रुपये की राशि केन्द्र प्रवर्तित योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट को दौगुना करते हुए न्यायालयों की आधारभूत संरचना के विकास हेतु 196 करोड़ 52 लाख रुपये का प्रावधान रखा है इसी तरह न्यायालय भवनों एवं न्यायिक अधिकारीगणों के आवास निर्माण कार्य पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में 72 करोड़ 68 लाख रुपये की राशि व्यय की गई है।      श्री राठौड़ ने कहा कि राजस्थान की सूर्यनगरी, जोधपुर में करीब 191.02 करोड़ रुपये की लागत से राजस्थान उच्च न्यायालय का अत्याधुनिक भवन निर्माणाधीन है जिसका निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण होने वाला है। साथ ही दूर दराज के इलाकों में सोलर सिस्टम द्वारा न्यायालयों के लिए विद्युत सुविधा मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।      उन्होंने कहा कि कानूनों के सरलीकरण की दिशा में कदम उठाते हुए राजस्थान सरकार द्वारा होकर वर्ष 2015 में राज्य से संबंधित 248 अनुपयोगी कानूनों को निरस्त किया गया है। राजस्थान में 35 वाणिज्यक न्यायालय खोलने का निर्णय एवं न्यायाधीशाें की नियुक्तियां      श्री राठौड़ ने कहा कि उच्च न्यायालय के परामर्श से 20 अप्रेल 2016 को 35 कॉमर्शियल न्यायालय खोलने का निर्णय लिया जा चुका है। इससे वाणिज्यक मामले की सुनाई में जल्दी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश के 20 पदों पर तथा सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट के 182 पदों पर नियुक्तियां प्रदान की गई।      उन्होंने कहा कि मुकदमों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए राज्य में पिछले 2 वर्षों में विभिन्न श्रेणी के 57 नये न्यायालय खोले जा चुके है। राज्य में बढ़ते मुकदमों के भार को कम करने के लिए 154 मध्यस्थ केन्द्र बनाए जा चुके है। श्री राठौड़ ने बताया कि न्यायालयों एवं केन्द्रीय व जिला काराग्रहों के बीच विडियों कॉन्फ्रेस की व्यवस्था स्थापित करने हेतु राज्य सरकार सैद्धांतिक सहमति दे चुकी है तथा जल्द ही आवश्यक बजट राशि प्रदान कर दी जावेगी।      श्री राठौड़ ने बताया कि जमीनी स्तर पर तक न्याय की पहुॅच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा ’28 वैकल्पिक वाद निस्तारण केन्द्र‘ स्थापित किये जा चुके है तथा 5 निर्माणधीन है। उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायत स्तर पर 10,986 विधि सेवा केन्द्र कार्यरत है जहां पर सप्ताह में एक दिन विधि वॉलेंटियर सेवाएं दे रहे है। प्रत्येक जिले में किशोर न्याय बोर्ड की स्थापना      श्री राठौड़ ने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में किशोर न्याय बोर्ड की स्थापना कर बालकों के पुर्नवास एवं दत्तक ग्रहण हेतु बाल कल्याण समितियों का गठन किया गया है। राजस्थान के उच्च न्यायालय के प्रस्तावानुसार राज्य में जयपुर द्वितीय, अलवर, भरतपुर, जोधपुर महानगर, कोटा व उदयपुर जिलों में स्टाफ सहित पूर्णकालिक किशोर न्याय बोर्ड की स्थापना का मामला विचाराधीन है। किशोर न्याय बोर्डों के प्रभावी संचालन हेतु भारत सरकार की केन्द्र प्रवर्तित योजना ’’समेकित बाल संरक्षण योजना‘‘ के तहत् निर्धारित सुविधाओं हेतु वित्तीय प्रावधान किये गये है।  सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सेवाएं लेने पर बनी सहमत      श्री राठौड़ ने बताया कि सम्मेलन के दौरान राजस्थान सहित सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सेवाएं लेने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है  जिसका राजस्थान की न्याय प्रणाली पर काफी सकारात्मक असर पडे़गा तथा लंबित मुकदमों के भार को कम करने में मदद मिलेगी।      सम्मेलन की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टी.एस. ठाकुर ने की।

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