Tuesday, October 22nd, 2019
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नोटबंदी : उपलब्धि या महाघोटाला ?

 - निर्मल रानी -             

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए पांच सौ व एक हज़ार रुपये के नोटों को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा की थी। तभी से देश बार-बार यह पूछ रहा है कि आिखर प्रधानमंत्री ने नोटबंदी किए जाने के जो कारण व लक्ष्य बताए थे क्या वह सभी या उनमें से कुछ पूरे हुए? निश्चित रूप से इनमें से न तो कोई लक्ष्य पूरा हुआ न ही इससे देश की अर्थव्यवस्था को कोई लाभ हुआ। अन्यथा 2019 के आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी नोटबंदी की उपलब्धियों को बढ़-चढ़ कर गिनाने से हरगिज़ न चूकती। बजाए इसके भाजपाई नेता चुनाव में नोटबंदी की बात करने से ही कतरा रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोडक़र रख देने वाली इस घोषणा से देश को कितना नुकसान पहुंचा है, यह कवायद कितनी फुज़ूल की कवायद थी, कितने लोग इस योजना के चलते बैंकों की कतारों में खड़े होकर मर गए कितनों के कारोबार बंद हुए और कितने लोग बेरोज़गार होकर अपने-अपने गांवों को वापस चले गए, यहां तक कि देश की अर्थव्यवस्था को कितना भारी धक्का लगा इन सब बातों का जवाब देने से आिखर भाजपा क्यों कतरा रही है?

प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के समय दिए गए अपने भाषण में कहा था कि इस फैसले से काले धन पर लगाम लगेगी। देश में जाली नोटों को समाप्त किया जा सकेगा, देश में व्याप्त भ्रष्टाचार में कमी आएगी। आतंकवाद व नक्सलवाद की कमर तोड़ी जा सकेगी तथा किसानों,व्यापारियों व श्रमिकों को इससे अनेक फायदे होंगे। क्या आज देश के लोगों को प्रधानमंत्री के नोटबंदी की घोषणा के समय किए गए उपरोक्त आंकलन के विषय में पूछने का कोई अधिकार नहीं है? और क्या यह नैतिकता का तकाज़ा नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनकी पार्टी स्वयं मतदाताओं से नोटबंदी के संबंध में हासिल की गई उपलब्धियों का बखान करे? यदि इस चुनाव में सत्तापक्ष द्वारा नोटबंदी पर चर्चा नहीं की जा रही है तो इसका सीधा सा अर्थ यही है कि नोटबंदी न केवल पूरी तरह असफल रही बल्कि इस घोषणा के चलते देश को होने वाले हर प्रकार के नुकसान के जि़म्मेदार प्रधानमंत्री स्वयं भी हैं तथा उनकी पार्टी व सत्ता के सभी सहयोगी दल इस नोटबंदी रूपी ‘आर्थिक प्रलय’ के जि़म्मेदार हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अगस्त 2018 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह घोषित कर दिया गया है कि प्रतिबंधित पांच सौ व एक हज़ार रुपये की नोटों का 99 प्रतिशत बैंकों के पास वापस लौट आया है। ऐसे में काले धन को समाप्त करने की प्रधानमंत्री की घोषणा संदेह के घेरे में आ गई है।

नोटबंदी के दौरान एक ओर जहां देश के एक अरब 20 करोड़ लोग लाईनों में लगकर भूखे-प्यासे तथा बीमारी की हालत में 2 हज़ार व 4 हज़ार रुपये बैंको से निकालने की खातिर या अपने पास मौजूद एक हज़ार या पांच सौ की नोटों को जमा करने के लिए कई-कई दिनों तक खड़े रहते थे वहीं सत्ता के संरक्षण में इसी नोटबंदी का भरपूर लाभ उठाया जा रहा था। यहां तक कि विपक्षी दलों ने नोटबंदी की योजना को भारतीय जनता पार्टी की ‘मनी लांड्रिंग स्कीम’ का नाम दिया था। उस दौरान कई ऐसे सहकारी बैंकों के नाम भी सामने आए जिन्होंने सारे नियमों व कानूनों को दरकिनार कर अपने चहेते नेताओं को भरपूर लाभ पहुंचाया। इनमें गुजरात का एक ऐसा सहकारी बैंक भी बताया गया जिसके अध्यक्ष स्वयं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हैं। और पिछले दिनों तो उस समय पूरे देश में एक बार फिर सनसनी फैल गई जबकि विपक्षी नेताओं ने संयुक्त रूप से दिल्ली में एक प्रेस कांफे्रेंस आयोजित कर एक ऐसी वीडियो जारी की जिसे देखने से साफ पता चल रहा था कि नोटबंदी का सारा खेल केवल भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को फायदा पहुंचाने तथा विपक्षी नेताओं की कमर तोडऩे के उद्देश्य से ही किया गया था। गत् दिनों सार्वजनिक किए गए एक वीडियो में स्पष्ट रूप से यह दिखाई दे रहा है कि किस प्रकार भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्ता चालीस प्रतिशत कमीशन लेकर सैकड़ों करोड़ रुपये के चलन से बाहर किए गए नोट बदलने की बात कह रहा है। और साथ ही वह यह भी कह रहा है कि उसके ऊपर पार्टी के सर्वोच्च नेताओं का हाथ है। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह दलाल रूपी भाजपाई कार्यकर्ता गुजरात में भाजपा कार्यालय से ही अपनी लेन-देन की बात शुरु करता है। वह यह भी बताता है कि वह दुबई में रियल एस्टेट का बिज़नेस कर रहा है। विपक्षी नेताओं ने इस वीडियो को जारी करने के बाद कहा कि-अब देश को यह फैसला करना है कि चोर कौन है, चौकीदार कौन है? देशभक्त कौन है और देशद्रोही कौन है? इसे आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनके सहयोगी नोटबंदी के बाद देश की जनता को बड़े ही मसखरे अंदाज़ में यह बताते रहे हैं कि किस प्रकार चंद विपक्षी नेताओं को नोटबंदी से तकलीफ पहुंची है जबकि उनके अनुसार देश में नोटबंदी से और कोई दु:खी नहीं है। यदि वास्तव में ऐसा है तो आज वही भाजपाई नेता इन्हीं देशवासियों से नोटबंदी के फायदे क्यों नहीं बताते? क्या वजह है कि भाजपा के चुनावी एजेंडों में राष्ट्रवाद,देशभक्ति,पाकिस्तान व धर्म,संप्रदाय जैसी बातें तो शामिल हैं परंतु नोटबंदी जैसे तथाकथित ‘यज्ञ’ का कोई जि़क्र ही नहीं? इस विषय पर भाजपा की खामोशी स्वयं इस बात का सुबूत है कि नोटबंदी की योजना पूरी तरह फेल रही है व देश की अर्थव्यवस्था को इस योजना से ज़ोरदार धक्का लगा है। इसके चलते जहां अनेक व्यवसाय ठप्प हुए, अनेक परिवारों की जि़ंदगी तबाह हुई वहीं लाखों लोगों को रोटी का भी अकाल पड़ गया था। देश के करोड़ों लोग इस बचकाने अपरिपक्व तथा राष्ट्र का अहित करने वाले फैसले से प्रभावित हुए।

प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा के समय ऐसा वातावरण तैयार करने की कोशिश की थी जिससे देश के मध्यम व निम्र मध्यम वर्ग के लोगों को ऐसा महसूस हो कि प्रधानमंत्री ने अमीरों के खज़ाने पर हाथ डालकर गरीबों के लिए कोई बड़ा कल्याणकारी कदम उठाया है। परंतु इसके ठीक विपरीत गरीब लोग ही कतारों में मारे गए, गरीबों की ही बहन-बेटियों की शादियां पैसों के चलते नहीं हो सकीं। हज़ारों लोग पैसे के अभाव में दवा-इलाज न हो पाने के चलते इस संसार कोअलविदा कह गए। कभी भी देश के किसी भी बैंक में किसी भी अरबपति या करोड़पति को बैंकों की कतारों में खड़ा नहीं देखा गया। और जब जनता की ओर से कतारों में खड़े होने की तकलीफ का इज़हार किया गया तो सरकारी चमचों व एजेंटों द्वारा उन्हें सीमा पर 24 घंटे खड़े होकर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का वास्ता देते हुए सांत्वना देने की कोशिश की गई।

निश्चित रूप से देश की जनता उन सभी दु:ख-तकलीफों व कुर्बानियों को सहन कर लेती यदि नोटबंदी के चलते देश की अर्थव्यवस्था में कुछ बढ़ोतरी हुई होती। बेरोज़गारों को इस योजना के लाभ स्वरूप कुछ रोज़गार मिले होते। कश्मीरी आतंकवाद व नक्सलवाद पर लगाम लग गई होती परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। केवल भाजपा नेताओं के पास पैसों की बढ़ोतरी होती देखी जा रही है। देश में सैकड़ों आलीशान भाजपा कार्यालय बन चुके हैं और स्टिंग आप्रेशन्स के माध्यम से अब यह भी पता लगने लगा है कि नोटबंदी रूपी इस महाघोटाले की कमाई से दुबई जैसे देशों में रियल एस्टेट का कारोबार भी इन्हीं तथाकथित राष्ट्रवादियों व राष्ट्रभक्तों द्वारा किया जा रहा है। 2019 के चुनाव मतदाताओं को ज़रूर सवाल करना चाहिए कि नोटबंदी आिखर एक उपलब्धि थी या अब तक की किसी भी सरकार का सबसे बड़ा  महाघोटाला?

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परिचय –:
निर्मल रानी
लेखिका व्  सामाजिक चिन्तिका
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर निर्मल रानी गत 15 वर्षों से देश के विभिन्न समाचारपत्रों, पत्रिकाओं व न्यूज़ वेबसाइट्स में सक्रिय रूप से स्तंभकार के रूप में लेखन कर रही हैं !
संपर्क -: Nirmal Rani  :Jaf Cottage – 1885/2, Ranjit Nagar, Ambala City(Haryana)  Pin. 4003 E-mail : nirmalrani@gmail.com –  phone : 09729229728
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