Thursday, November 21st, 2019
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नेशनल मे‍डिकल कमीशन बि‍ल को राज्‍यसभा में मंजूरी



नई दिल्ली: देश में डॉक्‍टरों के विरोध के बीच राज्‍यसभा ने गुरुवार को ‘राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक-2019' (National Medical Commission Bill 2019) को मंजूर दे दी. इससे पहले सोमवार को इस बिल को लोकसभा से भी मंजूरी मिल चुकी है. हालांकि इसके विरोध में देश में कई जगह पर डॉक्‍टर एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर हैं. इधर बिल में कुछ संशोधन हैं, इसलिए ये बिल एक बार फ‍िर से लोकसभा में भेजा जाएगा.

इस विधेयक के तहत Medical Council of India को समाप्त कर, उसके स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) का गठन किया जाएगा. मेडिकल शिक्षा को विश्व स्तरीय बनाने के मकसद से सरकार ये बिल लेकर आई है.

वैसे ये बिल सबसे पहले दिसंबर 2017 में पेश किया गया था, जिसके बाद 2018 में भी केंद्र सरकार इस बिल को लेकर आई. लेकिन विपक्ष और देशभर के डॉक्टरों के विरोध को देखते हुए इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया था. अब केंद्र सरकार दोबारा इस बिल को लेकर आई है.


इस बिल को लाने के पीछे सरकार का मकसद है देश में मेडिकल एडुकेशन व्यवस्था को दुरुस्त और पारदर्शी बनाना. इस विधेयक का मकसद है कि देश में एक ऐसी चिकित्सा शिक्षा (medical education) की ऐसी प्रणाली बनाई जाए जो विश्व स्तर की हो.

प्रस्तावित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि चिकित्सा शिक्षा के Undergraduate और Postgraduate दोनों स्तरों पर उच्च कोटि के डॉक्टर मुहैया कराया जाए. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) चिकित्सा प्रोफेशनल्‍स को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगा कि वे अपने क्षेत्र के नवीनतम medical रिसर्च को अपने काम में सम्मिलित करें और ऐसे रिसर्च में अपना योगदान करें. आयोग समय-समय पर सभी चिकित्सा संस्थानों का मूल्यांकन भी करेगा.

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) भारत के लिए एक मेडिकल रजिस्टर के रख-रखाव की सुविधा प्रदान करेगा और मेडिकल सेवा के सभी पहलुओं में नैतिक मानदंड को लागू करवाएगा. केंद्र सरकार एक एडवाइजरी काउंसिल बनाएगी जो मेडिकल शिक्षा और ट्रेनिंग के बारे में राज्यों को अपनी समस्याएं और सुझाव रखने का मौका देगी. ये काउंसिल मेडिकल कमीशन को सुझाव देगी कि मेडिकल शिक्षा को कैसे सुलभ बनाया जाए.


इस कानून के आते ही पूरे भारत के मेडिकल संस्थानों में दाख़िले के लिए सिर्फ एक परीक्षा ली जाएगी. इस परीक्षा का नाम NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) रखा गया है. यानि भारत में अबतक मेडिकल शिक्षा, मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) की ज़िम्मेदारी थी.

अब विधेयक पारित होने के बाद मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया खत्म हो जाएगी और उसकी जगह लेगा नेशनल मेडिकल कमीशन। और अब बिल के पास होने के बाद देश में मेडिकल शिक्षा और मेडिकल सेवाओं से संबंधित सभी नीतियां बनाने की कमान इस कमीशन के हाथ में होगा. PLC.

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