Saturday, April 4th, 2020

निर्भया केस : दरिंदे मुकेश की फांसी पर सुप्रीम मुहर

निर्भया के एक गुनहगार मुकेश सिंह की फांसी की सजा से बचने की आखिरी चाल भी ध्वस्त हो गई। दया याचिका ठुकराने के राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देने वाली मुकेश की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के फैसले को सही ठहराया।जस्टिस आर भानुमति की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ पीठ ने कहा, राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका पर जल्द विचार करने और इसे फौरन नामंजूर करने का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया या फिर यह पूर्वाग्रह से प्रेरित था।

पीठ ने 25 पन्नों के अपने फैसले में कहा, दया याचिका पर विचार से पहले दोषियों के पिछले आपराधिक इतिहास, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों समेत सभी दस्तावेज राष्ट्रपति के समक्ष विचार के लिए लाए गए थे।

वहीं, अब एक और दोषी अक्षय ठाकुर ने एक फरवरी को तय की गई फांसी की तारीख से तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में सुधारात्मक याचिका दी है, जिस पर पांच जजों की पीठ बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी।

इससे पहले मुकेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने अपने 25 पन्नों के फैसले में कहा, गृह मंत्रालय ने 15 जनवरी को दिल्ली सरकार की ओर से सील बंद लिफाफे में मिले सभी दस्तावेज दया याचिका के साथ राष्ट्रपति के सामने विचार के लिए रखे थे।

इसमें निचली अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी शामिल थे। जेल में कथित तौर पर यातना दिया जाना संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत पारित किए गए कार्यकारी फैसलों की न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं हो सकता है।

इस अनुच्छेद के तहत कुछ मामलों में राष्ट्रपति को क्षमा करने और सजा को लंबित रखने, छूट देने या फिर इसे कम करने की शक्ति प्राप्त है। नतीजतन हमें मुकेश की दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के फैसले की न्यायिक समीक्षा का कोई आधार नहीं मिला। यह याचिका खारिज किए जाने लायक है।

एकांत कारावास की दलील भी ठुकराई

पीठ ने मुकेश के वकील की इस दलील को भी मानने से इनकार कर दिया कि उसे आठ माह से ज्यादा समय तक कथित तौर पर एकांत कारावास में रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने जेल महानिदेशक के उस हलफनामे का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि सुरक्षा कारणों से मुकेश को सलाखों के पीछे एक अलग, मगर हवादार कमरे में रखा गया है। इसे एकांत कारावास नहीं माना जा सकता है।

यह भी दया याचिका खारिज किए जाने की समीक्षा करने का आधार नहीं हो सकता है। पीठ ने सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता की उस दलील से सहमति जताई, जिसमें मेहता ने कहा था कि दया याचिका लंबित किए जाने की न्यायिक समीक्षा का आधार तो हो सकता है, मगर जल्द निपटाया जाना आधार नहीं हो सकता है।

किस दोषी के पास अब क्या विकल्प

मुकेश सिंह: अब कोई विकल्प नहीं
पवन गुप्ता: सुधारात्मक और दया याचिका दोनों विकल्प बाकी
अक्षय ठाकुर: सुधारात्मक याचिका लंबित, दया याचिका अभी बाकी
विनय शर्मा: सुधारात्मक याचिका खारिज, दया याचिका अभी बाकी

अक्षय की याचिका में बेतुकी दलीलें

वहीं, अक्षय की सुधारात्मक याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर जन दबाव और जनता की राय के चलते अदालतें सभी समस्याओं के समाधान के रूप में फांसी की सजा सुना रही हैं। अक्षय ने अपनी याचिका में दावा किया है कि दुष्कर्म एवं हत्या के करीब 17 मामलों में शीर्ष न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने मौत की सजा में बदलाव कर उसे कम किया है।

ऐसे ही एक मामले में एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में मौत की सजा को इस कोर्ट ने एक पुनर्विचार फैसले में घटा कर 20 साल के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया। यह इस आधार पर किया गया कि दोषी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी और उसके सुधार की अब भी गुंजाइश है।

याचिका में जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि समिति ने दुष्कर्म एवं हत्या के अपराधों के लिए मौत की सजा के खिलाफ पैरोकारी की है।

दोषी जल्द से जल्द फांसी पर लटकें: निर्भया की मां
निर्भया की मां ने कहा, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करती हूं और चाहती हूं कि सभी दोषी जल्द से जल्द फांसी पर लटके। मैं पिछले सात सालों से कानून पर भरोसा बनाए रखी हूं और अब भी कायम है। हम एक कदम और आगे बढ़ गए। फैसले के करीब बढ़ गए। उम्मीद है कि इनको अब जल्द ही 1 फरवरी को फांसी लग जाएगी। वे लोग तब तक कानूनी खेल खेलेंगे, जब तक फांसी नहीं हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि मुझे जल्द से जल्द न्याय मिले।

फांसी की सजा से ठीक दो दिन पहले विनय ने भी दी दया याचिका

निर्भया मामले के दोषी मुकेश सिंह के बाद अब एक और गुनहगार विनय शर्मा ने भी फांसी की सजा की तय तारीख एक फरवरी से दो दिन पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दया याचिका भेजी है। दोषी के वकील एपी सिंह ने बुधवार को यह जानकारी दी। विनय की सुधारात्मक याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है।

वहीं, दोषी अक्षय की सुधारात्मक याचिका पर जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी। डेथ वारंट के मुताबिक चारों दोषियों मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को इस मामले में एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी की तारीख तय की गई है।

हालांकि, नई याचिकाएं देने से इस तारीख पर फांसी पर संशय बढ़ गया है। नियमों के मुताबिक, एक ही मामले में चारों दोषियों को एकसाथ ही फांसी दी जा सकती है। ऐसे में अगर किसी दोषी से संबंधित कोई भी याचिका अगर लंबित है तो फांसी की तारीख टल सकती है। PLC.

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