भोपाल। निपाह वायरस से बचाव के लिये स्वास्थ्य विभाग ने जनसामान्य के लिये एडवाइजरी जारी की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एन.यू खान ने बताया कि निपाह वायरस एक घातक वायरल बीमारी है जो कि चमगादड़ द्वारा फेलती है। इस वायरस का स्त्रोत चमगादड के रक्त मे पाया गया है लेकिन इससे चमगादड की मृत्यु नही होती। चमगादड़ द्वारा खाए गए फलों को अन्य जीव जन्तु व मनुष्यों के खाने पर यह बीमारी उनको हो जाती है तथा इससे मृत्यु भी हो सकती हैं। अभी तक यह बीमारी सुअरों और मनुष्यों मे ही पाई गई है। 


निपाह वायरस बीमारी के लक्षण
    सीएमएचओ डॉ एन.यू खान ने बताया कि तेज बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, खांसी सांस लेने मे तकलीफ, बैचेनी, सुस्ती, बेहोशी, उल्टी, दस्त निपाह रोग के लक्षण है। निपाह रोग की जांच के लिए भारत शासन द्वारा वर्तमान मे एनआईवी पुणे बायरोलोजी लैब को चयनित किया गया है जिसमे संदिग्ध रोगीयों के रक्त, मूत्र, गले की लार तथा सीएसएफ के नमुनो का वायरोलोजी परीक्षण किया जाता है। संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर संपर्क करने की सलाह दी है। 


निपाह से बचाव एवं रोकथाम के उपाय
    जनसामान्य को सलाह दी गई कि चमगादड़ वाले क्षेत्रों में चमगादड़ के कुतरे फलों को न खाएं और न ही पेड पर लटकी ताड़ी का सेवन करे। इसी प्रकार बाजार से लाए गए फलों की जांच कर ले कि कहीं वे कुतरे तो नही है। यदि ऐसा हो तो तत्काल उन फलो को फेक दे, उनका सेवन न करे। लंबे समय से बंद तहखाने एवं कुओं में जहां चमगादड हो सकती है वहां नहीं जाने की सलाह दी गई है तथा चमगादड़ो एवं सुअरों के सम्पर्क से बचने के लिए भी कहा गया है। निपाह रोग से संक्रमीत व्यक्ति से दुर रहने तथा रोग की शंका होने पर तत्काल चिकित्सक से सर्म्पक करने के लिए कहा गया है।PLC