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Thursday, October 29th, 2020

निगोसिएशन विश्व बैंक के साथ जल्द दिया जाएगा : जावेद उस्मानी

jawed usmani chief secretary uttar pradeshआई एन वी सी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने कहा है कि उ0प्र0 वाटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के द्वितीय चरण के अन्तर्गत प्रदेश के निचली गंगा नहर प्रणाली के 12 जनपदों, शारदा सहायक समादेश क्षेत्र के हैदरगढ़ शाखा (किलोमीटर 23 डाउन) के 03 जनपद तथा बुन्दलेखण्ड क्षेत्र के जनपद ललितपुर में रोहनी सजनम एवं जामनी बांध नहर प्रणाली में पुनरोद्धार एवं आधुनिकीकरण कार्य हेतु विश्व बैंक के सहयोग से कराया जायेगा, जिसके लिए 2835 करोड़ रूपये की परियोजना की स्वीकृति विश्व बैंक मिशन द्वारा प्रदान की गयी है। परियोजना के क्रियान्वयन हेतु ऋण विश्व बैंक द्वारा 70 प्रतिशत तथा शेष 30 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित होगा। इस परियोजना में राज्य के अन्य विभागों यथा कृषि विभाग, भूजल विभाग, रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेन्टर तथा राज्य ग्राम्य विकास संस्थान द्वारा भी परियोजना में नियोजित कृषि, भूजल तथा अन्य अवयवों पर कार्य कराने में सहयोग प्रदान किया जायेगा। परियोजना का निगोसिएशन विश्व बैंक के साथ माह अप्रैल में कराकर माह मई-जून से कार्य प्रारम्भ करा दिया जाए। उत्तर प्रदेश वाटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के द्वितीय चरण की कार्य अवधि 07 वर्ष रखी गयी है। मुख्य सचिव आज शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में उ0प्र0 वाटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के सम्बन्ध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि निचली गंगा नहर प्रणाली की समानान्तर गंगा नहर की वर्तमान क्षमता को 4200 क्यूसेक से बढ़ाकर उसकी नियोजित क्षमता 8900 क्यूसेक किए जाने का प्र्रस्ताव है तथा इस सम्पूर्ण नहर को पूर्ण रूप से कंक्रीट लाइनिंग किए जाने का प्रस्ताव परियोजना में सम्मिलित किया गया है। जिससे सम्पूर्ण नहर प्रणाली, जिसकी लम्बाई लगभग 8000 किलोमीटर है तथा यह प्रणाली जनपद एटा, इटावा, फिरोजाबाद, फर्रूखाबाद, कासगंज, कन्नौज, कानपुर, कानपुर देहात, फतेहपुर, औरैया, मैनपुरी तथा कौशाम्बी जिलों में टेल की नहरों पर समुचित जल पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इन नहरों को रोस्टर करके चलाया जाता है तथा टेलों पर पर्याप्त पानी पहुंचाने में कठिनाई होती है। शारदा सहायक क्षेत्र के अन्तर्गत जनपद रायबरेली, अमेठी तथा बाराबंकी एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अन्तर्गत जनपद ललितपुर इस परियोजना से लाभान्वित होंगे। श्री उस्मानी ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से सहभागी सिंचाई प्रबन्धन अधिनियम-2009 के अन्तर्गत परियोजना क्षेत्रों में जल उपभोक्ता समितियों का चुनाव एवं गठन किया जाना प्राविधानित है, जिससे नहरों पर प्राप्त जल का जल प्रबन्धन सीधे कृषकों द्वारा निष्पादित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि रिमोट संेसिंग एप्लीकेशन सेन्टर, लखनऊ के माध्यम से सम्पूर्ण परियोजना क्षेत्र का बेस लाइन सर्वे जैसे क्राॅपिंग पैटर्न, क्राॅप इन्टेन्सिटी, लैण्ड यूस्ड डेटा इत्यादि का कार्य कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि परियोजना के अन्तर्गत विभिन्न विभागों द्वारा कराए गए कार्याें के अनुश्रवण, बेस डेटा के सापेक्ष कराया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त परियोजना का अनुश्रवण वेबबेस्ड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सूचना प्रभारी के माध्यम से किए जाने का प्राविधान परियोजना में कराया गया है। मुख्य सचिव ने बताया कि भूजल विभाग द्वारा परियोजना क्षेत्र एवं उत्तर प्रदेश के अवशेष क्षेत्रों के भूजल स्तर का अनुश्रवण अत्याधुनिक डिजिटल आॅटोमैटिक लेवल रिकार्डर स्थापित कर किए जाने का प्राविधान कराया जायेगा। यह प्रणाली वेबबेस्ड किए जाने का प्रस्ताव परियोजना में सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त भूजल विभाग जनपद फर्रूखाबाद के एैंरो ब्लाक, जोकि अतिदोहित ब्लाकों में चिन्हित है, का विशेष अध्ययन एवं सुधार कार्य परियोजना में सम्मिलित है। भूजल विभाग द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश के एक्यूफर मैपिंग का कार्य कराए जाने का प्रस्ताव किया गया है एवं तदानुसार परियोजना में सम्मिलित है। इस कार्य के निष्पादन पश्चात सम्पूर्ण प्रदेश में भूजल स्तर का डिजिटल मैप तैयार होगा, जोकि वेबबेस्ड होगा। बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई श्री दीपक सिंघल, प्रमुख सचिव कृषि एवं सहकारिता श्री देवाशीष पाण्डा, सचिव सिंचाई एवं अध्यक्ष पैक्ट श्री एस0पी0 गोयल, सचिव वित्त श्री बी0एम0 जोशी, विश्व बैंक के टास्क टीम लीडर श्री विंस्टन यू एवं अन्य प्रतिनिधि सुश्री अंजू गौड़, श्री राजगोपाल, श्री बेन ओबरायन सहित विश्व बैंक के प्रतिनिधियों सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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