Sunday, January 19th, 2020

नागरिकता दो, लेकिन 25 साल तक वोटिंग का अधिकार नहीं

मुंबई । केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन बिल पर शिवसेना ने सवाल उठाते हुए नया पैंतरा चला है। शिवसेना ने मोदी सरकार को विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र में लिखा, 'मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह नागरिकता संशोधन बिल पर अडिग है। लेकिन क्या यह विधेयक वोट बैंक की पॉलिटिक्स के लिए पास किया जा रहा है? हम मानते हैं कि हिंदुओं के पास भारत के अलावा कोई दूसरा देश नहीं है, लेकिन अगर वोट बैंक के लिए नागरिकता बिल को पास करने की कोशिश की जा रही है तो यह देश के लिए ठीक नहीं है।' शिवसेना ने कहा, 'हमारी मांग है कि जिन बाहरी लोगों को नागरिकता दी जाएगी, उन्हें 25 सालों तक मतदान का अधिकार नहीं दिया जाएगा। इस बारे में देश के गृह मंत्री अमित शाह को सोचना चाहिए। क्या यह स्वीकार्य है।' शिवसेना ने लिखा है कि दूसरे देशों में जुल्म झेल रहे हिन्दुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसी और जैन को नागरिकता देने के बजाय अमित शाह और नरेंद्र मोदी को अपनी सख्त छवि का इस्तेमाल करते हुए इन देशों की सरकारों से बात करनी चाहिए और वहां पर हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को रोकना चाहिए। शिवसेना ने कहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को इन दो में से एक उपायों को अपनाना चाहिए और राष्ट्रीय हित में काम करना चाहिए।
मुखपत्र के संपादकीय में शिवसेना के सुर बदले नजर आ रहे हैं। इसमें लिखा गया है कि क्या भारत में कम समस्या है जो हमलोग दूसरे देश के लोगों की समस्याएं ले रहे हैं। देश की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। ऐसे हालत में सरकार दूसरे देश के लोगों को भारत की नागरिकता दे रही है। अब ये समझना जरूरी है कि ये कितना राष्ट्रीय हित का मामला है और कितना वोट बैंक पॉलिटिक्स का। संपादकीय में लिखा गया है कि ये सच है कि इस्लामिक देशों में हिन्दुओं के साथ अन्याय हो रहा है। उन्हें द्वितीय श्रेणी का नागरिक माना जा रहा है। इसलिए हिन्दुओं को भारत में शरण लेने की जरूरत पड़ रही है। शिवसेना ने कश्मीरी पंडितों का भी मुद्दा उठाया है। संपादकीय में लिखा गया है कि कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में लाने के लिए सरकार कुछ कर रही है या नहीं।

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