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लखनऊ,
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन समारोह में आज सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री टी0एस0 ठाकुर, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी, प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीय न्यायमूर्ति श्री डी0वाई0 चन्द्रचूड, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्तिगण, अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री एच0जी0एस0 परिहार, अधिवक्तागण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति टी0एस0 ठाकुर मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विचार रखते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि जनता के 1300 करोड़ रूपये की लागत से बनी यह इमारत न्यायाधीश एवं अधिवक्ताओं के सामंजस्य से पूरी शिद्दत के साथ इंसाफ दिलाने का काम करेगी। यह सुखद संयोग है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 150 वर्ष भी इसी वर्ष पूरे हुए हैं। ऐसे में कुछ खास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संकल्प के साथ लम्बित वादों का निपटारा कराने में सहयोग करें। मुख्य न्यायाधीश ने लखनऊ और लखनऊ की संस्कृति की दिल खोलकर तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें लखनऊ से जुड़ने की बड़ी तमन्ना है।
राज्यपाल श्री राम नाईक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के न्यायिक इतिहास में यह सप्ताह ऐतिहासिक रहा। 13 मार्च को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने का समारोह था और आज लखनऊ पीठ के नये भवन का उद्घाटन हो रहा है। मैं अकाउंटस का हूँ, मेरी नजर आकड़ों पर होती है। रूपये 1386 करोड़ की लागत से इमारत तैयार हुई है। यदि इमारत समय से तैयार होती तो समय भी बचता और व्यय भी कम होता। फिर भी यह इमारत भव्य है, इसमें संदेह नहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि नये परिसर का नाम न्याय भवन या न्याय मंदिर होना चाहिए।
श्री नाईक ने कहा कि भारतीय संविधान के तीनों स्तम्भ न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका अपने आप में महत्वपूर्ण हैं। संविधान और विधि की व्याख्या का दायित्व संविधान द्वारा न्यायपालिका को दिया गया है। इसलिए न्यायपालिका को संविधान और कानून के राज का संरक्षक माना गया है। नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना संविधान के तीनों स्तम्भों से अपेक्षित होता है। जनता को शीघ्र और सुलभ न्याय मिले इसके लिए बेंच और बार में संतुलन बनाते हुए पूरी संवेदनशीलता से काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेंच और बार का सहयोग न्यायपालिका के लिए जरूरी है।
राज्यपाल ने यह भी विश्वास जताया कि शीघ्र ही हर स्तर की रिक्तियों को पूरा करके न्यायिक कार्य में और सुगमता आयेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नये परिसर में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं इसलिए अब निश्चित रूप से न्याय देने और दिलाने में गति आनी चाहिए।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि न्यायालय पर देश की जनता की अटूट आस्था है। न्यायालय की मर्यादा को बनाये रखने के साथ-साथ अधिवक्तागण भी गौरवशाली परम्परा को बनाये रखें। उन्होंने परिसर की प्रशंसा करते हुए कहा कि इमारत की भव्यता नई आशा का संचार करती है तथा विश्वास व्यक्त किया कि नये कार्य स्थल के परिवर्तन से कार्यक्षमता में भी वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा कि संविधान के तीनों अंग न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका में विश्वास का सामंजस्य होना चाहिए। राज्य सरकार ने न्यायालय का बजट बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय की सुरक्षा एवं अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। नये भवन का निर्माण होने से उन्होंने विश्वास जताया कि लखनऊ बेंच द्वारा सुलभ और जल्द न्याय दिलाने में आसानी होगी।
उद्घाटन समारोह में मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति डी0वाई0 चन्द्रचूड ने स्वागत उद्बोधन देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इतिहास, बेंच और बार पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति ए0पी0 शाही से धन्यवाद ज्ञापित किया।

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