Thursday, October 24th, 2019
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नए यातायात नियम:न्याय संगत या जन विरोधी

- निर्मल रानी -

                      
देश के अधिकांश राज्यों में  संशोधित यातायात नियम 2019 लागू कर दिया गया है। इस नए नियम के अंतर्गत जुर्माना राशि बेतहाशा बढ़ाई गई है तथा कई धाराओं में वाहन चालक अथवा स्वामी को जेल की सज़ा भुगतने तथा निर्धारित अवधि के लिए लाइसेंस निरस्त करने का भी प्रावधान किया गया है। जबकि कुछ नए नियम भी गढ़े गए हैं और इनपर भी भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है।राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल राज्यों ने इस नए संशोधित यातायात अधिनियम को अपने राज्यों में लागू नहीं किया है। ये दोनों ही राज्य जुर्माने की राशि अत्यधिक बढ़ाए जाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले का शुरू से ही विरोध कर रहे थे। राजस्थान सरकार का तो यह मत भी है कि इतने अधिक जुर्माने से भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। भारत जैसे मध्यम व निम्न मध्यम वर्ग बाहुल्य इस देश में यदि इन संशोधित यातायात नियमों के सन्दर्भ में बात की जाए तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि इस नए नियम के बहाने सरकार द्वारा जनता की जेब से पैसे निकालने का एक ज़रिया मात्र तलाशने की कोशिश की गई है। चर्चा इस बात भी हो रही है कि नोट बंदी से लेकर जल्दबाज़ी में लागू किये गए जी एस टी के प्रावधानों आदि के चलते देश की अर्थव्यवस्था को होने वाले नुक़्सान की भरपाई के लिए जो क़दम सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं, नया यातायात नियम भी उसी आर्थिक वसूली अभियान का एक हिस्सा है। बहरहाल इस संशोधित यातायात अधिनियम के बहाने जनता से आर्थिक वसूली का जो बहाना तलाश किया गया है क्या वह पूरी तरह न्याय सांगत है?क्या केवल जनता पर आर्थिक बोझ लाद देने से यातायात व्यवस्था में सुधार हो सकेगा ? सरकार ने आम लोगों के लिए यातायात नियम तो इतने सख़्त बना दिए गए हैं परन्तु  क्या सरकार व प्रशासन की ग़लतियों या लापरवाहियों की वजह से जनता को होने वाले नुक़्सान,दुर्घटनाओं यहाँ तक कि लोगों की मौत का भी आख़िर कोई ज़िम्मेदार है या नहीं ? आख़िर यह कैसा लोकतंत्र है जहाँ धर्म व सम्प्रदाय की बूटी सुंघा कर उन्हीं लोगों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है जिन्होंने वर्तमान सरकार को सत्ता के सिंहासन पर बिठाने की "ग़लती" की थी?
                                
राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 को मंजूरी देने के बाद नए यातायात नियम के अनुसार अब पुलिस को ट्रैफ़िक नियम तोड़ने पर 8 ऐसे अधिकार मिले हैं जिनमें सीधे तौर पर लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा।  ट्रैफ़िक नियम तोड़ने पर सख़्त सज़ा होगी. यदि किसी अवयस्क से वाहन चलाते समय कोई दुर्घटना होती है  तो उसके माता-पिता को 3 साल तक की जेल की सज़ा होने की व्यवस्था तो है ही साथ साथ दुर्घटना ग्रस्त वाहन का रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जाएगा। जुर्माने की रक़म भी कई गुना बढ़ाई गई है।इसके अलावा अवयस्क पर जुवेनाइल एक्ट के तहत मुक़द्द्मा भी चलेगा। धारा 193 के तहत लाइसेंस नियमों को तोड़ने पर 25,000 से 1 लाख रु तक के जुर्माने का प्रावधान है जबकि धारा 194 के तहत ओवरलोडिंग (निर्धारित सीमा से अधिक माल का भार होने पर) 2000 रुपये और प्रति टन 1000 रु अतिरिक्त 20,000 रु और प्रति टन 2000 रु अतिरिक्त के जुर्माने का प्रावधान है। इसी प्रकार धारा 194 A के अंतर्गत ओवरलोडिंग अर्थात क्षमता से अधिक  यात्री होने पर 1000 रु प्रति अतिरिक्त सवारी की दर से जुर्माना भरना पड़ेगा। जबकि धारा 194C के अंतर्गत अब स्कूटर व मोटरसाइकिल  पर ओवरलोडिंग यानी दो से अधिक लोग होने पर  2000 रु तक का जुर्माना और 3 महीने के लिए लाइसेंस रद्द हो सकता है। इसी तरह धारा 194D के तहत बिना हेलमेट के वाहन चलाने वाले को 1000 रु तक का जुर्माना देना होगा।इसके अलावा  3 महीने के लिए लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। धारा 194E केअंतर्गत अब एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता ना देने पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। धारा 196 के तहत अब बिना बीमा (इंश्योरेंस) वाला वाहन चलाने पर 2000 रुपये का जुर्माना देना होगा। धारा 193 के तहत लाइसेंस नियमों को तोड़ने पर 25,000 से 1 लाख रु तक के जुर्माने का प्रावधान है।
                               
भारत जैसे देश में जहाँ लगभग 65-70 प्रतिशत लोग देश की ख़ुशहाली का भ्रम बनाए रखने में अपना योगदान देने के लिए बैंकों तथा अन्य निजी फ़ाइनेंस कम्पनीज़ से आर्थिक सहायता लेकर लोन का वाहन  ख़रीदते हों।  साधारण लोग नोटबंदी, मंदी या बेरोज़गारी का शिकार होने की वजह से अपने वाहन के लोन की किश्तें भी ठीक से अदा नहीं कर पा रहे हों। हक़ीक़त तो यह है कि अनेक वाहन चालक अथवा स्वामी  तेल के आए दिन बढ़ते हुए दामों का बोझ उठाने तक में असमर्थ रहते हों,ऐसे लोगों को यदि 5,10 और बीस हज़ार रूपये जुर्माने का भुगतान उसकी किसी ग़ल्ती की वजह से करना पड़ गया तो या तो वह अपना वाहन ही हमेशा के लिए ट्रैफ़िक पुलिस के हवाले करके घर चला जाएगा या उसे जुर्माना भरने लिए पुनः लोन लेना पड़ेगा।
                                 
यदि इस संशोधित मोटर वेहिकल अधिनियम 2019 को लागू करने के पीछे सरकार का मक़सद चालकों को अनुशासित बनाना या दुर्घटनाएं रोकना है फिर आख़िर सरकार व  प्रशासन की लापरवाही व ग़लत नीतियों के चलते होने वाली दुर्घटनाओं का ज़िम्मेदार कौन है।क्या नए यातायात अधिनियम लागू करने वाली सरकार यह बताएगी कि सड़कों के गड्ढे या मेनहोल के खुले ढक्कन की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं की ज़िम्मेदारी किसकी है और उस ज़िम्मेदार पर क्या जुर्माना लगेगा? सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशु जैसे सांड,गाय,सूअर,घोड़े,कुत्ते तथा नीलगाय आदि से वाहनों के अचानक टकराने से होने वाले हादसों का ज़िम्मेदार कौन और इसकी भरपाई कौन करेगा? इसी प्रकार कभी सिग्नल की ख़राबी के चलते दुर्घटना होती है तो कभी सिग्नल की बत्ती गुल होने की वजह से। अनेक दुर्घटनाएं व जाम जैसी स्थिति सड़कों पर हर तरफ़ होने वाले अतिक्रमण की वजह से भी होती हैं। परन्तु सरकार के पास अतिक्रमण हटाने व पार्किंग का उचित प्रबंध करने जैसी ज़रूरी व्यवस्था हर जगह उपलब्ध नहीं है। जिसकी वजह से केवल दुर्घटना व जाम की ही स्थिति नहीं बनती बल्कि बेतहाशा प्रदूषण भी फैलता है।
                            
अतः सरकार को जनता की जेब पर डाका डालने जैसी व्यवस्थाओं से बाज़ आना चाहिए और इस नव संशोधित वाहन अधिनियम 2019 पर पुनर्विचार करना चाहिए। सरकार को देश की जनता की दिनोंदिन बदतर होती जा रही आर्थिक स्थिति पर "दया" करनी चाहिए। सड़कों को गड्ढामुक्त करना चाहिए व आवारा जानवरों के खुले आम घूमने को रोकने के उपाय तलाशने चाहिए। इसके बिना भारी जुर्माने व कड़ी सज़ा देने जैसे नियम बनाना न्यायसंगत तो क़तई नहीं बल्कि जनविरोधी ज़रूर हैं। 

 

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परिचय –:
निर्मल रानी
लेखिका व्  सामाजिक चिन्तिका
 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर निर्मल रानी गत 15 वर्षों से देश के विभिन्न समाचारपत्रों, पत्रिकाओं व न्यूज़ वेबसाइट्स में सक्रिय रूप से स्तंभकार के रूप में लेखन कर रही हैं !
 
संपर्क -: Nirmal Rani  :Jaf Cottage – 1885/2, Ranjit Nagar, Ambala City(Haryana)  Pin. 4003 E-mail : nirmalrani@gmail.com –  phone : 09729229728
 
Disclaimer : The views expressed by the author in this feature are entirely her own and do not necessarily reflect the views of INVC NEWS.


 

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