pakistan and bangladesh flag{संजय कुमार आजाद**}
भारत के पड़ोसी मुल्क में जनवरी के प्रथम सप्ताह में दसवीं संसदीय इंतिखाब हुए।विपक्षी पार्टियों इस्लामी अतिवादियों के शह पर चुनाव का बहिष्कार कर रखा था।फिर भी बांगलादेष में लोगों ने चुनाव में हिस्सा लिया। 144000 वर्ग किलोमीटर में फैला बांगलादेष का जम्हूरियत और वहां निवास कर रहे कुल आवादी के लगभग अब महज 8.2 फीसदी हिन्दू दोनो हीं दोनों बेगमों की जंग का षिकार बन रहे हैं।स्मरण हो कि 1947 की नेहरू-जिन्ना बंटवारे के समय बांगलादेष (पष्चिमी पाकिस्तान) में हिन्दूओं का प्रतिषत लगभग 31 फीसदी से अधिक था वह आज 8 फीसदी से भी कम हो गया।तथाकथित नेहरूवादी भारत की आजादी ने हिन्दूओं को सर्वाधिक विनाष किया। 1971 से पूर्व पाकिस्तानी फौजियों ने पष्चिमी पाकिस्तान में बांग्ला-उर्दू बोली के नाम पर खासकर हिन्दूओं पर जो अत्याचार किया वह अमानुषिक था। लाखेंा हिन्दूओं को अपनी जान-जमीन और बहु-बेटियॉं गवानी पड़ी। भारत सरकार इन हिन्दूओं को भाषा के नाम पर जिबह करवाया जिसका उल्लेख अनेक विदेषी लेखकों ने किया है। 1971 में बर्वर पाकिस्तानी नरभक्षियों से मिली मुक्ति के बाद हिन्दुओं ने सोचा अब हमारे दिन भी बहुरेगें किन्तु यह दिवा स्वप्न ही सावित हुआ।

23 अप्रैल 1977 को बांगलादेष का संविधान में संषेाधन कर इस्लामी मुल्क की क्रूर पंजा में इस देष को फंसा दिया फलतः हिन्दूओं के लिये बांगलादेष नरक बनना प्रारंभ हुआ। 9 जून 1988 को फिर संविधान में संषोधन हुआ इसके बाद तो बांग्लादेष में गैर-इस्लामी लोगों के लिये कोई जगह ही नही बची। हिन्दू अमेरिकन फाउण्डेषन 2006 की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 1991 में बांग्लादेष में हिन्दूओं की सरकारी आकंड़ा 32.5 मिलीयन बताई गयी जबकि वास्तव में ये संख्या महज 12.5 मिलीयन हीं थी यानि 20 मिलीयन हिन्दू (मारे या जबरदस्ती मतांतरित हुए) गायब हो गये? अक्टूबर 2001 के जेनरल इलेक्षन में इस्लामी आतंकियों की आंखेंा का नूर बेगम खालिदा जिया और उसके 18 खूनी पंजों बाली गठजोड़ की सरकार बनी तो बांग्लादेष में रह रहे हिन्दूओं पर वेइन्तहां अत्याचार प्रारंभ हुए।खालिदा जिया की सोच है कि हिन्दु आवामी लीग का समर्थक है फलतः जिया की सरकार के दौर में हिन्दुओं की स्थिति नारकीय हो गयी। इसका एक बानगी बांग्लादेष के लेखक सलाम आजाद की पुस्तक – षर्मनाक में पढ़ी जा सकती है।

हिन्दूओं की संपति पर जबरन अधिकार करने के लिये ही तत्कालीन पाकिस्तान का कानून जो 1965 में बना ऐनेमी प्रॉपर्टी एक्ट (Enemy Property Act-1965) 1972 में वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट (Vested Property Act-1972) और 2001 में बना वेस्टेड प्रॉपर्टी रिर्टन बिल (Vested Property Return Bill-2001) को सबसे ज्यादा दूरूपयोग किया गया क्योंकि वहां की जिया सरकार हिन्दूओं को दुष्मन के रूप में देखती है।विष्व के अनेक देषों के मानवाधिकारवादियों ने इस विवादास्पद बिल पर उंगली उठायी किन्तु भारत सरकार और भारतीय मानवाधिकारवादियों को कुछ भी दिखाई नहीं दिया,? बेगम खालिदा जिया की अगुआई बाली बांग्लादेष नेषनलिस्ट पार्टी के लिये तो हिन्दू मूक्त बांग्लादेष मूल केन्द्र रहा है।इस पार्टी के शासन के दौरान बांग्लादेष में हिन्दूओं की हत्या, उनके बहु-बेटियों का अपहरण, मंदिरों में तोड़फोड़,लुटपाट, बलात्कार,संपतियों पर कब्जा मानो दिनचर्या का अंग रहा है। बांग्लादेष में हिन्दूओं की दुर्गति वहां रह रहे अन्य अल्पसंख्यकों की अपेक्षा ज्यादा होती है कारण है कि यदि ईसाईयों के साथ ज्यादती होती है तो खुद अमेरिका सहित अन्य देष उसके लिए खड़े हो जाते है किन्तु वहां के हिन्दूओं पर होने बाले अमानवीय अत्याचार पर कोई बोलने बाला नहीं है।

हिन्दू अमेरिकन फाउण्डेषन ने अपनी एक रिपोर्ट में कुछ दर्ज अपराधेंा का आंकड़ा दिया है जो बंगलादेष के हिन्दुओं पर वहां के मुसलमानों ने किया है। साल 2005 के सिर्फ जून महीने में हीं सरकारी आंकड़ा के अनुसार हिन्दूओं का अपहरण-02 केस, बलात्कार के 07 केस,मंदिरो पर आक्रमण के 06, जबरदस्ती हिन्दूओं की संपति पर कब्जा के 14, लुटपाट जबरदस्ती के 16 बारदात हुए। सरकारी आकड़ों के अनुसार प्रति माह औसतन हिन्दूओं पर 60 से 70 बारदात होते हैं। ये तो दर्ज होते है उसका किन्तु अनेक संगठनों का मानना है कि लगभग 80 फीसदी घटनाओं की सूचना स्थानीय मुल्ला-मौलवियों के भय से हिन्दू दर्ज नहीं करवातें है।जनवरी से सितम्बर 2008 के बीच 47 मंदिरों में लूटपाट तोड़फोड़ एवं उनके पुजारियों की हत्या जैसी घटनाएं हुई।

स्मरण हो कि 1971 में पाकिस्तान की सेना और जमात ए इस्लामी का गठजोड़ ने बांग्लादेष मे जो नरसंहार किया था उस पर बांग्लादेष इंटरनेषनल क्राइम ट्रिब्यूनल का फैसला आया है उस फैसले में जमात ए इस्लामी के अनेक नरभक्षियों को फांसी की सजा दी गयी है । जमात ए इस्लामी अभी विपक्षी बांगलादेष नेषनलिस्ट पार्टी के साथ है । विगत 13 दिस.2013 को मीरपुर का कसाई के नाम से कुख्यात नरभक्षी मुसलमान अब्दुल मुल्ला कादिर को फांसी दी गयी।उस फांसी के बाद बांग्लादेष में सैकड़ों हिन्दुओं के घरों में आग लगा दी गयी उनके संपति, बहु-वेटियों का बलात्कार हुआ अनेक निरपराध हिन्दु मारे जा रहे है। अभी जो स्थिति है उसमें वहां के हिन्दूओं को सबसे अधिक प्रताड़ित किया जा रहा है। वहां की गंभीर स्थिति पर अतंराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेषनल ने कहा है- “The Hindu Community in Bangladesh is at extreme risk……it shocking that they appear to be targeted simply for their religion”. भारत की सरकार उन हिन्दूओं के बारे में सोचे ऐसा दिखता नही ।

साल 2011 में एक न्यायायिक आयोग ने पाया कि वी-एन-पी और उसके सहयोगी दलों के 26352 लोग 25 उसके मंत्री और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों ने 2001 के बाद अतिवादी बेगम खलिदा जिया की सरकार के शह पर लगभग 18000 गंभीर अपराध हिन्दूओं के विरूद्ध किया। 2001 की सत्ता के बाद बेगम खालिदा जिया ने एक प्रकार से हिन्दूओं का नरसंहार करवाया किन्तु विष्व विरादरी उस घृणित शासकीय हिन्दु नरसंहार पर चुप रहा? ग्लोबल हयूमन राइट डिफेन्स ने 2001 के बाद की हुई घटनाओं पर लिखा कि -लगभग 5 लाख हिन्दू 2001 के चुनाव के बाद रिफयूजी बने।

मुस्लिम देषों की मदद से लगभग 64000 से अधिक मदरसों के माध्यम से अतिवादी मुस्लिमों की पौध बांग्लादेष में तैयार की जा रही है। ऐ मदरसों से निकलकर वहां की बांग्ला-संस्कृति को मटियामेट कर आज बांग्लादेष में तो कल वहां से बाहर इस्लामी आतंक फैलाऐगें इसमें रंचमात्र भी संषय नही है। खासकर दक्षिण एषिया में आतंक का नित नया पौध तैयार हो रहा है। इस पौध को पाकिस्तान की कुख्यात आई एस आई का सरपरस्त मिला है। क्योंकि संयुक्त राष्ट्र में जबसे आवामी लीग की वर्तमान प्रधानमंत्री बेगम शेख हसीना ने परवेज मुर्षरफ की सैन्य सरकार की आलोचना की थी तबसे पाकिस्तानी शासक व फौज आवामी लीग के पीछे पागल कुत्ते की तरह दौड़ रही है। बांगलादेष नेषनलिस्ट पार्टी, जमाते ए इस्लामी सहित अन्य 18 दलों का समूह एवं अनेक आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की खुली समर्थन प्राप्त है और उसका एकमात्र जो लक्ष्य अभी है वह है किसी भी प्रकार से बांग्लादेष को हिन्दू मुक्त बनाना एवं भारत में अस्थिरता पैदा कराना।जिस तरह से बांगलादेषमें हिन्दूओं की संख्या घट रही वह उनके मनसुवों का बयान करता है:-

मत वर्ष-1975 वर्ष-1990 वर्ष-2010
मुस्लिम 86 फीसदी 89 फीसदी 90.4 फीसदी
हिन्दू 13.2 फीसदी 10 फीसदी 08.2 फीसदी
ईसाई 0.3 फीसदी 0.4 फीसदी 0.6 फीसदी
बौद्ध 0.3 फीसदी 0.5 फीसदी 0.7 फीसदी
अन्य 0.2 फीसदी 0.1 फीसदी 0.1 फीसदी

कभी भारत और नेपाल के बाद सर्वाधिक हिन्दू बाहुल्यता वाला देष बांगलादेष में हिन्दू आज किस कदर घट रहें है। उसी बांगलादेष में अन्य अल्पसंख्यकों की संख्या निरंतर बढ़ रही जबकि हिन्दू निरंतर लुप्त होते जा रहें हैं? सामान्यतः हिन्दू लड़कियां और औरते बांगलादेष में सबसे अधिक असुरक्षित है।

‘‘अधिकार’’ नामक स्वयंसेवी संगठन का एक रिर्पोट बताता है- बांग्लादेष में साल 2012 में हिन्दु महिलाओं में 281 औरतों, 447 लड़कियां, 32 नावालिग लड़कियां इस्लामी अतिवादियों  के सामुहिक बलात्कार की शिकार  हुई। जनवरी 2012 में 36 साल की पार्वती रानी नामक विवाहित हिन्दू महिला के साथ हारून अर राषिद ने अपहरण कर बलात्कार किया और उसे और उसकी 14 वर्षीय वेटी को जबरदस्ती इस्लाम कवूल करवाया। इतना ही नही फरवरी 2012 में 85 वर्षीय वृद्धा महिला के साथ तीन मुसलमानों ने उनके आश्रम पर हमला कर उनके साथ बलात्कार किया।खासकर बांग्लादेष इंटरनेषनल क्राइम ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद तो हिन्दूओं पर होने बाले पाष्विक अत्याचारों की बाढ़ आ गई है। ग्लोबल हयूमन राइट डिफेन्स ने अपने नवीनतम रिपोर्ट में लिखा है-In Bangladesh,Gang Rape has become a majour tool of political terror,forcing minorities to flee and has proven more effective than murder.The victims have all been women belonging to either of the Ethnic/religious minorities.Neither little girls nor pregnant womenand the elderly are spared.The perpetrators are men belonging to various branches of Muslim extremist political parties including direct branches to the Bangladesh Nationalist Party ( e.g. various student wing’s of BNP like JCD  इतना ही नही वह रिपोर्ट बताती है  State That Rape has been used to shame Hindu Society and as a Genocidal device to drive hindus out of Bangladesh. आखिर बांग्लादेष में इस तरह के घटनाओं पर भारत के मार्क्स-मुल्ला-मैकाले और मायनो के मानसपुत्रों के मुह पर ताला क्यों लग जाता है।

इसबार के यानि 10 वीं संसदीय चुनाव के बाद की जो परिस्थिति बन रही वह हिन्दुओं के लिये हीं नहीं मानवता के लिये भी चिन्ताजनक है। इस्लामी कटृरवादीयों और पाकिस्तान के सहयोग से बेगम खालिदा जिया और उसके कुनवे पिछले साल से जिस तरह का माहौल देष में कायम कर रखा है वह अत्यन्त चिन्ताजनक है। आज बांग्लादेष में हिन्दू, महिलाओं का अपहरण, संपति का जबरन दखल, जबरण धर्मान्तरण, जबरण चन्दा फिरौती, उनके मंदिरो पर आक्रमण, उनके संस्कार व संस्कृति पर रोक, हत्या, लुटपाट, आगजनी जैसे घटना से त्रस्त है वैसे में वहां की वर्तमान राजनीतिक माहौल पाष्विक इस्लामी आतातायिायेंा को और शह दे रही है। खासकर विपक्षी पार्टी में असामाजिक तत्वों का वर्चस्व अत्यन्त चिन्ताजनक है। इस परिदृष्य में विष्व के सभी देषों का ध्यान बांगलादेष में हो रहे हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचार पर ध्यान देकर मानवता की रक्षा करनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र एवं उसके अधीनस्थ संस्था को इस अमानुषिक व्यवहार के लिये सवंधित पक्षों पर कठोरतम कारवाई करनी चाहिए। इस्लाम के नाम पर जो बदनुमा दाग इस्लाम के सिद्धान्त पर लग रहा है वह खुद इस्लामी देषों को भी सोचना चाहिए।

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sanjay-kumar-azad121**संजय कुमार आजाद
पता : शीतल अपार्टमेंट,
निवारणपुर रांची 834002
मो- 09431162589
(*लेखक स्वतंत्र लेखक व पत्रकार हैं)
*लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और आई.एन.वी.सी का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं ।

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