ज़ाकिर हुसैन 

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा है कि मानसून में देरी और कम बारिश की कमी से देश में सूखे के हालात पैदा हो गए हैं.  लेकिन स्थिति से निपटने के लिए देश में अनाज का पर्याप्त भंडार है। साथ उन्होंने आगामी महीनों में खाद्य पदार्थों के दामों में और बढ़ोतरी होने की चेतावनी भी दी.

देश में मानसून की स्थिति पर आज को राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मलेन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान हुई बंपर फसल की सरकार वजह से देश इस स्थिति से निपटने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सूखा प्रभावित इलाकों को अनाज मुहैया कराया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र इस हालत से निपटने के लिए कारगर क़दम उठाएगा. साथ उन्होंने कहा जरूरत कि पड़ने पर सरकार बाजार में भी हस्तक्षेप करेगी।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की देरी और कम बारिश की वजह से कृषि पर, जिसस असर पड़ा है.  धान की बुवाई क्षेत्र में 60 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की कमी आई है। साथ उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में खरीफ की कम उपज से आगामी महीनों में खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है।

उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए त्वरित, सामूहिक और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर बल जोर देते हुए कहा कि भंडारण को सीमा में रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि काला बाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
 
प्रधानमंत्री ने राज्यों से कहा कि अगर उनके पास पर्याप्त राहत कोष नहीं हैं, तो वे जल्द राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से मदद के लिए ज्ञापन तैयार कर केंद्र को सौंपें।  इस बात पर अफ़सोस जताया कि अभी तक किसी भी राज्य ने मदद के लिए केंद्र को ज्ञापन नहीं दिया है, जबकि देश के 141 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि फसल, पेयजल, मानव एवं पशु स्वास्थ्य और चारे आदि के लिए राहत कार्य तत्काल शुरू किया जाना चाहिए और अनाजों की उपलब्धता और आवश्यक वस्तुओं के दामों पर नजदीकी नजर रखी जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र ने हाल में राज्यों द्वारा प्रभावित किसानों को दी जाने वाली डीजल सब्सिडी की 50 फीसदी भरपाई करने की घोषणा की है। साथ ही केंद्रीय पूल से भी कुछ राज्यों को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री से अन्य राज्यों को भी इसी तरह की मदद देने को कहा गया है। राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस अतिरिक्त बिजली का इस्तेमाल सिर्फ कृषि कार्यो के लिए किया जाए। कम बारिश के प्रभाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री ने किसानों को सुझाव दिया कि जहां धान की बुवाई नहीं हो सकती है वहां अन्य फसलों की बुवाई की जाए, जबकि ठीक-ठाक बारिश वाले इलाकों में परंपरागत फसल का उत्पादन किया जाए। सिंह ने राज्यों से आगामी रबी सीजन के लिए किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पुख्ता योजना बनाने की जरूरत पर बल दिया।

ज़ाकिर हुसैन 

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा है कि मानसून में देरी और कम बारिश की कमी से देश में सूखे के हालात पैदा हो गए हैं.  लेकिन स्थिति से निपटने के लिए देश में अनाज का पर्याप्त भंडार है। साथ उन्होंने आगामी महीनों में खाद्य पदार्थों के दामों में और बढ़ोतरी होने की चेतावनी भी दी.

देश में मानसून की स्थिति पर आज को राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मलेन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान हुई बंपर फसल की सरकार वजह से देश इस स्थिति से निपटने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सूखा प्रभावित इलाकों को अनाज मुहैया कराया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र इस हालत से निपटने के लिए कारगर क़दम उठाएगा. साथ उन्होंने कहा जरूरत कि पड़ने पर सरकार बाजार में भी हस्तक्षेप करेगी।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की देरी और कम बारिश की वजह से कृषि पर, जिसस असर पड़ा है.  धान की बुवाई क्षेत्र में 60 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की कमी आई है। साथ उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में खरीफ की कम उपज से आगामी महीनों में खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है।

उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए त्वरित, सामूहिक और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर बल जोर देते हुए कहा कि भंडारण को सीमा में रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि काला बाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
 
उन्होंने इस बात पर अफ़सोस जताया कि अभी तक किसी भी राज्य ने मदद के लिए केंद्र को ज्ञापन नहीं दिया है,  जबकि देश के 141 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने कुछ राज्यों द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत उपलब्ध कोष का पूरी तरह इस्तेमाल न किए जाने पर भी चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने राज्यों से आगामी सत्र में अपने धान और गेहूं खरीद के लक्ष्य को पूरा करने को भी कहा है. प्रधानमंत्री ने किसानों को सुझाव दिया कि जहां धान की बुवाई नहीं हो सकती है वहां अन्य फसलों की बुवाई की जाए.

उन्होंने बताया कि केंद्र ने हाल में राज्यों द्वारा प्रभावित किसानों को दी जाने वाली डीजल सब्सिडी की 50 फीसदी भरपाई करने की घोषणा की है। उन्होंने राज्यों से किसानों को पर्याप्त कृषि संसाधन मुहैया कराने को कहा है.

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